Shivpuri News: हिम्मत नहीं हारी राजकुमारी ने, 11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वापस पाया अपना हक

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के भीतर फर्जी नियुक्तियों और गलत बर्खास्तगी के मामलों पर उच्च न्यायालय ने कड़ा प्रहार किया है। पिछोर ब्लॉक के एक 11 साल पुराने मामले में हाईकोर्ट द्वारा तथ्यों की सूक्ष्म जांच के बाद, तत्कालीन अधिकारियों के आदेश को पलटते हुए पीड़ित कार्यकर्ता की बहाली के निर्देश दिए गए। इस फैसले के बाद प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए न केवल नियुक्ति पत्र जारी किया, बल्कि 50 फीसदी एरियर भुगतान का रास्ता भी साफ कर दिया है।

11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वापस पाया अपना हक
महिला एवं बाल विकास में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका के पदों में फर्जी नियुक्तियों के जिस तरह से मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला 11 साल पुराना मामला सामने आया है जिसमें पिछोर के ग्राम चंदावनी के मजरा दुर्गापुर में पदस्थ एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी गुप्ता को तत्कालीन बाल विकास परियोजना अधिकारी रतन सिंह गोंडिया ने हटाकर उसी आंगनबाड़ी केंद्र पर पदस्थ सहायिका पुष्पा राजा बुंदेला को अप्रैल 2015 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बना दिया।

कलेक्टर और कमिश्नर कोर्ट से मिली निराशा हाईकोर्ट से मिला न्याय
इस मामले में राजकुमारी ने पहले कलेक्टर न्यायालय में अपील की, लेकिन निराशा हाथ लगी। थक हारकर राजकुमारी गुप्ता ने उच्च न्यायालय की शरण ली, जहां हर तथ्य को बारिकी से सुना गया और 19 नवंबर 2025 को निर्णय पारित किया गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पद से पृथक दिनांक से आज दिनांक तक 50 प्रतिशत मानदेय प्रदान करते हुए, उसी जगह बहाल किया जाए। लेकिन जब राजकुमारी न्यायालय के आदेश के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग पहुंची, परंतु इस बार भी कलेक्टर न्यायालय से हारी, कमिश्नर न्यायालय से हारी, उच्च न्यायालय ने किया तथ्यों पर विचार कलेक्टर द्वारा जारी किया गया आदेश।

उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके बाद कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने 23 दिसंबर को आदेश जारी किया।। इसके बाद 24 दिसंबर को राजकुमारी की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए, जिस पर उसने आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर 11 साल बाद अपनी नौकरी हासिल कर ली।