शिवपुरी। शिवपुरी के सर्व ब्राह्मण भृगुवंश भार्गव समाज ने फिल्म घूसखोर पंडत के माध्यम से ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाते हुए महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। 10 फरवरी 2026 को जिला मुख्यालय पर एकत्रित हुए समाज के प्रतिनिधियों ने फिल्म के शीर्षक, संवादों और मंशा पर गहरा रोष व्यक्त किया।
वहीं आज शिवपुरी कलेक्टर को आवेदन देते हुए बताया कि नीरज पांडे द्वारा निर्मित और रीतीश शाह द्वारा निर्देशित इस सीरीज में मुख्य पात्र (मनोज बाजपेयी) को बार-बार 'पंडत' कहकर संबोधित किया गया है। समाज का कहना है कि फिल्म में पंडत लंगोट का ढीला होता है, जैसे अत्यंत आपत्तिजनक और अमर्यादित संवादों का प्रयोग किया गया है, जो न केवल समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाते है, बल्कि देश की अखंडता और आपसी सौहार्द के लिए भी खतरा हैं।
सेंसर बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग
भृगुवंशी ब्राह्मण समाज ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस प्रकार की विवादास्पद सामग्री को सेंसर बोर्ड द्वारा स्वीकृति कैसे दी गई।
वहीं ब्राह्मण समाज का कहना हैं कि फिल्म 'घूसखोर पंडत' के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाई जाए,सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष और इस फिल्म को पास करने वाले संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त किया जाए,इसके साथ साथ भविष्य में किसी भी जाति या वर्ग को टारगेट करने वाले फिल्मांकन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाज के पदाधिकारियों, जिनमें पवन तिवारी और जिलाध्यक्ष महेश शर्मा शामिल हैं ने कहा कि देश के भीतर और बाहर से कुछ विदेशी ताकतें भारत के विकास को रोकने के लिए जातिगत खाई खोदने का काम कर रही हैं। पूर्व में 'Smash Brahmanical Patriarchy' जैसे नारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म भी उसी विभाजनकारी मानसिकता का हिस्सा है।
समाज ने सरकार से आग्रह किया है कि देश की नीतियों और योजनाओं को समावेशी बनाया जाए ताकि किसी भी वर्ग में असुरक्षा और रोष का भाव न पैदा हो और सामाजिक समरसता बनी रहे।
वहीं आज शिवपुरी कलेक्टर को आवेदन देते हुए बताया कि नीरज पांडे द्वारा निर्मित और रीतीश शाह द्वारा निर्देशित इस सीरीज में मुख्य पात्र (मनोज बाजपेयी) को बार-बार 'पंडत' कहकर संबोधित किया गया है। समाज का कहना है कि फिल्म में पंडत लंगोट का ढीला होता है, जैसे अत्यंत आपत्तिजनक और अमर्यादित संवादों का प्रयोग किया गया है, जो न केवल समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाते है, बल्कि देश की अखंडता और आपसी सौहार्द के लिए भी खतरा हैं।
सेंसर बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की मांग
भृगुवंशी ब्राह्मण समाज ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस प्रकार की विवादास्पद सामग्री को सेंसर बोर्ड द्वारा स्वीकृति कैसे दी गई।
वहीं ब्राह्मण समाज का कहना हैं कि फिल्म 'घूसखोर पंडत' के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाई जाए,सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष और इस फिल्म को पास करने वाले संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त किया जाए,इसके साथ साथ भविष्य में किसी भी जाति या वर्ग को टारगेट करने वाले फिल्मांकन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाज के पदाधिकारियों, जिनमें पवन तिवारी और जिलाध्यक्ष महेश शर्मा शामिल हैं ने कहा कि देश के भीतर और बाहर से कुछ विदेशी ताकतें भारत के विकास को रोकने के लिए जातिगत खाई खोदने का काम कर रही हैं। पूर्व में 'Smash Brahmanical Patriarchy' जैसे नारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म भी उसी विभाजनकारी मानसिकता का हिस्सा है।
समाज ने सरकार से आग्रह किया है कि देश की नीतियों और योजनाओं को समावेशी बनाया जाए ताकि किसी भी वर्ग में असुरक्षा और रोष का भाव न पैदा हो और सामाजिक समरसता बनी रहे।