शिवपुरी में SIR :मतदान के अधिकार पर लटकी तलवार,16 हजार लोगो को नोटिस

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सर्वे 2025 के बाद अब मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिले की पांचों विधानसभा क्षेत्रों में उन मतदाताओं को चिन्हित किया गया है, जो 23 दिसंबर 2025 तक चले सर्वे के दौरान मैपिंग से छूट गए थे। प्रशासन ने ऐसे 16,520 लोगों को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए बुलाया है। अब तक लगभग 34% सुनवाई पूरी हो चुकी है, जो 14 फरवरी 2026 तक निरंतर जारी रहेगी।

दस्तावेजों का संकट, नागरिकता की पहचान पर सवाल
सुनवाई के दौरान एक गंभीर समस्या उभर कर सामने आई है। शिवपुरी और कोलारस जैसे क्षेत्रों में कई ऐसे लोग (विशेषकर आदिवासी और अनपढ़ वर्ग) सामने आ रहे हैं, जिनके पास भारत का नागरिक होने के बावजूद कोई भी आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। शिक्षा के अभाव में ये लोग न तो दस्तावेज बनवा सके और न ही पुराने कागजों को सुरक्षित रख पाए। प्रशासन के अनुसार, यदि 14 फरवरी तक ये लोग साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाते हैं, तो वे मतदाता सूची से स्थायी रूप से वंचित रह सकते हैं।

शिवपुरी तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए कार्यालय के बाहर आकर ई-रिक्शा में बैठी एक दिव्यांग महिला की सुनवाई की और उसके दस्तावेजों का सत्यापन किया। जिले में अब भी लगभग 2500 लोगों को नोटिस तामील होना बाकी है। प्रतिदिन 50-50 के समूह में सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AEROs) के समक्ष सुनवाई की जा रही है।

क्षेत्रवार स्थिति की एक झलक
शिवपुरी तहसील: 5444 लोगों को नोटिस दिए गए, जिनमें से 1878 की सुनवाई हो चुकी है,इनमें से 20 लोगों के पास दस्तावेज नहीं थे।
कोलारस: 2866 लोगों को नोटिस जारी हुए, जिनमें से 863 की सुनवाई पूर्ण हो चुकी है। यहाँ भी लगभग 20 लोग अ पात्रता की श्रेणी में आ रहे हैं।

अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि मैपिंग से छूटने का मुख्य कारण सर्वे के समय लोगों द्वारा जानकारी न देना, बीएलओ की तकनीकी त्रुटि या दस्तावेजों का मिसमैच होना है। 14 फरवरी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में कितने लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़ पाए हैं।

इन 13 दस्तावेजों में से एक होना अनिवार्य
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए निम्नलिखित में से किसी एक दस्तावेज का होना आवश्यक है:
जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, या जाति प्रमाण पत्र।
स्थाई निवास प्रमाण पत्र या वन अधिकार प्रमाण पत्र।
मैट्रिक (10वीं) या यूनिवर्सिटी की मार्कशीट।
सरकारी कर्मचारी/पेंशनभोगी पहचान पत्र।
1 जुलाई 1987 से पहले सरकार, बैंक, पोस्ट ऑफिस या LIC द्वारा जारी पहचान पत्र।
NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) या स्थानीय निकाय द्वारा जारी परिवार रजिस्टर।
भूमि या गृह आवंटन के सरकारी दस्तावेज।
आधार कार्ड (9 सितंबर 2025 के निर्देशों के अनुसार)।