बडा सवाल: पार्टी बदलकर सुरेश राठखेडा चुनाव जीत पाऐंगे? / Pohri News

शिवपुरी। डेढ़ साल पहले सुरेश राठखेड़ा ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बसपा और भाजपा की चुनौती को ध्वस्त करते हुए 8 हजार मतों से विजयश्री प्राप्त की थी। उनकी विजय दो कारणों से महत्वपूर्ण थी, एक तो उन्हें अपने किरार मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था।

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में किरार मतदाताओं की संख्या 40 हजार से कम नहीं है और इस वर्ग के अधिकांश मतदाताओं के मत भाजपा के उस समय के किरार जाति के उम्मीदवार प्रहलाद भारती बटोर ले गए। उसके बाद भी श्री भारती तीसरे स्थान पर पिछड़ गए और बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। सुरेश राठखेड़ा की जीत इसलिए भी स्मरणीय रही क्योंकि यह माना जाता है कि बसपा कांग्रेस के परम्परागत मतों मेें सैंध लगाती है।

लेकिन इसके बाद भी सुरेश राठखेड़ा जीत पाए और बसपा उम्मीदवार ने भाजपा को पछाडक़र दूसरा स्थान प्राप्त किया। लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है। डेढ़ साल पहले कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडे सुरेश राठखेड़ा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे।

यह भी लगभग तय लग रहा है कि बसपा उपचुनाव में भाग लेगी। लेकिन बसपा उम्मीदवार कौन होगा अथवा कांग्रेस की ओर से कौन मोर्चा संभालेगा यह अभी तय नहीं है। पोहरी में कांग्रेस को खारिज नहीं किया जा सकता और उसके पास भी योग्य उम्मीदवारों की कमी नहीं है। यह बात सत्य है कि जनाधार वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह एक साथ भाजपा के साथ हैं।

सुरेश राठखेड़ा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और विजयी हुए। उन्होंने उस समय के तत्कालीन विधायक प्रहलाद भारती जो कि 2008 और 2013 में चुनाव जीत चुके थे, को तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया। बसपा उम्मीदवार कैलाश कुशवाह पुराने भाजपाई हैं और जब भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह बसपा टिकट से चुनाव मैदान में उतर गए।

श्री कुशवाह कृषि उपज मंडी शिवपुरी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और पहली बार ही विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भी श्री कुशवाह बसपा की ओर से ताल ठोकने की तैयारी में हैं और उन्हें भरोसा है कि विधानसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी उन्हें ही टिकट देगी।

श्री कुशवाह की जाति के मतदाताओं की संख्या भी पोहरी में काफी अधिक है। इस जाति के लगभग 25 से 30 हजार मतदाता हैं। कुशवाह और दलित मतदाताओं के समर्थन के कारण कैलाश कुशवाह ने जोरदार लड़ाई लड़ी थी। श्री कुशवाह चुनाव लडऩे के लिए इतने आतुर हैं कि यदि बसपा उन्हें टिकट नहीं देती तो वह कांग्रेस अथवा निर्दलीय रूप में भी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।

पोहरी में जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो सिंधिया के कांगे्रस छोडऩे से पहले इस क्षेत्र के अधिकतर कांग्रेसी सिंधिया के साथ थे। लेकिन जब यह तय हो गया कि भाजपा में टिकट तो कांग्रेस से गए पूर्व विधायक सुरेश राठखेड़ा को ही मिलेगा तो सिंधिया समर्थक कांगे्रसियों ने कांग्रेस में बने रहने का निर्णय लिया।

सिंधिया समर्थक कांगे्रसियों में मुख्य रूप से पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला, युवा नेता विनोद धाकड़ एडवोकेट, एनपी शर्मा और मंडी कमेटी पोहरी के अध्यक्ष प्रधुम्र वर्मा, जिला कांग्रेस के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण धाकड़ शामिल हैं। ये सभी की सभी कांग्रेस टिकट के आतुर हैं और उन्हें भरोसा है कि यदि पार्टी उन्हें टिकट देगी तो उनकी जीत में कोई शंका नहीं है।

पिछले चुनाव में कांग्रेस ने इस खतरे के बावजूद सुरेश राठखेड़ा की उम्मीदवारी तय की थी कि भाजपा ने श्री राठखेड़ा के सजातीय प्रहलाद भारती को टिकट देने का ऐलान कर दिया था। कांग्रेस का यह उल्टा दिखने लगने वाला दांव अंतत: सही साबित हुआ था और सुरेश राठखेड़ा चुनाव जीतने में सफल रहे थे।

ऐसी स्थिति में सवाल यह है कि क्या कांग्रेस पुन: धाकड़ वर्सेज धाकड़ रणनीति पर काम कर रहा है। कांग्रेस के धाकड़ उम्मीदवारों में विनोद धाकड़ और प्रधुम्र वर्मा का नाम शामिल हैं। जिनमें विनोद धाकड़ को अधिक मजबूत उम्मीदवार माना जाता है। यदि ऐसा नहीं हुआ और कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया तो पोहरी के पूर्व विधायक हरिवल्लभ शुक्ला और एनपी शर्मा का नाम सामने आता है।

श्री शुक्ला और श्री शर्मा देानों चुनाव लड़ चुके हैं। हरिवल्लभ शुक्ला पोहरी से दो बार विधायक रह चुके हैं। पहली बार वह 1980 में विधायक बने थे तब उन्हेें स्व. माधवराव सिंधिया की अनुशंसा पर कांग्रेस उम्मीदवार बनाया गया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद हरिवल्लभ सिंधिया गुट से अलग हो गए थे और वह शुक्ल खैमे में चले गए।

 जिसका दुष्परिणाम उन्हें भोगना पड़ा और स्व. माधवराव सिंधिया ने उन्हें कभी टिकट नहीं दिया। लेकिन टिकट के आतूर हरिवल्लभ 2003 के विधानसभा चुनाव में समानता दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े और जीते परंतु 2008 में हरिवल्लभ ने बसपा से पोहरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा।

लेकिन वह भाजपा उम्मीदवार प्रहलाद भारती से 20 हजार से अधिक मतों से पराजित हो गए। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया हरिवल्लभ शुक्ला को कांग्रेस में ले आए और उन्हें 2013 में कांग्रेस उम्मीदवार बनाया गया। लेकिन वह प्रहलाद भारती से लगभग ढ़ाई हजार मतों से चुनाव हार गए।

हरिवल्लभ ने टिकट के लिए 2018 में भी खूब हाथ पैर मारे लेकिन सिंधिया ने उनके स्थान पर सुरेश राठखेड़ा को टिकट दिया। जिससे हरिवल्लभ नाराज रहे। हाल ही में सिंधिया जब भाजपा में चले गए तो हरिवल्लभ ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया और वह कांग्रेस में ही टिकट की आशा में बने रहे।

मंडी कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एनपी शर्मा भी 2008 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े थे। उन्हें भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनुशंसा पर टिकट दिया गया था। कुल मिलाकर पोहरी विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला जोरदार होगा और निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि जीत की माला किसके गले में पड़ेगी।

कांंग्रेस में सर्वे के आधार पर होगा टिकट का निर्णय

पोहरी और करैरा चुनाव के लिए कांग्रेस ने रणनीति बनाना भी शुरू कर दिया है। शिवपुरी जिला कांगे्रस अध्यक्ष पद पर श्रीप्रकाश शर्मा की नियुक्ति हो गई है और उम्मीदवारों का सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। टिकट के दावेदार हरिवल्लभ, विनोद धाकड़ और एनपी शर्मा टिकिट के लिए भोपाल कूच कर गए हैं ।

जहां उन्हें बताया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं सर्वे करा रहे हैं और सर्वे के परिणाम के आधार पर टिकट दिया जाएगा। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ग्वालियर संभाग मेें अब वे दिन लद गए जब सिंधिया की चाटुकारी और चापलूसी जो नेता अधिक करता था उसे टिकट मिल जाता था।