शिवपुरी। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कृषि स्नातक (चतुर्थ वर्ष) के छात्रों ने शिवपुरी जिले में अपने पांच माह के 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। सितंबर 2025 से शुरू हुआ यह शैक्षणिक सफर जनवरी 2026 में संपन्न हुआ, जिसमें छात्रों ने कृषि और उद्यमिता के व्यावहारिक गुणों को बारीकी से समझा।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और ग्रामीण अनुभव
कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ग्राम पंचायत रातौर रहा। यहाँ 28 कृषि छात्रों ने रावे प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार भार्गव के समन्वय से खरीफ और रबी फसलों, उद्यानिकी, पशुपालन और मृदा प्रबंधन का अध्ययन किया। ग्राम सरपंच रामकुमार धाकड़ के सहयोग से छात्रों ने 28 चयनित कृषकों के प्रक्षेत्रों पर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।
कृषि उद्यमिता और इंडस्ट्री अटैचमेंट
छात्रों को कृषि व्यवसाय की बारीकियां सिखाने के लिए 'हरदौल एग्रीकल्चर मार्केटिंग एवं प्रोड्यूसर कंपनी' के साथ जोड़ा गया। 28 दिसंबर 2025 से 24 जनवरी 2026 तक चले इस एग्रो इंडस्ट्रीज अटैचमेंट के दौरान 22 छात्रों ने बीज उत्पादन श्रृंखला, प्रसंस्करण इकाई, गुणवत्ता नियंत्रण, टैगिंग और विपणन की कार्यप्रणाली सीखी और अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की।
विविध क्षेत्रों का भ्रमण और नवीन तकनीक
अध्ययन के दौरान छात्रों ने जिले की विभिन्न प्रमुख इकाइयों का दौरा किया
पशुपालन और डेयरी: सांची दुग्ध संग्रहण केंद्र और ग्राम नोहरी में वीरू ओझा के डेयरी प्रक्षेत्र पर नस्ल सुधार व चारा उत्पादन का अवलोकन किया।
प्रसंस्करण: सुदाना एवं मानव (NDDB के सहयोग से) संचालित पशु आहार फैक्ट्री और टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण।
पर्यावरण: माधव टाइगर रिजर्व में जलीय खरपतवार नियंत्रण और वानस्पतिक जैव विविधता का अध्ययन।
तकनीकी: कृषि अभियांत्रिकी विभाग में कस्टम हायरिंग सेवाओं की जानकारी ली।
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन
जिला प्रशासन की पहल पर छात्रों ने जैविक हाट बाजार में सहभागिता की और किसानों को टमाटर व शिमला मिर्च जैसी फसलों को प्राकृतिक पद्धति से उगाने के लिए प्रेरित किया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण और ग्रामीण अनुभव
कृषि विज्ञान केंद्र शिवपुरी के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ग्राम पंचायत रातौर रहा। यहाँ 28 कृषि छात्रों ने रावे प्रभारी डॉ. मुकेश कुमार भार्गव के समन्वय से खरीफ और रबी फसलों, उद्यानिकी, पशुपालन और मृदा प्रबंधन का अध्ययन किया। ग्राम सरपंच रामकुमार धाकड़ के सहयोग से छात्रों ने 28 चयनित कृषकों के प्रक्षेत्रों पर प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया।
कृषि उद्यमिता और इंडस्ट्री अटैचमेंट
छात्रों को कृषि व्यवसाय की बारीकियां सिखाने के लिए 'हरदौल एग्रीकल्चर मार्केटिंग एवं प्रोड्यूसर कंपनी' के साथ जोड़ा गया। 28 दिसंबर 2025 से 24 जनवरी 2026 तक चले इस एग्रो इंडस्ट्रीज अटैचमेंट के दौरान 22 छात्रों ने बीज उत्पादन श्रृंखला, प्रसंस्करण इकाई, गुणवत्ता नियंत्रण, टैगिंग और विपणन की कार्यप्रणाली सीखी और अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की।
विविध क्षेत्रों का भ्रमण और नवीन तकनीक
अध्ययन के दौरान छात्रों ने जिले की विभिन्न प्रमुख इकाइयों का दौरा किया
पशुपालन और डेयरी: सांची दुग्ध संग्रहण केंद्र और ग्राम नोहरी में वीरू ओझा के डेयरी प्रक्षेत्र पर नस्ल सुधार व चारा उत्पादन का अवलोकन किया।
प्रसंस्करण: सुदाना एवं मानव (NDDB के सहयोग से) संचालित पशु आहार फैक्ट्री और टमाटर प्रसंस्करण इकाइयों का भ्रमण।
पर्यावरण: माधव टाइगर रिजर्व में जलीय खरपतवार नियंत्रण और वानस्पतिक जैव विविधता का अध्ययन।
तकनीकी: कृषि अभियांत्रिकी विभाग में कस्टम हायरिंग सेवाओं की जानकारी ली।
प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन
जिला प्रशासन की पहल पर छात्रों ने जैविक हाट बाजार में सहभागिता की और किसानों को टमाटर व शिमला मिर्च जैसी फसलों को प्राकृतिक पद्धति से उगाने के लिए प्रेरित किया।