शिवपुरी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्राची शर्मा उपाध्याय ने बहनों का हक डकारने के लिए तहसील न्यायालय में फर्जी शपथ पत्र व वसीयतनामा प्रस्तुत करने वाले भाई के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में प्रकरण कायम किया है।
जानकारी के अनुसार तृप्ति पत्नी मोहित नाहटा निवासी गुवानपुरा मेन रोड कोटा राजस्थान ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र समाधिया के माध्यम से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां परिवाद दायर किया था। उक्त परिवार में उसने उल्लेख किया कि, उनके पिता स्व. धर्मपाल सांखला के नाम से शिवपुरी में कई संपत्तियां हैं। ऐसे में पिता की मृत्यु के बाद परिवादिया सहित उनकी मां आशा सांखला, बहन राज जैन, ममता जैन व अभियुक्त भाई दीपेश सांखला उनकी संपत्तियों के वैध वारिश हैं।
इसके बावजूद भाई दीपेश सांखला ने पिता धर्मपाल सांखला की मृत्यु के उपरांत जैन मंदिर छत्री रोड शिवपुरी स्थित मकान को अपने नाम नामांतरित कराने के संबंध में शिवपुरी तहसील में आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर तहसील में प्रकरण क्रमांक 137/12-13/अ-6 दर्ज किया गया। भाई दीपेश सांखला ने तहसील न्यायालय में परिवादी तृप्ति नाहटा व बहन राज जैन के नाम से एक संयुक्त शपथ पत्र पेश किया कि, उनके पिता धर्मपाल सांखला ने उनकी तथा मां आशा सांखला की सहमति से दीपेश सांखला के पक्ष में वसीयत निष्पादित करवाई है। उक्त संयुक्त शपथ पत्र में उक्त तथ्य का उल्लेख किया गया है कि संपत्ति को दीपेश सांखला के नाम नामांतरित करने पर हम शपथकर्ता गण की पूर्ण सहमति है।
जबकि अभियोगिया एवं सह अभियोगिया की बहन राज जैन द्वारा ऐसा कोई संयुक्त शपथपत्र संपादित नहीं कराया गया था और न ही कोई स्वीकृति प्रदान की गई थी। परिवादी तृप्ति नाहटा के अनुसार उनके भाई दीपेश सांखला ने शिवपुरी तहसील के प्रकरण क्रमांक 137/12-13/अ-6 में जो संयुक्त शपथ पत्र व वसीयतनामा प्रस्तुत किया है वह फर्जी एवं कूटरचित है।
इस प्रकार दीपेश सांखला द्वारा कूटरचित व फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर उक्त संपत्ति का नामांतरण कराए जाने से दीपेश सांखला द्वारा आपराधिक कृत्य किया है। ऐसे में उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। न्यायालय ने परिवाद की सुनवाई के दौरान समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत आदेश जारी किया है कि प्रथम दृष्टया दीपेश पुत्र स्व धर्मपाल सांखला के विरुद्ध धारा 318(4), 338, 340 (2) बीएनएस के तहत मामला संज्ञान में लेने के लिए आपराधिक पंजी में दर्ज कराया जाए।