SHIVPURI NEWS- मनोज की कहानी:फेसबुक पर आकर सुनाई लाईव-कैसे पत्नि ने धोखा दिया,कहा जिंदा कैसे हूं

Bhopal Samachar
शिवपुरी। शिवपुरी के मनोज जैन ने फेसबुक पर लाइव आकर अपनी निजी जिंदगी की कडवी सच्चाई शेयर किया है। मनोज जैन ने बताया कि उनकी पत्नि ने उन्हें कैसे धोखा दिया और अपने बच्चों को छोड़कर चली गई। इसका जिम्मेदार मुकेश प्रिंटिंग प्रेस वालो का बडा भाई है। कैसे जिंदा हूं बस बता नही सकता।

तो आप भी पढ़िए मनोज जैन की पूरी कहानी,
मनोज ने बताया कि मैं साथियों में सोशल मीडिया के माध्यम से आज एक बात आप लोगों के साथ करने जा रहा हूं वो मेरे जैसे व्यक्तियों के लिए बड़ा ही कठिन हैं उसे आप लोगों के समक्ष रखना, क्योंकि जो दर्द में पिछले 5 वर्षो से झेल रहा हूं। उसके बावजूद अगर मैं आपके सामने हूं,मेरा दावा है। कि मेरी पूरी बात सुनने के बाद आप विचार करेगें। कि मैं जीवित कैसे हूं।

साथियों मैं अपनी पारिवारिक जिन्दगी के बारे में मैं आपसे चर्चा करना चाहता हूं, मेरा विवाह 22 जून 2003 को कविता के साथ हुआ। 2004 में हमारे एक पुत्र ने हमारे घर में जन्म लिया। और 2007 में एक पुत्री के साथ हमारा परिवार पूरा हुआ। बड़े हंसी खुशी से हमारा जीवन चल रहा था। या यू कहे कि बेहतरीन जीवन चल रहा था। तभी 2013 में 5 फरवरी को मेरी पत्नी का स्वास्थ्य खराब हुआ। उसे सिर दर्द की समस्या के चलते मैंने नीजी चिकित्सालय एमएम हास्पीटल में एडमिड करवाया।

जहां डॉक्टर ने मुझे ग्वालियर जाने की सलाह दी। जिसके बाद मैंने भी देर ना करते हुए उसे 6 फरवरी को ग्वालियर के हॉस्पिटल न्यूरोलॉजी में भर्ती करा दिया। वहां न्यूरोलॉजी में अगले दो तीन दिन में उसका एक हिस्सा पूरा पेरालाईज हो गया। और डॉक्टर के अनुसार उसे ब्रेन ट्यूमर था। जिसका ऑपरेशन करना जरूरी था, वहां के सारे इलाज मैंने अपने मित्रों, रिश्तेदारों से कर्ज लेकर कराए। उन्हीं मित्रों रिश्तेदारों सलाह से में अपनी पत्नी के ब्रेन ट्यूमर इलाज के लिए दिल्ली ले गया।

वहां एक शासकीय चिकित्सालय में मैंने इलाज करवाने की कोशिश की लेकिन वहां कुछ ज्यादा फायदा नही मिलता देख मेरे परिजन हमारे तत्कालीन सांसद और केन्द्रीय मंत्री श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी के पास पहुंचे और श्रीमंत सिंधिया जी ने अति संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तुरंत ही मेरी पत्नी को एक निजी हॉस्पिटल रियल कपूर में भर्ती कराया।

जहां 16 फरवरी से 7 मार्च तक मेरी पत्नी भर्ती रही, और अंदरूनी खर्चे जांच वेड बाकी सारे अस्पताल के पूरा बिल टोटल 7 लाख 34 हजार बना, जिसे माननीय सिंधिया जी के कार्यालय से पेढ किया गया। मेरी पत्नी कुछ हद तक स्वास्थ्य हो गई, मैं अपने घर ले आया और उसके बाद करीब एक साल तक मैंने अपनी पत्नी का घर रहकर अपने रिश्तेदार व अपने दोस्तों से पैसे ले कर कराया। लगातार एक साल इलाज चलने के बाद मेरी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ हो गई।

परंतु पता नहीं अचानक से क्या हुआ मेरी पत्नी 2015 मेरी पत्नी 26 मई को मुझे व मेरे बच्चों को छोड़कर अपनी मां के साथ चली गई। काफी प्रयास किये ये क्यों किया कैसे हुआ। उसके बाद पत्नी को वापस लाने के लिए मैंने कई प्रयास किये, परंतु कुछ सुनने को मिला कि तलाक देदो। अन्यथा घरेलू हिंसा की कायमी करके जेल भिजवा दूंगी।

मैंने फैमिली कोर्ट शिवपुरी में धारा 9 के तहत अपनी पत्नी वापस बुलाने के लिए आवेदन लगाया, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा पत्नी को वापस घर आने के लिए कहा गया। परंतु पत्नी ने साथ ना रहते हुए, धारा 13 के तहत तलाक के लिए उसी कुटुंब न्यायालय में लगा दिया। जिसे माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया, आज दोनों ही केस मेरी पत्नी के द्वारा ग्वालियर हाई कोर्ट में अपील के तोर पर लगे हुए हैं।

2018 में मुझे एक चौका देने वाला सच मालूम चला। कि मेरे और मेरी पत्नी के बीच में कोई तीसरा हैं। जो यह सब काम कर रहा है, और उसी तीसरे की वजह से मेरे व मेरी पत्नी के बीच समझौता नहीं हो पा रहा है। और उस तीसरे व्यक्ति का नाम हैं योगेश बंसल जो पुरानी शिवपुरी राधारमण मंदिर के पास के निवासी हैं। उसके पिता जगदीश प्रसाद बसंल हैं, और कस्टम गेट के पास उनकी मुकेश प्रिंटिंग प्रेस के नाम से दुकान हैं।

वर्तमान में कानून प्रक्रिया में जिला विधिक सहकारिता अधिकारी के पद पर हैं,जब इस पद का महत्व पता लगाया तो पता चला कि इस पद का काम होता हैं बिछड़ो को मिलाना, समझौता कराना, समानता, कानूनी सलह देना परंतु बड़ा अफसोस हुआ कि एक ऐसा व्यक्ति जो एक ऐसे पद पर बैठा हैं। जो खुद एक गैरकानूनी काम में लगा हैं। मैंने अपने मित्रों और रिश्तेदारों, मित्रों के माध्यम से योगेश बंसल के परिवार को समझाने की कोशिश की थी। परंतु पावर पैसा हैं तो कहां मानने वाले थे।

मैंने जब इनका फेसबुक आईडी निकाली तो मैंने देखा तो यह तो पहले से ही शादीशुदा हैं। फिर मैंने देखा तो उनकी दिसंबर 2016 की इनकी एक पोस्ट में उनका अनमैरिड न्यू रिलेशनशिप लिखा हुआ हैं जो कि कुछ इशारा कर रहा हैं इसके बाद मैंने 2018 मैं योगेश बसंल के खिलाफ शिकायतें करना शुरू की, जबलपुर में मैंने पहली शिकायत की, इतनी शिकायतें करने के बाद भी इनके खिलाफ एक भी जांच नहीं हुई।

क्योंकि उनके पास पद पैसा, पावर सब हैं। मजबूरी में 2019 में मैंने जबलपुर जाकर माननीय सदस्य सचिव महोदय के सामने उपस्थित हुआ तब जाकर इनके खिलाफ जांच का आदेश हुआ। लेकिन यह जांच एक ऐसे अधिकारी के पास पहुंची जो कि उन्हीं के आफिस में बैठते हैं। और उन्हीं के सिनियर हैं। उन महोदय ने जांच की अवधि के दौरान योगेश बसंल के जन्मदिन पर माला पहनाते हुए और साथ मैं नौका विहार करते हुए सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट किये गये। मेरे पास माजूद हैं, यह सारी चीजे मैं आवश्यकता पड़ने पर किसी को भी दिखा सकता हूं। परंतु सब कुछ करने के बाद भी मुझे न्याय नहीं मिला।

जब आरटीआई से पता किया तो इनके ससुर साहब हरिकुमार गुप्ता निवासी बदरवास ने भी इनके खिलाफ इसी तरह की शिकायत की हुई हैं जिसमें किसी महिला कविता नाम महिला को इनके साथ रखने का वर्णन किया गया हैं। और उन्होंने तो यहां तक कहा हैं कि मैंने इन दोनों को साथ मैं देखा हैं और मैंने इनसे बात की हैं,वह सबूत भी मेरे पास हैं। इधर जांच चल रही हैं, और उधर योगेश बसंल ने अपने बड़े भाई के नाम एक मकान खरीदकर मेरी पत्नी और उसके मायके वालों को रखने के लिए दे दिया।

जो कि शिवपुरी में फतेहपुर रोड़ वर्मा कॉलोनी में स्थित हैं। मेरे पास उस मकान का रजिस्ट्रेशन लेटर मौजूद हैं। बड़े ही धूमधाम से उस मकान में मेरे ससुरालवालों ने गृह प्रवेश किया था। कि हमारे बेटे ने मकान खरीद लिया। मेरे बेटों ने मकान खरीद लिया यह कहते थे। लेकिन सच्चीई यह थी कि वह मकान योगेश वंशल के भाई के नाम था।

उसके बाद मैंने राज्य मानव आयोग भोपाल का गेट खटखटाया। उन्होंने माननीय पुलिस अधीक्षक महोदय को जांच करने का आदेश भेज दिया, और जांच अधिकारी न्युक्त किये। और उन्होंने मुझे बुलाया और मेरे कथन लिये ओर मेरे कहने पर उन्होंने हरिकुमार गुप्ता जी के कथन लिए, और मेरे कहने पर और तो और मेरी पत्नी के भी कथन किये। परंतु मेरे लाख निवेदन करने के बाद भी उन्होंने योगेश बसंल के कथन लेना उचित नहीं समझा गया।

जबकि योगेश बसंल जी जब भी शिवपुरी आते हैं तो मेरी पत्नी उसके भाई के साथ चित्रा नगर वाले मकान पर रखती हैं। चित्रानगर में इनके भाई दीपक बसंल का मकान हैं। मैं छोटा आदमी हुं किसी के घर में नहीं घुस सकता कानून हाथ में नहीं ले सकता, लेकिन मैंने हर बार मौखिक सूचना माननीय जांच अधिकारी को दी। लेकिन उन्होंने योगेश बसंल को एक नोटिस जारी नहीं किया। यह मेरे समाज के जो तथाकथित ठेकेदार हैं, जो प्रबुद्ध लोग हैं उनमें से कई लोगों को मैंने यह मामला बताया उनको निवेदन किया उनको समझाया।

लेकिन वह बड़े बड़े ठेकेदारों ने मेरे मामले में हाथ डालना उचित नहीं समझा। योगेश बसंल जहां जहां रहते हैं। चाहे वो उनकी मंदसौर पद स्थापना हुई हो, चाहे सागर, या कहीं भी अगर एक जांच भी निष्पक्ष हो गई हो जाती तो में दाबा करता हूं कि निश्चित रूप से मेरी आरोपों की सच्चाई सबके सामने आ जाती परंतु वहीं बल पावर और पैसा। परंतु में कुछ नहीं कर सकता क्योंकि मेरे पास ना तो मेरे पास बल हैं ना ही पावर और ना ही पैसा हैं मैं समाज का बहुत छोटा सा हिस्सा हूं।

और शायद यही समय होता हैं कि आदमी न्याय के लिए भटकते भटकते स्वयं न्याय करने पर उतर आता हैं। मैं जीवित हुं मेरी अपनी मजबूरियां हैं, मेरा परिवार, मेरे दोनों बच्चे हैं जिनको मां ने जाने के बाद एक विश करना भी उचित नहीं समझा। 7 साल की मासूम बेटी और 10 साल के मासूम बेटे को छोड़कर चली गई। यह योगेश बसंल जैसे लोग क्या संदेश देना चाहते हैं। दुनिया को और समाज को, मैं आप लोगों से पूछता हूं।

आपसे वादा करता कि अगर मैं एक प्रतिशत भी गलत हुआ मैंने जिन विभागों में शिकायत कि हैं उन विभागों के मुझे नाम तक मौखिक याद हैं। जांच अधिकारी ने मुझे देहात थाने में बुलाकर यह कहा कि हम आपके हिसाब से नहीं लिखेंगे। हम वहीं लिखेंगे जो हमें लिखना होगा, आपके वयान, लेकिन मैं क्या कर सकता था। उनके आगे, मेरा छोटा सा बस यहीं अनुरोध है, कि मेरे जैसे व्यक्ति और भी होंगे समाज में लेकिन एक बात कड़वा सच सबके समक्ष करना चाहता हूं, और वो यह हैं कि अगर आपके पास पावर और पैसा नहीं हैं तो आपको न्याय मिलना लगभग असंभव हैं, आपको न्याय नहीं मिल सकता आप कुछ नहीं कर सकते।
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