मान्यता 8 वीं तक स्कूल संचालित 12 वीं तक: अधिकारियों की साइलेंट पार्टनरशिप उजागर | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। जिले भर कुछ निजी विद्यालय अवैध रूप से संचालित किए जा रहे हैं जो शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के संरक्षण के बगैर इन विद्यालयों का संचालित होना संभव नहीं है। देखा गया है कि इनकी विद्यालय 8 वीं तक हैं और यह सभी संकायों से 12वीं तक कक्षाऐं संचालित कर रहे हैं। गत वर्ष यह मामला जोरों से तूल पकड़ा था और चाईल्ड लाईन की शिकायत पर पूर्व कलेक्टर तरूण राठी ने कुछ विद्यालयों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश तक दिए थे।

किन्तु मामले को राजनैतिक प्रभाव के कारण ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। लेकिन सरकार बदलने के पश्चात यह गोरख धंधा पुन: जोर पकड़ गया अब यह देखने में आ रहा है कि विद्यालय के निकट चार कमरे किराए से लेकर उस पर कोचिंग का बोर्ड लगाकर 12 वीं तक कक्षायें संचालित कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की जा रही है।

उक्त तथ्य जिला मुख्यालय पर पदस्थ जिला शिक्षा अधिकारी, बीआरसी एवं सीएसी सहित निकट संचालित शासकीय विद्यालय के प्रधानाचार्य के संज्ञान में है। लेकिन इसके बाबजूद भी ऐसे निजी विद्यालयों के विरूद्ध शिक्षा अधिकारी द्वारा ठोस कार्यवाही क्यों नहीं की गई? पूर्व जिलाधीश तरूण राठी द्वारा अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जो शिक्षण संस्थायें अवैध रूप से संचालित शिक्षण संस्थाओं को अटैच करने का कार्य कर रही है।

उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाए। जिलाधीश के उक्त निर्देशों को शिक्षा अधिकारी द्वारा कूड़ेदान के हवाले कर दिया गया तथा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई, और ना ही नवीन सत्र में चेतावनी पत्र जारी किए गए जिससे अटैचमेंट न हो सकें।

शासकीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या हुई कम

निजी विद्यालयों में शिक्षा विभाग के संरक्षण में चल रहे गोरख धंधे की बजह से शासकीय विद्यालयों में छात्रों के प्रवेश की संख्या लगातार कम होती जा रही है। शिक्षा विभाग लापरवाही एवं उपेक्षा पूर्ण रवैए के चलते जिले भर में कई विद्यालयों में न की बराबर प्रवेश हो रहे हैं।

जबकि शासकीय नियमानुसार जिला शिक्षा अधिकारी बीआरसी, सीएसी, आदि को समय-समय पर निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया  जाना चाहिए। यदा कदा अधिकारियों द्वारा निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया जाता हैं तो मामला ले देकर रफा-दफा कर दिया जाता हैं। जिससे विद्यालय संचालक बेखौफ अंदाज में अवैध रूप से विद्यालयों का संचालन करते रहते हैं। जबकि अधिकारियों द्वारा शासन को गलत जानकारी दे दी जाती हैं।

प्रशासन टास्क फोर्स बनाकर अवैध स्कूलों पर करे कार्यवाही

अवैध रूप से 12 वीं तक कक्षायें संचालित होने के कारण शासकीय हाईस्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार गिरती जा रही है क्योंकि छात्र इन स्कूलों से बाहर ही नहीं निकला पाते। ऐसी संस्थाओं द्वारा छात्रों तथा उनके पालकों को विभिन्न प्रकार की सुविधायें का प्रलोभवन देकर उन्हेें भर्ती कर लिया जाता हैं जो शासकीय विद्यालयों के लिए घातक साबित हो रहा है।

जैसे की लुधावली में अधिक संख्या में छात्र निवास करते हैं, लेकिन वहां के शासकीय विद्यालय से निकलने के पश्चात वो छात्र वहीं के वहीं संचालित अवैध स्कूलों में भर्ती हो जाते हैं न की शासकीय हायर सेकेण्ड्री स्कूलों प्रवेश ले पाते हैं। जागरूक नागरिकों ने मांग की हैं कि विद्यालयों से अटैच करने वाली संस्थाओं पर एवं संचालित करने वाले विद्यालयों के खिलाफ प्रशासन टास्क फोर्स बनाकर वैधानिक कार्यवाहीं करे।