शिवपुरी। जिले में अपना आशियाना बनाने का सपना अब आम आदमी की पहुंच से दूर होता नजर आ रहा है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित नई कलेक्टर गाइडलाइन में भूमि दरों में की गई 87% से लेकर 114% तक की असामान्य वृद्धि ने न केवल भू-कारोबारियों, बल्कि आम जनता के भी होश उड़ा दिए हैं। शहरी क्षेत्र की हजारों लोकेशन पर हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी को असंगत और अव्यावहारिक बताते हुए जिले के प्रमुख कारोबारियों ने मोर्चा खोल दिया है। जिला पंजीयक विभाग को सौंपे गए ज्ञापन में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि इन दरों पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो रजिस्ट्री और स्टाम्प शुल्क का अतिरिक्त बोझ मध्यम वर्ग की कमर तोड़ देगा।
भूमि के क्रय-विक्रय कारोबार करने वाले कारोबारी जिसमें सिंकी सांखला, मोनू भगवती अग्रवाल, प्रकाश सोनी, शैलेंद्र पहारिया, गणेश गोयल, शिवम पहारिया, दिलीप जैन, धर्मेंद्र शर्मा, ललित गोयल आदि ने जिला पंजीयक विभाग को सौंपे ज्ञापन पत्र में उल्लेख किया है कि भूमि संबंधी गाइडलाइन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले की भूमि दरों में एकाएक अत्यधिक एवं असंगत वृद्धि की गई जिसमें कुल शहर की कुल 2555 लोकेशन में से 1836 लोकेशन की दरें असामान्य रूप से बढ़ाई गई है, इनमें 87.16 प्रतिशत लोकेशन में दर वृद्धि कहीं अधिक है, इसके अलावा शहरी क्षेत्रों की 21 लोकेशन में 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है एवं संध्या ग्रीन्स कॉलोनी जैसे क्षेत्र में भूमि दर 114 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है
यहां भूमि दर 5500 प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर वर्तमान वर्ष 2026-27 के लिए 15000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की गई है जो सामान्य से कहीं अधिक है। इन हालातों को लेकर भू-कारोबार से जुड़े कारोबारियों ने जिला पंजीयक से मांग की है कि जिले में वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित नई गाइडलाइन को लेकर पुन: विचार किया जाए और वर्तमान परिस्थितियों में संपत्ति क्रय-विक्रय की स्थिति को लेकर न्याय संगत नीति बनाई जाए जिसमें एकाएक 50 से लेकर 100 और उससे कहीं अधिक की भूमि दर वृद्धि बढ़ाया जाना जनहित में न्यायोचित नहीं होगा,
इसके लिए आम जन पर अत्यधिक कलेक्टर दर बढ़ने से अनावश्यक बोझ व आर्थिक क्षति का नुकसान भी उठाना पड़ेगा, क्योंकि भूमि दर बढ़ने से आम नागरिकों को रजिस्ट्री शुल्क, स्टाम्प शुल्क एवं अन्य करों के रूप में अतिरिक्त आर्थिक भार सहन करना पड़ेगा, जिससे भूमि एवं मकान खरीदना सामान्य व्यक्ति के लिए अत्यंत कठिन हो जाएगा।
इन हालातों को देखते हुए सभी भू-कारोबारियों ने जिला पंजीयक विभाग को पत्र सौंपते हुए मांग की है कि प्रस्तावित गाइडलाइन दरों में वृद्धि वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है तथा बिना पर्याप्त सर्वेक्षण के अत्यधिक वृद्धि कर दी गई है, जिससे आम जनता, मध्यम वर्ग तथा छोटे भू-स्वामियों को भारी नुकसान होगा इसलिए इस बढ़ी हुई वृद्धि दर पर पुनर्विचार किया जाए ताकि आमजन और इस क्षेत्र में कार्यरत कारोबारियों को राहत मिल सके।
भूमि के क्रय-विक्रय कारोबार करने वाले कारोबारी जिसमें सिंकी सांखला, मोनू भगवती अग्रवाल, प्रकाश सोनी, शैलेंद्र पहारिया, गणेश गोयल, शिवम पहारिया, दिलीप जैन, धर्मेंद्र शर्मा, ललित गोयल आदि ने जिला पंजीयक विभाग को सौंपे ज्ञापन पत्र में उल्लेख किया है कि भूमि संबंधी गाइडलाइन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत जिले की भूमि दरों में एकाएक अत्यधिक एवं असंगत वृद्धि की गई जिसमें कुल शहर की कुल 2555 लोकेशन में से 1836 लोकेशन की दरें असामान्य रूप से बढ़ाई गई है, इनमें 87.16 प्रतिशत लोकेशन में दर वृद्धि कहीं अधिक है, इसके अलावा शहरी क्षेत्रों की 21 लोकेशन में 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है एवं संध्या ग्रीन्स कॉलोनी जैसे क्षेत्र में भूमि दर 114 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है
यहां भूमि दर 5500 प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर वर्तमान वर्ष 2026-27 के लिए 15000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की गई है जो सामान्य से कहीं अधिक है। इन हालातों को लेकर भू-कारोबार से जुड़े कारोबारियों ने जिला पंजीयक से मांग की है कि जिले में वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित नई गाइडलाइन को लेकर पुन: विचार किया जाए और वर्तमान परिस्थितियों में संपत्ति क्रय-विक्रय की स्थिति को लेकर न्याय संगत नीति बनाई जाए जिसमें एकाएक 50 से लेकर 100 और उससे कहीं अधिक की भूमि दर वृद्धि बढ़ाया जाना जनहित में न्यायोचित नहीं होगा,
इसके लिए आम जन पर अत्यधिक कलेक्टर दर बढ़ने से अनावश्यक बोझ व आर्थिक क्षति का नुकसान भी उठाना पड़ेगा, क्योंकि भूमि दर बढ़ने से आम नागरिकों को रजिस्ट्री शुल्क, स्टाम्प शुल्क एवं अन्य करों के रूप में अतिरिक्त आर्थिक भार सहन करना पड़ेगा, जिससे भूमि एवं मकान खरीदना सामान्य व्यक्ति के लिए अत्यंत कठिन हो जाएगा।
इन हालातों को देखते हुए सभी भू-कारोबारियों ने जिला पंजीयक विभाग को पत्र सौंपते हुए मांग की है कि प्रस्तावित गाइडलाइन दरों में वृद्धि वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है तथा बिना पर्याप्त सर्वेक्षण के अत्यधिक वृद्धि कर दी गई है, जिससे आम जनता, मध्यम वर्ग तथा छोटे भू-स्वामियों को भारी नुकसान होगा इसलिए इस बढ़ी हुई वृद्धि दर पर पुनर्विचार किया जाए ताकि आमजन और इस क्षेत्र में कार्यरत कारोबारियों को राहत मिल सके।