ग्वालियर हाईकोर्ट ने शिवपुरी के तत्कालीन कलेक्टर और ADM के खिलाफ कार्रवाई के दिए निर्देश

Adhiraj Awasthi

ग्वालियर। ग्वालियर उच्च न्यायालय ने शिवपुरी जिले में 10 वर्ष पूर्व हुई सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती प्रक्रिया को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर (ADM) को नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है और सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों से की जाए।

Gwalior High Court Directs Action Against the Then Collector and SDM of Shivpuri

शिवपुरी के योगेश कुमार कुशवाह ने साल 2015 में इस भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ग्वालियर में याचिका दायर की थी। 11 सितंबर 2014 के आदेश के अनुसार चयन प्रक्रिया लोक सेवा प्रबंधन विभाग के 14 जुलाई 2011 के परिपत्र के आधार पर होनी थी। परिपत्र में योग्यता केवल स्नातक तय थी।

मेरिट सूची स्नातक में मिले अंकों के आधार पर बननी थी। अतिरिक्त कलेक्टर शिवपुरी ने परिपत्र की अनदेखी की। स्नातक में न्यूनतम 60% अंक अनिवार्य कर दिए। परिपत्र के अनुसार उम्मीदवार का विज्ञान विषय में स्नातक होना जरूरी था। विज्ञापन में इसे नजरअंदाज किया गया। हाईकोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड से साफ है, विज्ञापन जारी करते समय 14 जुलाई 2011 के परिपत्र की शर्तों का उल्लंघन हुआ। परिपत्र में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने सक्षम अधिकारी को निर्देश दिए कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना 26 सितंबर 2014 को विवादित विज्ञापन जारी करने वाले कलेक्टर, अतिरिक्त कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करें।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रतिवादियों की गलती के कारण याचिकाकर्ता चयन प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गया। जब भी नया विज्ञापन जारी हो, याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी को आयु सीमा या अधिकतम आयु सीमा के आधार पर अस्वीकार न किया जाए। प्रतिवादी याचिकाकर्ता के आवेदन पर योग्यता के आधार पर विचार करेंगे। उसकी उम्मीदवारी को आयु सीमा या अधिकतम आयु सीमा के आधार पर अस्वीकार नहीं करेंगे।

1.50 लाख रु. याचिकाकर्ता को , 25 हजार रुपए नगर निगम ग्वालियर में जमा करने के निर्देश हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रतिवादियों ने 14 जुलाई 2011 के परिपत्र में निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत विज्ञापन जारी किया। इसलिए याचिकाकर्ता के लिए लंबी मुकदमेबाजी का खर्च 1.50 लाख रु. निर्धारित किया है।

याचिकाकर्ता को 30 दिन के भीतर भुगतान किया जाए। प्रतिवादियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे नगर निगम, ग्वालियर के स्वच्छता एवं कचरा खाते में 25 हजार रु. जमा करें। हालांकि प्रतिवादियों को उक्त 1.75 लाख रु. दोषी अधिकारी से कानून के अनुसार, सुनवाई का अवसर देने के बाद, वसूल करने की स्वतंत्रता होगी।