शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका में पिछले 1 साल से कुर्सी गिराने और बचाने की लड़ाई चल रही थी। पिछले कुछ दिनो इस जंग में शांति दिख रही थी लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने शिवपुरी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को 6 पेज का नोटिस जारी कर फिर बोतल से जिन्न बहार निकाल दिया है। इस नोटिस में तमाम जांच के बाद उस धारा का उल्लेख है जिसका अर्थ निकाय के संविधान में अध्यक्ष के पद पर बने रहना वांछनीय नहीं होता है। इधर गायत्री शर्मा का कहना है कि मुझे नोटिस नहीं मिला है। मप्र सरकार से जारी 6 पेज के नोटिस का जवाब गायत्री शर्मा को 15 दिवस के अंदर देना है।
अब आईए इस 6 पेज के नोटिस का एक्सरे करते है। मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल से जारी नोटिस में नपाध्यक्ष को गैर जरूरी दखल, पक्षपात, वित्तीय अनियमितता, और पदीय दायित्वों के निर्वहन में अक्षम माना गया है। 6 पेज के नोटिस में बिंदुवार कारण स्पष्ट करते हुए 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय भोपाल के अपर सचिव कैलाश वानखेड़े ने सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को नोटिस जारी किया है। अपर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर कलेक्टर के प्रतिवेदन के अलावा पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे और अन्य बिंदुओं के आधार पर नपाध्यक्ष से जवाब मांगा गया है।
नोटिस में नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के लिए लिखा है कि 19 पार्षदों ने आप पर भ्रष्टाचार, तानाशाहीपूर्ण कार्यवाही, और आपकी बदतमीजी तथा आपके पति द्वारा दी जाने वाली धमकियों से संबंधित आरोप लगाए और सामूहिक त्याग पत्र दिए। यह आपकी कार्यशैली में निरंकुशता और हठधर्मिता का परिचायक है। इसी तरह सीएमओ केशव सिंह सगर से सड़क निर्माण के संबंध में कोर कटिंग सैंपल लेने पर आपके द्वारा स्थल पर सार्वजनिक रूप से विवाद किया गया था। इससे निकाय की छवि धूमिल हुई। साथ ही निकाय के अमले के नियमित कार्य में भी गैर जरूरी दखल दिया गया।
आय व्यय में बहुत अंतर, मनमानी करने का जिम्मेदार माना
ठेकेदारों के भुगतान में पक्षपात, 45 फाइलें काम पूरे होने के बाद बिल लोक निर्माण शाखा में नहीं मिलने, प्रोसीडिंग, पीआईसी रजिस्टर और निर्माण फाइलें संधारित न होकर अभिलेख अपने निवास में रखना नियमों के विपरीत है। वहीं कार्य स्वीकृत करने से पहले निकाय की आय का आकलन नहीं किया। आय व्यय में बहुत अंतर होने और मनमाने तरीके से कार्य प्रारंभ करने का जिम्मेदार माना गया है।
सैकड़ों नस्तियां बनाकर वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना
नगर पालिका की कैशबुक से पता चला कि जल प्रदाय, विद्युत सामग्री क्रय, वाहन मरम्मत और रोड रेस्टोरेशन के मदों में सैकड़ों नस्तियां बनाकर अत्यधिक खर्च दर्शाया गया। इससे वित्तीय अनुशासन का घोर उल्लंघन प्रतीत होता है। वहीं 11.47 करोड़ के भुगतान में ही एक ही ठेकेदार फर्म शिवम कंस्ट्रक्शन और आशा कंस्ट्रक्शन को 5.09 करोड़ का भुगतान में पक्षपात प्रतीत होता है।
सरकार की राय - अध्यक्ष के पद पर बने रहना वांछनीय नहीं
मप्र नपा अधिनियम की धारा 51 में अपने पदीय कर्तव्यों का विधि अनुसार पालन करने में पूर्णतः विफल माना गया। इसी के परिणाम स्वरूप गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। यानी अपने पदीय कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम प्रतीत होती हैं। नियमों के विपरीत कार्य करने की वजह से सरकार ने अपनी राय में माना है कि आपका एक लोकहित के दृष्टिगत अध्यक्ष के पद पर बने रहना वांछनीय नहीं है। धारा 51 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत होकर गंभीर कदाचरण की श्रेणी में मानते हुए धारा 41 क के तहत कार्रवाई की बात कही है। 15 दिन में जवाब नहीं आने पर एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
परिषद की बैठकें नहीं करने पर अध्यक्ष जिम्मेदार
नोटिस में लिखा है कि अध्यक्ष के नाते पीआईसी और परिषद की बैठकें आयोजित करना थीं। लेकिन आपके द्वारा बैठकें आमंत्रित नहीं की गईं। नगर की समस्याएं बढ़ती रहीं और आम नागरिक के कार्यों में रुकावट पैदा हुई। यह मप्र नगर पालिका (मेयर-इन-काउंसिल, प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल के कामकाज का संचालन तथा प्राधिकारियों की शक्तियों और कर्तव्य) नियम 1998 में दिए प्रावधानों के विपरीत है। इसके लिए अध्यक्ष को उत्तरदायी ठहराया गया है।
अब आईए इस 6 पेज के नोटिस का एक्सरे करते है। मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल से जारी नोटिस में नपाध्यक्ष को गैर जरूरी दखल, पक्षपात, वित्तीय अनियमितता, और पदीय दायित्वों के निर्वहन में अक्षम माना गया है। 6 पेज के नोटिस में बिंदुवार कारण स्पष्ट करते हुए 15 दिन के भीतर जवाब तलब किया गया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय भोपाल के अपर सचिव कैलाश वानखेड़े ने सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को नोटिस जारी किया है। अपर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट पर कलेक्टर के प्रतिवेदन के अलावा पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे और अन्य बिंदुओं के आधार पर नपाध्यक्ष से जवाब मांगा गया है।
नोटिस में नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के लिए लिखा है कि 19 पार्षदों ने आप पर भ्रष्टाचार, तानाशाहीपूर्ण कार्यवाही, और आपकी बदतमीजी तथा आपके पति द्वारा दी जाने वाली धमकियों से संबंधित आरोप लगाए और सामूहिक त्याग पत्र दिए। यह आपकी कार्यशैली में निरंकुशता और हठधर्मिता का परिचायक है। इसी तरह सीएमओ केशव सिंह सगर से सड़क निर्माण के संबंध में कोर कटिंग सैंपल लेने पर आपके द्वारा स्थल पर सार्वजनिक रूप से विवाद किया गया था। इससे निकाय की छवि धूमिल हुई। साथ ही निकाय के अमले के नियमित कार्य में भी गैर जरूरी दखल दिया गया।
आय व्यय में बहुत अंतर, मनमानी करने का जिम्मेदार माना
ठेकेदारों के भुगतान में पक्षपात, 45 फाइलें काम पूरे होने के बाद बिल लोक निर्माण शाखा में नहीं मिलने, प्रोसीडिंग, पीआईसी रजिस्टर और निर्माण फाइलें संधारित न होकर अभिलेख अपने निवास में रखना नियमों के विपरीत है। वहीं कार्य स्वीकृत करने से पहले निकाय की आय का आकलन नहीं किया। आय व्यय में बहुत अंतर होने और मनमाने तरीके से कार्य प्रारंभ करने का जिम्मेदार माना गया है।
सैकड़ों नस्तियां बनाकर वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन माना
नगर पालिका की कैशबुक से पता चला कि जल प्रदाय, विद्युत सामग्री क्रय, वाहन मरम्मत और रोड रेस्टोरेशन के मदों में सैकड़ों नस्तियां बनाकर अत्यधिक खर्च दर्शाया गया। इससे वित्तीय अनुशासन का घोर उल्लंघन प्रतीत होता है। वहीं 11.47 करोड़ के भुगतान में ही एक ही ठेकेदार फर्म शिवम कंस्ट्रक्शन और आशा कंस्ट्रक्शन को 5.09 करोड़ का भुगतान में पक्षपात प्रतीत होता है।
सरकार की राय - अध्यक्ष के पद पर बने रहना वांछनीय नहीं
मप्र नपा अधिनियम की धारा 51 में अपने पदीय कर्तव्यों का विधि अनुसार पालन करने में पूर्णतः विफल माना गया। इसी के परिणाम स्वरूप गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। यानी अपने पदीय कर्तव्यों का पालन करने में अक्षम प्रतीत होती हैं। नियमों के विपरीत कार्य करने की वजह से सरकार ने अपनी राय में माना है कि आपका एक लोकहित के दृष्टिगत अध्यक्ष के पद पर बने रहना वांछनीय नहीं है। धारा 51 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत होकर गंभीर कदाचरण की श्रेणी में मानते हुए धारा 41 क के तहत कार्रवाई की बात कही है। 15 दिन में जवाब नहीं आने पर एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
परिषद की बैठकें नहीं करने पर अध्यक्ष जिम्मेदार
नोटिस में लिखा है कि अध्यक्ष के नाते पीआईसी और परिषद की बैठकें आयोजित करना थीं। लेकिन आपके द्वारा बैठकें आमंत्रित नहीं की गईं। नगर की समस्याएं बढ़ती रहीं और आम नागरिक के कार्यों में रुकावट पैदा हुई। यह मप्र नगर पालिका (मेयर-इन-काउंसिल, प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल के कामकाज का संचालन तथा प्राधिकारियों की शक्तियों और कर्तव्य) नियम 1998 में दिए प्रावधानों के विपरीत है। इसके लिए अध्यक्ष को उत्तरदायी ठहराया गया है।