भोपाल से खजुराहो तक 1400 किमी का सफर: शिवपुरी के टूरिस्ट विलेज पहुंची देशभर की सुपर बाइकर्स

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। मध्य प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के पटल पर लाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा आयोजित 'क्वींस ऑन द व्हील्स' का तीसरा संस्करण आज शिवपुरी पहुंचा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई 25 महिला सुपर बाइकर्स की यह टोली सोमवार को शिवपुरी के 'टूरिस्ट विलेज' (MPT होटल) पहुंची, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।

सिंधिया छतरी के वैभव को देख हुईं मंत्रमुग्ध
7 दिवसीय इस बाइक ट्रेल के दौरान बाइकर्स सांची, उदयगिरि और चंदेरी के रास्तों से होते हुए शिवपुरी पहुंचीं। यहां उन्होंने शहर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल सिंधिया छतरी का भ्रमण किया और शिवपुरी की स्थापत्य कला व इतिहास की जानकारी ली। जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद (DATCC) की टीम ने इन जांबाज बाइकर्स का भव्य स्वागत किया। इस दौरान सहायक नोडल सौरभ गौड, पर्यटन प्रबंधन देव सोनी और ऑफिस प्रभारी रामपाल सिंह कुशवाह प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

पर्यटन स्थलों की ब्रांडिंग और वार्षिक कैलेंडर भेंट
स्वागत कार्यक्रम के दौरान सौरभ गौड ने सभी बाइकर्स को DATCC द्वारा तैयार किया गया वार्षिक कैलेंडर भेंट किया। उन्होंने कैलेंडर में चित्रित शिवपुरी के विभिन्न पर्यटन स्थलों, जैसे माधव नेशनल पार्क और कूनो के बारे में विस्तार से बताया, ताकि ये बाइकर्स देशभर में शिवपुरी के पर्यटन का प्रचार कर सकें।

देशभर की 25 बाइकर्स, 62 साल की डॉ. नीता कर रहीं नेतृत्व
महिला सशक्तिकरण का उदाहरण पेश कर रही इस यात्रा का नेतृत्व मुंबई की 62 वर्षीय डॉ. नीता कर रही हैं। इस समूह में भोपाल की 8, मुंबई व नागपुर की 5-5 और बेंगलुरु, कोलकाता, पुणे, ग्वालियर व नोएडा की एक-एक महिला राइडर शामिल हैं। इनमें भोपाल की सारा खान, ग्वालियर की शबनम बानो और पुणे की कल्याणी पोटेकर जैसी अनुभवी राइडर्स प्रदेश की सड़कों पर सुरक्षा और साहस का संदेश दे रही हैं।

13 मार्च को भोपाल में होगा समापन
भोपाल से शुरू हुई यह 1,400 किलोमीटर लंबी यात्रा शिवपुरी के बाद अब कूनो, ग्वालियर, दतिया, ओरछा और खजुराहो की ओर प्रस्थान करेगी। 13 मार्च को इस ट्रेल का समापन वापस भोपाल में होगा। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के इस कदम से न केवल राज्य के कम-ज्ञात पर्यटन स्थलों को पहचान मिलेगी, बल्कि मध्य प्रदेश को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित पर्यटन गंतव्य के रूप में भी स्थापित किया जा सकेगा।