शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका क्षेत्र में 4,500 बिजली के खंभे ऐसे हैं, जिन पर वर्तमान में एक भी बल्ब या एलईडी नहीं लगी है। इस अभाव के कारण रात होते ही शहर के कई हिस्से अंधेरे में डूब जाते हैं, जिससे सुरक्षा का खतरा भी बना रहता है,इस समस्या को जड से मिटाने के लिए नगर पालिका सीएमओ इशांक धाकड ने रोशनी प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के सभी 39 वार्डों में स्ट्रीट लाइट की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नगर पालिका परिषद ने 2 करोड़ 30 लाख रुपये का भारी-भरकम प्रस्ताव तैयार किया है।
तीन चरणों में होगी लाइटों की खरीदी
नगर पालिका ने रोशनी के इस प्रोजेक्ट को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है ताकि शहर का हर कोना कवर हो सके:
1 सोलर स्ट्रीट लाइट (1 करोड़ रुपये): जिन स्थानों, पार्कों या नई सड़कों पर बिजली की लाइन नहीं पहुंची है, वहां पोल सहित सोलर लाइटें लगाई जाएंगी।
2 एलईडी स्ट्रीट लाइट (70 लाख रुपये): सामान्य विद्युत खंभों पर पुरानी सोडियम लाइटों को हटाकर या खाली पोलों पर नई एलईडी लगाई जाएंगी।
3 हाईमास्ट लाइट (60 लाख रुपये): शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में 12 मीटर ऊंचे हाईमास्ट लगाए जाएंगे, जो दूर तक रोशनी फैलाएंगे।
सोलर और हाईमास्ट पर विशेष जोर
अक्सर सवाल उठता है कि एलईडी के रहते सोलर और हाईमास्ट की क्या जरूरत है? इस पर सीएमओ इशांक धाकड़ ने स्पष्ट किया कि हाईमास्ट का उपयोग चौराहों पर व्यापक उजाले के लिए होगा, जबकि सोलर लाइटें उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होंगी जहां बिजली के तार नहीं बिछे हैं। इससे न केवल अंधेरा दूर होगा बल्कि बिजली की बचत भी होगी।
वित्तीय चुनौती और समाधान
नगर पालिका की आर्थिक स्थिति वर्तमान में कमजोर है, लेकिन सीएमओ ने भरोसा दिलाया है कि शहर के विकास को रुकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए फंड जुटाने हेतु टैक्स वसूली में तेजी लाई जाएगी और राज्य शासन को विशेष प्रस्ताव भेजकर अतिरिक्त बजट की मांग की जाएगी।
पुरानी व्यवस्था में सुधार
हाल ही में खरीदे गए बल्बों के बारे में पूछे जाने पर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वे पुराने पीले सोडियम बल्बों के रिप्लेसमेंट के लिए थे ताकि बिजली बिल कम किया जा सके। लेकिन अब जो नई खरीदी हो रही है, वह उन 4500 पोलों के लिए है जो वर्षों से खाली पड़े हैं। इस पहल से शिवपुरी का 'नाइट विजन' पूरी तरह बदल जाएगा।
तीन चरणों में होगी लाइटों की खरीदी
नगर पालिका ने रोशनी के इस प्रोजेक्ट को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा है ताकि शहर का हर कोना कवर हो सके:
1 सोलर स्ट्रीट लाइट (1 करोड़ रुपये): जिन स्थानों, पार्कों या नई सड़कों पर बिजली की लाइन नहीं पहुंची है, वहां पोल सहित सोलर लाइटें लगाई जाएंगी।
2 एलईडी स्ट्रीट लाइट (70 लाख रुपये): सामान्य विद्युत खंभों पर पुरानी सोडियम लाइटों को हटाकर या खाली पोलों पर नई एलईडी लगाई जाएंगी।
3 हाईमास्ट लाइट (60 लाख रुपये): शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में 12 मीटर ऊंचे हाईमास्ट लगाए जाएंगे, जो दूर तक रोशनी फैलाएंगे।
सोलर और हाईमास्ट पर विशेष जोर
अक्सर सवाल उठता है कि एलईडी के रहते सोलर और हाईमास्ट की क्या जरूरत है? इस पर सीएमओ इशांक धाकड़ ने स्पष्ट किया कि हाईमास्ट का उपयोग चौराहों पर व्यापक उजाले के लिए होगा, जबकि सोलर लाइटें उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होंगी जहां बिजली के तार नहीं बिछे हैं। इससे न केवल अंधेरा दूर होगा बल्कि बिजली की बचत भी होगी।
वित्तीय चुनौती और समाधान
नगर पालिका की आर्थिक स्थिति वर्तमान में कमजोर है, लेकिन सीएमओ ने भरोसा दिलाया है कि शहर के विकास को रुकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए फंड जुटाने हेतु टैक्स वसूली में तेजी लाई जाएगी और राज्य शासन को विशेष प्रस्ताव भेजकर अतिरिक्त बजट की मांग की जाएगी।
पुरानी व्यवस्था में सुधार
हाल ही में खरीदे गए बल्बों के बारे में पूछे जाने पर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वे पुराने पीले सोडियम बल्बों के रिप्लेसमेंट के लिए थे ताकि बिजली बिल कम किया जा सके। लेकिन अब जो नई खरीदी हो रही है, वह उन 4500 पोलों के लिए है जो वर्षों से खाली पड़े हैं। इस पहल से शिवपुरी का 'नाइट विजन' पूरी तरह बदल जाएगा।