शिवपुरी। शिवपुरी स्थित माधव नेशनल पार्क (टाइगर रिजर्व) के जंगलों में इन दिनों एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गतिविधि चल रही है। शुक्रवार से रिजर्व के कोर एरिया और बफर जोन सहित सामान्य वन मंडल की विभिन्न रेंजों में गिद्धों की गणना का कार्य प्रारंभ हो गया है। यह गणना 21 और 22 फरवरी तक संचालित की जाएगी।
पहली बार डिजिटल लाइव गणना
इस बार की गणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल और हाई-टेक होना है। वन विभाग पहली बार लाइव डिजिटल गणना पद्धति का उपयोग कर रहा है। इसके अंतर्गत मैदानी अमला और अधिकारी जंगल में पेड़ों, चट्टानों या खुले मैदानों में दिखने वाले गिद्धों की मोबाइल ऐप के माध्यम से फोटो खींच रहे हैं। इन तस्वीरों को तत्काल ऐप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे डेटा की सटीकता बढ़ेगी और गणना में Double counting की गुंजाइश खत्म होगी।
टाइगर के आने से गिद्धों की बढ़ेगी संख्या
वन विशेषज्ञों का मानना है कि माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी के बाद अब गिद्धों की संख्या में भी इजाफा होने की प्रबल संभावना है। दरअसल, बाघों द्वारा किए गए शिकार के अवशेष गिद्धों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाते हैं, जो जंगल को बीमारियों से मुक्त रखते हैं।
मध्य प्रदेश: गिद्धों का गढ़
उल्लेखनीय है कि भारत में सर्वाधिक गिद्ध मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। पिछली गणना के अनुसार प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक संख्या पन्ना टाइगर रिजर्व में थी। अब शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडल की टीमों को उम्मीद है कि इस बार के आंकड़े उत्साहजनक होंगे। गणना के परिणाम जल्द ही आधिकारिक ऐप और डेटा विश्लेषण के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे।
पहली बार डिजिटल लाइव गणना
इस बार की गणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल और हाई-टेक होना है। वन विभाग पहली बार लाइव डिजिटल गणना पद्धति का उपयोग कर रहा है। इसके अंतर्गत मैदानी अमला और अधिकारी जंगल में पेड़ों, चट्टानों या खुले मैदानों में दिखने वाले गिद्धों की मोबाइल ऐप के माध्यम से फोटो खींच रहे हैं। इन तस्वीरों को तत्काल ऐप पर अपलोड किया जा रहा है, जिससे डेटा की सटीकता बढ़ेगी और गणना में Double counting की गुंजाइश खत्म होगी।
टाइगर के आने से गिद्धों की बढ़ेगी संख्या
वन विशेषज्ञों का मानना है कि माधव टाइगर रिजर्व में बाघों की वापसी के बाद अब गिद्धों की संख्या में भी इजाफा होने की प्रबल संभावना है। दरअसल, बाघों द्वारा किए गए शिकार के अवशेष गिद्धों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत होते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्मी की भूमिका निभाते हैं, जो जंगल को बीमारियों से मुक्त रखते हैं।
मध्य प्रदेश: गिद्धों का गढ़
उल्लेखनीय है कि भारत में सर्वाधिक गिद्ध मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं। पिछली गणना के अनुसार प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज किए गए थे, जिनमें सबसे अधिक संख्या पन्ना टाइगर रिजर्व में थी। अब शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व और सामान्य वन मंडल की टीमों को उम्मीद है कि इस बार के आंकड़े उत्साहजनक होंगे। गणना के परिणाम जल्द ही आधिकारिक ऐप और डेटा विश्लेषण के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे।