कांग्रेस के लिए बुरी खबर: नपाध्यक्ष पर अभी तक 2 बार सामान्य वर्ग की महिला का आरक्षण, लेकिन विजय भाजपा को - Shivpuri News

शिवपुरी। समान्य महिला का आरक्षण शिवपुरी नगर पालिका के लिए कांग्रेस का अनुभव कडवा हैं,यह हम नही कह रहे हैं यह आंकडे बोलते हैंं। जब से शिवपुरी नगर पालिका अस्तिव में आई हैं जब से दो बार शिवपुरी नगर पालिका की अध्यक्ष पद के समान्य महिला के लिए आरक्षित हुई और इसमे कांग्रेस की हार हुई हैं। 

इस खबर को समझने के लिए हमे शिवपुरी के इतिहास की ओर चलना पडेगा सन 1994 के चुनाव में भाजपा की स्व. श्रीमति राधा-प्रमोद गर्ग ने कांगे्रस की श्रीमति तृप्ती गणेश गौतम को अप्रत्यक्ष पदति से हुए चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से पराजित कर पहली नगर पालिका अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त किया था। 

वहीं 2009 के चुनाव में भाजपा की श्रीमति रिशिका अनुराग अष्ठाना ने कांग्रेस की श्रीमति आशा-अजय गुप्ता को प्रत्यक्ष पद्वति से हुए चुनाव में पराजित किया था। जनता द्वारा चुनाव में सामान्य वर्ग की महिला रिशिका अष्ठाना पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष बनी थी। इस बार भी नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है और आगामी चुनाव में नगर पालिका अध्यक्ष पद पर तीसरी महिला आसीन होगी। 

1994 में अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुआ था नपाध्यक्ष का चयन,आंकडे में कांग्रेस आगे थी,लेकिन 

1994 में नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ। उस समय नपाध्यक्ष पद का चुनाव निर्वाचित पार्षद करते थे। नगर पालिका में उस समय कांग्रेस पार्षदों की संख्या अधिक थी और यह माना जा रहा था कि नपाध्यक्ष पद कांग्रेस के खाते में जाएगा। कांग्रेस ने नपाध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधायक गणेश गौतम की धर्मपत्नी श्रीमति तृप्ती गौतम को टिकट दिया। 

श्री गौतम 1980 से 1990 तक शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे थे और कांगे्रस का एक बड़ा वर्ग उनके विरोध में था। उनके विरोधियों में पूर्व नपाध्यक्ष गणेशीलाल जैन, स्व. सांवलदास गुप्ता और स्व. शीतल प्रकाश जैन थे। स्व. माधवराव सिंधिया की अनुशंसा पर जब कांग्रेस ने तृप्ती गौतम को उम्मीदवार बनाया तो पार्टी के निर्वाचित पार्षदों ने मुखर होकर तो विरोध नहीं किया। 

लेकिन पर्दे के पीछे से कांग्रेस के विद्रोही पार्षदों ने भाजपा से हाथ मिला लिया। हालांकि इसकी कानों कान खबर भी किसी को नहीं हुई। भाजपा ने नपाध्यक्ष पद के लिए समाजसेवी और व्यवसायी स्व. प्रमोद गर्ग की धर्मपत्नी श्रीमति राधा गर्ग को टिकट दिया और यह माना जा रहा था कि तृप्ती गौतम आसानी से राधा गर्ग को पराजित कर देंगी। 

कांग्रेस अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थी और निर्वाचित होने के पहले ही कांग्रेस उम्मीदवार और उनके समर्थकों ने जश्र की तैयारी कर ली थी। नगर पालिका के बाहर परिणाम की घोषणा होने के बाद आतिशबाजी चलाने की तैयारी थी। लेकिन कांग्रेस पार्षदों की बगावत के कारण श्रीमति तृप्ती गौतम बुरी तरह से पराजित हो गईं। उन्हें जहां 12 मत मिले। 

वहीं विजयी भाजपा उम्मीदवार 22 मत बटोर ले गई। उस चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर कांग्रेस के एपीएस चौहान निर्वाचित हुए तथा भाजपा उम्मीदवार को पराजय का सामना करना पड़ा। 

सन 1999 से जनता ने सीधे चुन रही है अपनी नगर सरकार 

1999 में नपाध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाना लगा। 1999 में तो नपाध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग पुरूष के लिए आरक्षित हुआ लेकिन 2004 के चुनाव मेें अध्यक्ष पद फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित हो गया। भाजपा ने श्रीमति रिशिका अनुराग अष्ठाना को उम्मीदवार बनाया और कांग्रेस ने कांग्रेस नेता अजय गुप्ता की धर्मपत्नी श्रीमति आशा गुप्ता को टिकट दिया। 

दोनों पार्टियों ने अपनी निष्ठावान महिला कार्यकर्ताओं के स्थान पर नेताओं की पत्नियों को टिकट दिया। रिशिका अष्ठाना पूर्व विधायक स्व. सुशील बहादुर अष्ठाना की पुत्रवधु और भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष अनुराग अष्ठाना की पत्नी हैं। उस चुनाव में भाजपा से विद्रोह कर श्रीमति मंजूला जैन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ी। 

इसका फायदा भाजपा उम्मीदवार रिशिका अष्ठाना को हुआ और उन्हें जिताने में वरिष्ठ भाजपा नेत्री यशोधरा राजे सिंधिया का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा। वह रिशिका अष्ठाना के प्रचार में वार्ड-वार्ड घूमी। जिसका परिणाम यह हुआ कि रिशिका अनुराग अष्ठाना तीन-साढ़े तीन हजार मतों से चुनाव जीतने मेेंं सफल रहीं। खास बात यह है कि अध्यक्ष पद पर निर्वाचित दोनों महिलाएं भाजपा की हैं और कांग्रेस की कोई भी महिला अभी तक नपाध्यक्ष नहीं बनी हैं।