मादा चीता ज्वाला ने तीसरी बार दिया शावकों को जन्म, सर्वाइवल रेट विश्व रिकॉर्ड बनाने को अग्रसर - Kuno National Park

Adhiraj Awasthi

भोपाल। शिवपुरी और श्योपुर जिले की सीमा पर स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज खुशियों का माहौल है। आज नामीबियाई मादा चीता ज्वाला ने तीसरी बार माँ बनकर 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस सुखद समाचार के साथ ही कूनो में चीतों की कुल संख्या अब 45 से बढ़कर 50 हो गई है,वही शावकों की संख्या 14 हो गई है। इससे पूर्व मादा चीता ज्वाला ने 1 मार्च 2023 को भारत की धरती पर मॉ बनी थी,फिर दूसरी बार 3 जनवरी 2024 केा दूसरी बार 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था।

चीता प्रोजेक्ट में बन सकता है भारत विश्व गुरु
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत में जब कुछ विदेशी चीतों की मृत्यु हुई थी, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रोजेक्ट की सफलता पर सवाल उठाए गए थे। लेकिन आंकड़ों ने आलोचकों को मौन कर दिया है। कूनो में पिछले साढ़े तीन साल में कुल 45 शावकों ने जन्म लिया है, जिनमें से 28 पूरी तरह स्वस्थ और जीवित हैं,वही आज ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया है,इस प्रकार भारत में जन्मे चीतों की सर्वाइवल रेट (जीवित रहने की दर) लगभग 70 प्रतिशत रही है।


विश्व स्तर के विशेषज्ञों के अनुसार, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका में चीतों की सर्वाइवल रेट महज 37 से 66 प्रतिशत के बीच रहती है। आमतौर पर माना जाता है कि जन्म के बाद शावकों के जीवित रहने की संभावना 50% ही होती है, लेकिन भारतीय प्रबंधन ने इस धारणा को बदल दिया है।

कुनबे में बढ़ती बालिग फौज
कूनो अब केवल एक पार्क नहीं, बल्कि चीतों की नर्सरी बन चुका है। अगले 4 से 6 महीनों में कई शावक बालिग हो जाएंगे। वर्तमान में कूनो में अलग-अलग उम्र के शावकों की एक पूरी फौज तैयार हो रही है।  पहली भारतीय चीता मुखी ने पिछले नवंबर में 5 शावकों को जन्म दिया था, जो अब स्वस्थ हैं। वर्तमान में 26 माह के 6 शावक, दो साल के 3 शावक और हाल ही में जन्मे 18 दिन से लेकर 4 माह तक के कई शावक कूनो की स्वच्छंद हवा में खेल रहे हैं।

इसलिए खास है यह प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट दुनिया का पहला ऐसा प्रयास है जहाँ चीतों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप (अंतर-महाद्वीपीय) में बसाने की कोशिश की गई। शुरुआत में उठते सवालों के बीच, भारत की मिट्टी और यहाँ के वन्यजीव विशेषज्ञों की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि विदेशी चीते न केवल यहाँ जीवित रह सकते हैं, बल्कि वे यहाँ के माहौल को अपना घर मानकर वंश वृद्धि भी कर रहे हैं।