​​shivpuri news, जनता के लिए धमाका बना वरदान,धुंए ​मे निकला जहरीले कारोबार और सरकारी तंत्र का गठबंधन

Adhiraj Awasthi

एक्सरे @ललित मुदगल बैराड। शिवपुरी जिले के पोहरी विधानसभा के बैराड कस्बे में बीते रोज एक तेज धमाका पब्लिक के लिए वरदान साबित हुआ है। इस धमाके में खाद्य विभाग की जहरीली परते उखड़ गई और उसका जहरीले सिस्टम में घुले होने के सबूत भी इस तेज धमाके मे उडकर सामने आ गए है। खाद्य विभाग की सबसे पहली और नींव की तरह मजबूत जिम्मेदारी है कि पब्लिक को कोई मिलावटी खाद्य सामग्री ना बिक पाए लेकिन बैराड़ में इस धमाके के धुंए मे खादय विभाग और मीठा जहर बेचने वाले माफिया का गठबंधन स्पष्ट सामने आ गया है।

बैराड़ में पकड़ी गई नकली मावा और पनीर बनाने की फैक्ट्री पर कार्यवाही अब हो जाएगी,लेकिन कलेक्टर शिवपुरी को अपनी सजा देने की ताकत से नकली जहर के इस भ्रष्टाचारी गठबंधन के खिलाफ अर्थात खादय विभाग के उस जिम्मेदारी अफसर को भी सजा देनी चाहिए जिसकी इस क्षेत्र में मिलावट को पकड़ने की जिम्मेदारी थी,जब कलेक्टर की कलम शुद्ध मानी जाएगी,अब चलिए मूल खबर की ओर चलते हैं।


बैराड नगर में शनिवार को बैराड तहसीलदार दुर्गपाल सिंह के सरकारी निवास के समीप एक मकान में तेज धमाका हुआ। प्रथम दृष्टया यह धमाका सिलेंडर फटने जैसा लगा। धमाका इतने तेज था कि आस पास के पडोसी मकान वाले लोगे अपने घरो बहार निकल आए,मौके पर पहुंचे प्रशासन ने देखा कि यह घर लॉक था।  सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और नगर परिषद की टीम को बुलाया गया,इस मकान के किराएदार को बुलाया गया और ताले खोले गए तो प्रशासन के टीम ने देखा कि उस मकान में एक कारखाना चल रहा है। इस कारखाने में लगी मशीन  में यह विस्फोट हुआ है।  


फैक्ट्री के भीतर सघन तलाशी के दौरान करीब एक क्विंटल सड़ा हुआ मावा बरामद हुआ जिससे असहनीय दुर्गंध आ रही थी। इसके अलावा पचास किलो पन्नी में पैक किया गया मावा एक क्विंटल दूध पंद्रह किलो घी और भारी मात्रा में रिफाइंड तेल मिला। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मावा बनाने के लिए वहां भारी मात्रा में डिटर्जेंट पाउडर का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह सीधे तौर पर लोगों की थाली में जहर परोसने की साजिश थी। मौके से इलेक्ट्रिक भट्टी और लकड़ी की भट्टियां भी जब्त की गई हैं।

पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपी विवेक गुप्ता पिछले छह महीने से महावीर प्रसाद गुप्ता के मकान को किराए पर लेकर बिना किसी वैध लाइसेंस या खाद्य विभाग की अनुमति के यह अवैध कारोबार चला रहा था। जब तहसीलदार ने लाइसेंस की मांग की तो संचालक के पास कोई भी दस्तावेज नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि भट्टी में लगा सेफ्टी वॉल फटने के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। गनीमत रही कि धमाके के वक्त वहां कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई वरना सघन बस्ती में स्थित यह फैक्ट्री कई जिंदगियां लील सकती थी। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री को सील कर दिया है। तहसीलदार दृगपाल सिंह बैंस ने सख्त रुख अपनाते हुए इस पूरे मामले का प्रतिवेदन पोहरी एसडीएम को भेज दिया है।

सवाल खाद्य विभाग से
सवाल यह उठता है कि अगर यह विस्फोट नहीं होता तो इस नकली घी मावा और पनीर बनाने वाली फैक्ट्री से पर्दा नहीं उठता,डिटर्जेंट पाउडर को कपडे धोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इस फैक्ट्री में इस डिटर्जेंट पाउडर जहरीली खाद्य सामग्री बनाने के लिए किया जा रहा था। फैक्ट्री संचालक की माने तो वह कारखाना पिछले 6 माह से संचालित कर रहा था लेकिन आस पास के लोगो की माने तो यह कारखाना पिछले 2 साल से संचालित था। पकड़ी गई जहरीली खाद्य सामग्री से अनुमान लगाया जा रहा है कि इस फैक्ट्री में प्रतिदिन 1 क्विंटल मावा और अन्य खाद्य सामग्री का निर्माण किया जा रहा था।

इस कारखाने का माल बैराड और उसके आस पास के क्षेत्र मे खपाया जा रहा था। खाद्य विभाग को इस नकली और जहरीली खादस सामग्री का निर्माण करने वाली इस फैक्ट्री की भनक अभी तक क्यो नही लगी। या तो यह कारखाना खाद्य विभाग के इस क्षेत्र के जिम्मेदार अफसर के साथ मिलकर चलाया जा रहा था या फिर यह जिम्मेदार कर्तव्यहीन था। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस माफिया पर कितनी कठोर कार्रवाई करता है ताकि भविष्य में जनता की सेहत से खिलवाड़ करने की कोई जुर्रत न कर सके,वही यह देखना कि कलेक्टर शिवपुरी रविन्द्र कुमार चौधरी खादय विभाग के इस जिम्मेदार अफसर के खिलाफ क्या कार्यवाही करते है,इस कार्यवाही से अनुमान लगाया जा सकता है कि कलेक्टर अपनी कलम को कितनी शुद्धता से चलाते है।