अवैध कॉलोनियों के मामले में ढोंग कर रहा हैं प्रशासन, शराब और गुटके जैसी पॉलिसी :Ex-rey @Lalit mudgal

शिवपुरी जिले में अवैध कालोनियो को लेकर हल्ला मचा हुआ हैं,प्रशासन ने नोटिस जारी भी कर दिए हैं,लेकिन कार्रवाई जीरो हैं कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी कर चुके हैं।सरकार की ओर से यह कारोबार बिल्कुल शराब और गुटके जैसा हैं,सिर्फ चेतावनी छापकर बेचने की परमिशन हैं। आईए इस मामले का एक्सरे करते है।

जैसा कि विदित हैं कि किसी सुंदर शहर की तस्वीर को अवैध कॉलोनी बिगाडती हैं। शिवपुरी में 99 प्रतिशत कालोनी अवैध कट रही हैं यह परम सत्य हैं। शिवपुरी की विधायक ओर मप्र की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शिवपुरी प्रशासन को निर्देश दिए कि अवैध कॉलोनाईजर चिन्हित हो और उन पर कार्रवाई की जाएंं।

यह बयान मीडिया की सुर्खिया बन गया और प्रशासन ने इस पर अमल करते हुए 17 लोगो को नोटिस भी जारी कर दिए। आप ध्यान से पढे केवल 17 लोग की प्रशासन चिन्हित कर सका अवेध कॉलोनी काट कर बेचने वाले को। उसमें भी खास बता यह कि नोटिस देकर भूल गया.....नोटिसो की बात बाद मे करते हैं।

सवाल यह खडा होता हैं कि केवल 17 लोग,धरातल पर बात की जाए तो आज भी सैकडो कालोनी अवैध कट रही हैं और बिक रही हैं,बिक रही हैं तो प्रशासन रजिष्टर के रूप में रिजष्ट्री भी करा रहा हैं,प्रतिदिन प्लाटो की रजिष्ट्री हो रही है। अब सवाल यह बनता हैं कि अगर प्रशासन को अवैध कॉलोनी पर रोक लगानी हैं तो फिर रजिष्ट्री क्यो कर रहा हैं,अगर कोई कॉलानी अवैध हैं और वह रजिष्टर कॉलोनी नाईजर नही बेच रहा हैं तो प्रशासन उसकी रजिष्ट्री ही क्यो करा रहा है।

नियमो की बात करे तो कॉलोनी काटने वाले को कॉलोनाईजर का लाईसेंस होना आवश्यक हैं,उसमें पूरी सुविधाए जैसे रोड बिजली पानी सडक जैसी सुविधा होनी चाहिए,लेकिन शिवपुरी शहर में खेत कट रहे हैं और उनमें मकान उग रहे है।

प्रशासन सिर्फ अवैध शब्द और कार्रवाई पर ढोंग करता हैं,वसूली वैध भी और अवैध भी

प्रशासन सिर्फ अवैध शब्द का ढोंग करता हैं वह चाहता ही नही हैं कि शहर में अवैध कॉलोनी कटना बंद हो। इसके हमारे पास पर्याप्त उदाहरण हैं,सबसे पहले हम बात करते हैं टाउन कंट्री प्लान की। शहर मे टाउन कंट्री प्लान का नक्शा मौजूद हैं और इसमें आवासीय और कृषि भूमि अंकित है।

अवैध कॉलोनाईजर टाउन कंट्री प्लान की एनओसी नही लेते हैं,सीधे खेतो का डायवर्सन करा लेते हैं,सबसे बडा सवाल की अगर टाउन कंट्री के नक्शे में अगर भूमि कृषि में दर्ज हैं तो उसका डायवर्सन कैसे हो जाता हैं क्या नक्शा रजिष्टार के पास उपलब्ध नही होता हैं कि रजिष्ट्री करते उसे देखे की यह 1000 फुट के प्लाट की रजिस्ट्री हो रही है तो यह भूमि का लेंड क्या है आवासीय हैं क्या।

प्रशासन को तो सिर्फ रैवन्यू से मतलब होता हैं वह बडे ही आराम से रजिष्ट्री कर देता है। बिल्कु दारू गुटके जैसा बिजनिश केवल चेतावनी छाप देा और बेच दो। यहां डायवर्सन का पैसा दो,रजिष्ट्री का पैसा दो और बेच देा। बाद में नोटिसो के नाम पर अधिकारियो की वसूली अलग........

अवैध कॉलोनी विक्रेता यह करते है

कृषि भूमि का कॉलोनीनाईजर डायवर्सन करा लेते हैं,मुरम और खंडो की रोड डाल देते हैं और खंभे खडे कर देते हैं वह भी बिना तारो के, और बेचना शुरू कर देते है। डायवर्सन में भी लोचा होता है। एक नंबर पर 10 से 15 हजार फुट का डायवर्सन करा लेते हैं और पूरे नंबर पर लगाकर रजिष्ट्री करा देते हैं। ऐसे खेल वैध और अवैध का चल रहा हैं।

वैध कॉलोनीनाईजर परेशान

ऐसा नही है कि शहर में वैध कॉलोनीनाईजर नही हैं,वह भी शहर में कॉलोनी काटकर बेच रहे हैं लेकिन उन्है अपनी पूरी कार्रवाई करने में कॉलोनी की रेटे मंहगी होने लगती हैं और महगी बिकती है। वही अवैध कॉलोनीनाईजर कोई सुविधाए नही देते ओर इस कारण उन्है सस्ती पडती हैं तो इस कारण उनके प्लाट जल्दी बिक जाते हैं। इस कारण इस वैध धंधा करने वाले लोगो को मोरर भी डाउन हो रहा हैं।

और अंत में
प्रशासन ने अभी कुछ कॉलोनी नाईजरो को नोटिस दिए हैं प्रशासन ने माना हैं कि इन्होने अवैध कॉलोनी बेची हैं,लेकिन अभी कार्रवाई नही की गई हैं। नोटिसो के बाद मिर्ची सेठ की मार्केट मे किमत बड गई हैं सेंटिंग जारी हैं। अगले एक्सरे में इन नोटिसो का एक्सरे किया जाना हैं। क्रमश:अगले अंक में.........