आधे से अधिक कोलारस क्षेत्र की दाई माँ हैं सीतालक्ष्मी: सृजन के दैवीय कार्य के लिए मुझे चुना हैं - kolaras News

हार्दिक गुप्ता,कोलारस। अपनी नौकरी को इश्वर का काम समझ कर पिछले 33 साल से कोलारस क्षेत्र को अपनी सेवाए दे रही हैं यह सीतालक्ष्मी,आम जन कहते हैं कि यह आधे से अधिक कोलारस क्षेत्र की दाई-माँ हैं। नर्स सीता लक्ष्मी कहती है कि मैने अपना काम नौकरी समझ कर कभी नही किया बल्कि इश्वर का काम समझ कर किया है। क्यो की सृष्टि का सर्जन करना या करवाना भी एक दैवीय काम होता है। और यह मेरा भाग्य हैं कि ईश्वर ने मुझे इस महान कार्य के लिए चुना।

कोलारस नगर हो या कोलारस का ग्रामीण क्षेत्र कोलारस अस्पताल में पदस्थ नर्स सीता लक्ष्मी नायर को क्या बच्चा क्या जवान और बुर्जग भी सीता सिस्टर कहता है। कोलारस के अस्पताल में पिछले 33 साल से पदस्थ नर्स सीतालक्ष्मी नायर के रिटायर्ट मेंट में कुछ ही साल शेष रह गए हैं। अगर इस कोरोना काल को छोडकर बात करे तो नर्स सीतालक्ष्मी का मुख्य कार्य महिलाओ का प्रसव करना हैं। अपनी 33 साल की नौकरी में नर्स सीतालक्ष्मी ने हजारो प्रसव कराये होगें,इसलिए आधे कोलारस क्षेत्र की वह दाई-माँ हैं।

मूलत:केरल की रहने वाली सीती लक्ष्मी नायर ने अपने काम को अपना भगवान माना हैं। वर्तमान समय में कोविड काल चल रहा हैं लोग एक दूसरे से बच रहे हैं। गाइड लाईन में बच्चो ओर बुर्जगो को घर पर रहने की सलाह दी जाती है,लेकिन यह गाईड लाईन सीतालक्ष्मी के सामने आकर अनके सम्मान में झुक जाती है।

सीतालक्ष्मी ग्रहणी भी हैं इस कारण उनके कंधों पर घर और अस्पताल दोनों की जिम्मेदारी है, जिसे वो बखूबी निभा रही हैं. जब वो घर पर होती हैं तो परिवार के सभी सदस्यों का पूरी तरह ख्याल रखती हैं. वहीं जब अस्पताल में होती हैं तो मरीजों की देखभाल के साथ-साथ वो स्टाफ नर्सों और वार्ड सिस्टर को ट्रेंड करती हैं. इनकी प्रेरणा से इनकी बेटी भी मुरार अस्पताल मे पदस्थ होकर निरन्तर मरीजो की सेवा मे जुटी है

सीतालक्ष्मी कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी से निभा रहीं हैं। लेबर रूम में कई बार इमरजेंसी केस अटेंड करने पड़ते हैं जिनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट भी नहीं आ पाती है। ऐसी हालत में रिस्क लेकर पीपीई किट पहनकर डिलीवरी करानी पड़ती है।

काम के प्रति नर्स सीता लक्ष्मी के समर्पण को ऐसे समझा जा सकता है कि बिना छुट्टी के वो काम पर हैं चाहे डिलीवरी करवाना हो या कोरोना टीकाकरण य फिर कोविड की जाँच हो पहली पंक्ति में खड़ी होकर कोलारस के स्वास्थ केंद्र मे बिना संकोच हँसते-हँसते संक्रमण के खतरे के बीच कर्तव्य का निर्वहन बखूबी कर रही हैं। उनका काम उनके लिए भगवान हैं यह वह अपने काम की प्रति ईमानदारी से दर्शा देती हैं।

सीतालक्ष्मी नायर कहती है कि कोविड संक्रमण काल में सेवा करना चुनौती है,पर उन्हें अच्छा लगता है। वह बताती हैं कि भी महिला का प्रसव के समय दूसरा जन्म माना जाता है,इन दिनों कोरोना संक्रमण काल में महिला का सुरक्षित प्रसव कराना और भी बड़ी चुनौती हो गयी हैं। ऐसी विपरित समय में सुरक्षित प्रसव एक बडी जिम्मेदाी हो गई हैं।

मेरी कोशिश यह रहती है कि प्रसव सुरक्षित हो जाए। जच्चा बच्चा दोनो ही स्वस्थय हो। मुझे पैदा होने वाले बच्चे और मां की देखभाल करने में उन्हें सुखद अनुभूति होती है। जब नन्हा-सा मासूम इस दुनिया में आता हैं रोता है,मुस्कुराता है तो मुझे ऐसा लगता है कि सृष्टि का सर्जन हो रहा हैं एक परिवार आगे बढ रहा हैं और मुझे ईश्वर ने इस पावन काम के लिए चुना हैं इसलिए में अपने काम को ईश्वर की पूजा समझ कर करती हूं।

अपनी चुनौतियो के विषय में सीतालक्ष्मी कहती है कि काम की चुनौती को मैनेज करने में परेशानी नही होती है। डिलेवरी के समय होने वाली परेशानियो को डॉक्टर या नर्स समझती हैं,कि महिला की स्थिती क्या हैं यह उसके परिजन नही समझते हैं कभी कभीर परिजन उग्र भी हो जाते हैं ऐसी स्थिती में कभी कभी मनोबल टूटता हैं लेकिन फिर याद आता है कि मेरा काम ही सेवा करना हैं,इसमें श्राप मिले या वरदान। सबको माफ करते हुए फिर जुट जाते है अपने काम पर।