शिवपुरी। शिवपुरी में बीते 27 फरवरी को शिवपुरी प्रशासन ने शिवपुरी तहसील वृत्त के अंतर्गत आने वाले ग्राम बांस खेड़ी गांव में सरकारी भूमि खसरा नंबर 97 और 53 पर धारा 248 के कार्यवाही की थी। इस मामले मे अतिक्रमण धारी दीपक गुप्ता को नोटिस जारी कर जबाब मांगा गया था,दीपक गुप्ता ने समय सीमा पर जवाब नही दिया था इस कारण कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने इस शासकीय जमीन को अतिक्रमण मुक्त कर दिया था।
यह मामला था सुखाचार अधिकार के तहत कृषि भूमि पर जाने के लिए रास्ता देने का था। अवश्य ही कृषि भूमि के मालिक दीपक गुप्ता ने सुखाचार अधिकार के तहत आवेदन दिया होगा और तहसीलदार शिवपुरी ने कृषि भूमि पर जाने के लिए 12 फुट का रास्ते की परमिशन दी होगी,लेकिन यहां दीपक गुप्ता ने 12 फुट की परमिशन मिलने के बाद 25 फुट का डामर रोड डालकर इस जमीन के भूखंड के टूकडे टूकडे कर बेच दिए। मामला मीडिया ने प्रकाशित किया तो प्रशासन ने इस डामर की सड़क को उखाड़ दिया।
लेकिन यहां तक प्रशासन की कार्यवाही अधूरी है। शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने दीपक गुप्ता को दिए गए नोटिस की कॉपी मांगी और क्या क्या कार्यवाही की गई इसकी जानकारी मांगी तो शिवपुरी तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने जानकारी नहीं दी और बोले जानकारी लेना है तो विधिवत आवेदन किजिए। अब तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा इस कार्यवाही की जानकारी देने से क्यों बच रहे है यह भगवान ही जाने लेकिन यह बात तो सत्य है कि यहां पर सुखाचार अधिकार का दुरुपयोग किया गया है।
सुखाचार की परमिशन लेने वाले दीपक गुप्ता ने कृषि भूमि पर जाने के लिए परमिशन ली थी और उस पर एक कॉलोनी बेच दी। यह एक बडा क्राइम है,विधिवत अनुमति लिए बिना ही खेतों के टूकडे टूकडे कर बेच दिया गया है। यह एक सवाल का भी जन्म होता है शासन से रास्ता लेने के लिए कितने किसानों ने आवेदन किया था, क्या आदेश देने वाले प्रशासनिक अधिकारी ने जांच की थी कि क्या पिछले 5 वर्षों मे इस जमीन पर खेती की जा रही है या नही।
प्रशासन ने सुखाचार अधिनियम के तहत इस रास्ते को उखाड़ दिया,लेकिन इस परमिशन को अभी तक रद्द नहीं किया क्यों कि जिस जमीन के लिए इस सुखाचार अधिनियम के तहत कृषि भूमि पर जाने के लिए रास्ता मांगा था अब वहां पर कोई कृषि योग्य भूमि नही नही बची और कृषि भूमि को भूखंड बनाकर बेच दिया है। वही अधिनियम की प्रवृति के विरुद्ध काम करने वाले दीपक गुप्ता ने भूखंड को खरीदने वाले लोगों के साथ भी धोखाधडी कर दी,इसके लिए आरोपी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होना चाहिए,लेकिन तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा मामले को दबाए बैठे है इसलिए इस कार्यवाही से संबंधित कागजात प्रेस को देने से बच रहे हैं।
यह मामला था सुखाचार अधिकार के तहत कृषि भूमि पर जाने के लिए रास्ता देने का था। अवश्य ही कृषि भूमि के मालिक दीपक गुप्ता ने सुखाचार अधिकार के तहत आवेदन दिया होगा और तहसीलदार शिवपुरी ने कृषि भूमि पर जाने के लिए 12 फुट का रास्ते की परमिशन दी होगी,लेकिन यहां दीपक गुप्ता ने 12 फुट की परमिशन मिलने के बाद 25 फुट का डामर रोड डालकर इस जमीन के भूखंड के टूकडे टूकडे कर बेच दिए। मामला मीडिया ने प्रकाशित किया तो प्रशासन ने इस डामर की सड़क को उखाड़ दिया।
लेकिन यहां तक प्रशासन की कार्यवाही अधूरी है। शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने दीपक गुप्ता को दिए गए नोटिस की कॉपी मांगी और क्या क्या कार्यवाही की गई इसकी जानकारी मांगी तो शिवपुरी तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने जानकारी नहीं दी और बोले जानकारी लेना है तो विधिवत आवेदन किजिए। अब तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा इस कार्यवाही की जानकारी देने से क्यों बच रहे है यह भगवान ही जाने लेकिन यह बात तो सत्य है कि यहां पर सुखाचार अधिकार का दुरुपयोग किया गया है।
सुखाचार की परमिशन लेने वाले दीपक गुप्ता ने कृषि भूमि पर जाने के लिए परमिशन ली थी और उस पर एक कॉलोनी बेच दी। यह एक बडा क्राइम है,विधिवत अनुमति लिए बिना ही खेतों के टूकडे टूकडे कर बेच दिया गया है। यह एक सवाल का भी जन्म होता है शासन से रास्ता लेने के लिए कितने किसानों ने आवेदन किया था, क्या आदेश देने वाले प्रशासनिक अधिकारी ने जांच की थी कि क्या पिछले 5 वर्षों मे इस जमीन पर खेती की जा रही है या नही।
प्रशासन ने सुखाचार अधिनियम के तहत इस रास्ते को उखाड़ दिया,लेकिन इस परमिशन को अभी तक रद्द नहीं किया क्यों कि जिस जमीन के लिए इस सुखाचार अधिनियम के तहत कृषि भूमि पर जाने के लिए रास्ता मांगा था अब वहां पर कोई कृषि योग्य भूमि नही नही बची और कृषि भूमि को भूखंड बनाकर बेच दिया है। वही अधिनियम की प्रवृति के विरुद्ध काम करने वाले दीपक गुप्ता ने भूखंड को खरीदने वाले लोगों के साथ भी धोखाधडी कर दी,इसके लिए आरोपी पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज होना चाहिए,लेकिन तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा मामले को दबाए बैठे है इसलिए इस कार्यवाही से संबंधित कागजात प्रेस को देने से बच रहे हैं।