उपचुनाव अक्टूबंर अंत में संभावित: भाजपा को सरकार बचाना हैं ओर कांग्रेस को बनाना / SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। प्रदेश की 27 विधानसभा सीटें जिनमें शिवपुरी जिले की पोहरी और करैरा विधानसभा सीटें भी शामिल हैं के चुनाव अक्टूबर अंत में संभावित माने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सितम्बर के तीसरे सप्ताह तक अधिसूचना घोषित हो सकती है। चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने कमर कस ली है और प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं।  

अधिकांश सीटों में भाजपा के प्रत्याशी तो लगभग तय हो चुके हैं। जबकि कांग्रेस सर्वे की अंतिम रिपोर्ट के बाद प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। हालांकि सूत्रों के अनुसार आधी से अधिक सीटों पर कांग्रेस के सिंगल नाम हैं और शेष सीटों पर पैनल में दो या तीन नाम हैं।

प्रदेश सरकार में एक दर्जन से अधिक मंत्री ऐसे हैं जो विधायक नहीं है। संविधान के अनुसार बिना विधायक हुए 6 माह तक मंत्री पद धारण किया जा सकता है। अक्टूबर अंत में चुनाव होने पर दो मंत्रियों गोविंद सिंह राजपूत और तुलसी सिलावट को इस्तीफा देना पड़ेगा। क्योंकि चुनाव के समय तक उन्हें मंत्री बने 6 माह से अधिक हो चुके हैं। चुनाव में दोनों दलों में घमासान तय माना जा रहा है।

वर्तमान में 27 सीटें रिक्त होने पर विधानसभा की सदस्य संख्या 203 है और 203 सदस्यीय सदन में भाजपा विधायकों की संख्या 107 है। इस स्थिति में भाजपा बहुमत के आंकड़े पर है। जबकि कांग्रेस के पास वर्तमान में 25 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद सदस्य संख्या 89 है। भाजपा को बहुमत में आने के लिए 27 में से 9 सीटेें जीतनी होंगी। जबकि कांग्रेस का लक्ष्य काफी कठिन है।

उसे अपने दम पर पूर्ण बहुमत हेतु सभी 27 सीटों पर विजय प्राप्त करनी होगी। सदन में निर्दलीय 4, बसपा के 2 और सपा के 1 विधायक है। उपचुनाव में भाजपा का लक्ष्य जहां सरकार बचाना है। वहीं कांग्रेस का लक्ष्य सरकार बनाना है। ऐसी स्थिति में अपनी दम पर कांग्रेस का बहुमत में आना बहुत मुश्किल माना जा रहा है।

लेकिन यदि कांग्रेस ने 27 में से 20 सीटें जीत ली। ऐसी स्थिति में निर्देलीय सपा और बसपा के 7 विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी। 2018 में इन विधायकों ने कांग्रेस का साथ दिया था। लेकिन यदि उपचुनाव में भाजपा आधी सीटें भी जीत लेती है तो उसकी राह आसान रहेगी और उसका 2023 तक सत्ता में रहना एकदम सुनिश्चित होगा।

यहीं कारण है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों दल उपचुनाव में कोरोना के खतरे की परवाह न करते हुए पूरी ताकत लगा रहे हैं। भाजपा के केन्द्रीय और प्रदेश सरकार के मंत्री, मुख्यमंत्री तथा ज्योतिरादित्य सिंधिया के दौरे शुरू हो गए हैं। जबकि कांग्रेस में पूरी दारोमदार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ संभाले हुए हैं।

उपचुनाव में छाया रहेगा गद्दार वर्सेस खुद्दार का मुद्दा

इस चुनाव में जहां कांग्रेस इस्तीफा देने वाले कांग्रेस विधायकों को गद्दार संबोधित कर जनता से उन्हें नकारने की आव्हान कर रही है। वहीं इस्तीफा देने वाले विधायक और भाजपा नेतागण उन्हें खुद्दार कह रहे हैं। ऐसी स्थिति में फैसला जनता को करना है कि दलबदलू कांग्रेस विधायक गद्दार हैं या खुद्दार। क्या उन्होंने जनता के हितों के लिए इस्तीफा दिया अथवा अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति हेतु।

चुनावी आहट से कोरोना संक्रमण तेजी से बढऩे की आशंका

प्रदेश में चुनावी आहट से कोरोना संक्रमण के विस्फोटक रूप लेने की आशंका व्यक्त की जा रही है। राजनैतिक कार्यक्रमों में जबरदस्त भीड़ उमड़ रही है और ऐसी स्थिति में कोरोना गाईडलाईंस का पालन कहीं से कहीं तक नहीं हो रहा। गाईडलाईंन का उल्लंघन कर किए जा रहे राजनैतिक कार्यक्रमों को रोकने की हिम्मत न तो प्रशासन और न ही पुलिस जुटा पा रही है। अभी तक प्रदेश में मुख्यमंत्री सहित 9 मंत्री तथा 20 विधायक कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं।