बांधवगढ़ की 'आवारा' बाघिन अब शिवपुरी के लिए आफत: इंसानी बस्तियों से है गहरा लगाव - News Today

Bhopal Samachar

शिवपुरी। शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में लाई गई नई बाघिन (MT-6) वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। बांधवगढ़ के जंगलों से 'आवारा' घोषित कर शिवपुरी भेजी गई यह बाघिन जंगली एकांत के बजाय इंसानी बस्तियों के शोर को पसंद कर रही है। रिहायशी इलाकों के प्रति इसका मोह और हाथियों तक से न डरने वाली इसकी 'जिद्दी' फितरत ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। हद तो तब हो गई जब डोगर गांव में 7 घंटे तक डेरा डालने वाली इस बाघिन के हमले को जिम्मेदार अधिकारी यह कहकर नकार रहे हैं कि 'टाइगर सिर्फ खरोंच मारकर नहीं छोड़ता'। क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

बांधवगढ़ में भी मचाया था आतंक
बांधवगढ़ के पनपथा परिक्षेत्र के ग्राम चिल्हारी के आसपास के रिहायशी क्षेत्र मे यह शिवपुरी लाई गई बाघिन सक्रिय थी। इस बाघिन के रिहायशी इलाके में  भ्रमण करने से ग्रामीणो में दहशत का माहौल था। बांधवगढ़ पार्क प्रबंधन   द्वारा हाथियों की मदद से उसे कई बार जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद विभाग ने रेस्क्यू का निर्णय लिया।

बीटीआर के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय और उप संचालक पीके वर्मा की मौजूदगी में अपरान्ह 3:51 बजे रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। आवश्यक चिकित्सकीय जांच और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बाघिन को 26 दिसंबर को शिवपुरी के लिए रवाना किया गया,कुल मिलाकर कहने का सीधा आ अर्थ है कि यह बाघिन जिद्दी है और यह आसानी से अपना क्षेत्र नही छोडती है।

डोंगर गांव में हाथी भगा नही सके थे इस आवारा मादा को
शिवपुरी के सतनवाड़ा थाना सीमा में माधव टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे डोगर गाव मे 1 दिसंबर की सुबह गांव में निवास करने वाले शिवलाल पाल पर हमला करने के बाद यह मादा टाइगर  पूर्व की ओर खेतों में चली गई। आदिवासी बस्ती से 200 से 300 मीटर दूरी पर टाइगर होने पर ग्रामीण महिलाएं और बच्चे छतों पर चढ़ गए। वन विभाग ने ग्रामीणों को दूर रखा। आसपास खेतों पर रात भर से मचानों पर रह रहे किसानों को सुरक्षित निकालकर गांव भेजा। फिर पटाखे फोड़कर बाधिन को भगाने का प्रयास किया। इससे बात नहीं बनी तो दोपहर 12 बजे के बाद हाथी व जेसीबी मंगाई। शाम करीब 4 बजे बाघिन को टाइगर रिजर्व कॉरिडोर एरिया में भगा दिया। कुल मिलाकर यह मादा टाइगर 7 घंटे डोगर गांव के आसपास ही बनी रही थी।

टाइगर सिर्फ खरोंच देकर नहीं छोड़ता, CCF शर्मा
इस पूरे मामले में जब माधव टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि यह बात सही है कि उस क्षेत्र में टाइगर की मौजूदगी थी, परंतु यह बात भी उतनी ही सही है कि यह हमला प्रथम दृष्टया टाइगर का नहीं है। उनके अनुसार हमारा अनुभव है कि टाइगर कभी भी एड़ी पर हमला नहीं करता है और सिर्फ खरोच मारकर नहीं छोड़ता है। उनके अनुसार टाइगर एक एक पंजा ही गंभीर चोट पहुंचाता है।

अगर हमला टाइगर का होता तो निश्चित तौर पर वह ग्रामीण को बहुत ज्यादा घायल कर देता या फिर उसे किल कर देता। कहीं न कहीं ग्रामीणों को गलतफहमी हुई है,सीधे शब्दों में लिखे तो साहब का कहना है कि टाइगर नहीं था अगर होता तो शायद शिवलाल पाल अब जिंदा नही होता,अब टाइगर की उपस्थित के प्रमाण के लिए साहब को अब जिंदा नहीं मरा हुआ आदमी चाहिए।