उपचुनाव: पोहरी में त्रिकोणीय और करैरा में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधे संघर्ष के आसार - SHIVPURI NEWS

शिवपुरी।
प्रदेश में शीघ्र ही होने जा रहे 28 विधानसभा क्षेत्रों में से शिवपुरी जिले की दो विधानसभा सीटें पेाहरी और करैरा में मुकाबले तय हो गए हैं। इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस, भाजपा और बसपा के प्रत्याशी सामने आ गए हैं। कल पोहरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में हरिवल्लभ शुक्ला का नाम फाईनल होने के बाद अब स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो गई है। भाजपा ने दोनों विधानसभा क्षेत्रों से भले ही अपने प्रत्याशियों की अधिकृत घोषणा नहीं की है। लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश राठखेड़ा और जसवंत जाटव ही क्रमश: पोहरी और करैरा से कांग्रेस उम्मीदवार होंगे।

कांग्रेस ने करैरा से प्रागीलाल जाटव की उम्मीदवारी पहले ही घोषित कर दी है। बहुजन समाज पार्टी ने पोहरी से कैलाश कुशवाह और करैरा से राजेंद्र जाटव को उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद ऐसा लग रहा है कि 2018 की तरह पोहरी में इस बार भी त्रिकोणीय संघर्ष होगा। जबकि करैरा में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला होगा।

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी। भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद भारती उस समय के कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा और बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह से पिछडक़र तीसरे स्थान पर आए थे। लगभग 2 साल बाद स्थिति बदली है।

विजयी कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राठखेड़ा ने सिंधिया के साथ कांग्रेस से और विधायकी से इस्तीफा दिया है। जिससे उपचुनाव की नौबत बनी है। सुरेश राठखेड़ा अब भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि बसपा उम्मीदवार 2018 की तरह कैलाश कुशवाह ही हैं। कांग्रेस ने अवश्य पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला को उम्मीदवार बनाया है।

हरिबल्लभ शुक्ला 40 साल पहले 1980 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पोहरी से जीते थे। इससे समझा जा सकता है कि वह राजनीति में कितने वरिष्ठ हैं। हालाकि इस दौरान वह समानता दल, भाजपा और बहुजन समाज पार्टी में भी रहे। भाजपा से वह 2004 का लोकसभा चुनाव गुना शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ लड़े और उन्होंने काफी मजबूती से मुकाबला किया और सिंधिया बड़ी मुश्किल से 77 हजार मतों से ही चुनाव जीत पाए।

श्री शुक्ला 1998 में शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र से यशोधरा राजे सिंधिया के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं और वह महज साढ़े 6 हजार वोटों से पराजित हुए। पोहरी से दो बार विधायक रहे हरिवल्लभ शुक्ला को किसी भी कौण से कमजोर उम्मीदवार नहीं माना जा सकता। पोहरी विधानसभा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे से वह वाकिफ हैं। अंतिम बार वह 2013 में पोहरी से विधानसभा चुनाव लड़े थे और उस समय महज 3200 वोटों से वह भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद भारती से पराजित हुए थे।

वह भी उस स्थिति में जब पोहरी की पूरी कांग्रेस ने उनके विरोध में काम किया था। पोहरी में अभी तक चार बार ब्राह्मण उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। पोहरी में 1980 के बाद हुए 9 विधानसभा चुनाव में पांच बार धाकड़ उम्मीदवार विजयी होने में सफल रहे। पोहरी में धाकड़ मतदाताओं की संख्या 35 से 40 हजार है। जबकि ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 15 हजार है।

पोहरी में मुकाबले ब्राह्मण और धाकड़ उम्मीदवार के बीच हुए हैं। लेकिन दो विधानसभा चुनाव 1993 और 2018 में धाकड़ उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था। ऐसी स्थिति में कांगे्रस के धाकड़ जाति के उम्मीदवार विजयी हुए थे। लेकिन पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला नहीं मानते कि पोहरी में जातिगत आधार पर मतदाता मतदान करते हैं।

उनका कहना है कि यदि ऐसा होता तो चार बार ब्राह्मण उम्मीदवार विधायक नहीं बन पाते। पोहरी में इस बार चुनाव जातिगत आधार पर नहीं बल्कि 2018 में जीते विधायक सुरेश राठखेड़ा का विश्वासघात मुख्य मुद्दा होगा। करैरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने 2008 से लगातार तीन बार बसपा प्रत्याशी के रूप में मजबूती से चुनाव लड़ चुके प्रागीलाल जाटव को उम्मीदवार बनाया है।

श्री जाटव का विधानसभा क्षेत्र में अपना प्रभाव है और इसी को महत्व देते हुए कमलनाथ ने उन्हें कांग्रेस में शामिल कर पार्टी का टिकट दिया है। उनका मुकाबला भाजपा उम्मीदवार जसवंत जाटव से होगा जो कि वर्ष 2018 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडक़र भाजपा उम्मीदवार राजकुमार खटीक से 14 हजार मतों से विजयी रहे थे।

करैरा में कांग्रेस, भाजपा और बसपा तीनों ने जाटव उम्मीदवार को टिकट दिया है। बसपा उम्मीदवार राजेंद्र जाटव को कमजोर माना जा रहा है और उपचुनाव में उनकी भूमिका सिर्फ किसी को जिताने या हराने तक सीमित रहेगी। मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही होगा।