बड़ा करने के लिए सपनो देखो, पूरा करने के लिए जिद और जुनुन सिर सवार करो, सफलता आपके पास होगी: डॉ नीतेश शर्मा- Shivpuri News

शिवुपरी।
कहते है कुछ करने के लिए बहुत मेहनत लग्न और त्याग की आवश्यकता होती हैं,लेकिन इन सभी गुणों के पहले कुछ बडा करने के लिए बडे सपने देखने की आवश्यकता होती हैं। बड़े सपने देखने और उन्हें साकार रूप में लाने के लिए हमारे सामने उदाहरण के रूप में डॉ नीतेश शर्मा बने हैं। बड़ा सपना था कि शहर में डेंटिस्ट का एक बड़ा अस्पताल बने। डॉ नीतेश शर्मा ने यह सपना देखा और सकार हुआ आज ओमस डेंटल हॉस्पिटल एंड स्किन केयर सेंटर के रूप में।

हम डॉ नीतेश शर्मा का पूरा पचिरय करते हैं नाम डॉ नीतेश शर्मा उम्र 34 साल पिता डॉ केके शर्मा कार्य डेंटल सर्जन शिक्षा BDS-PGDCC IE सस्था का नाम ओमस डेंटल हॉस्पिटल। डॉ नीतेश शर्मा ने बताया कि पिताजी डॉ के के शर्मा जो पेशे से दंत चिकित्सक है मैं उनके जैसा बनना चाहता था वह दर्द से कराह रहे लोगों का इलाज करते है मै भी इसी क्षेत्र में जाना चाहता था और मेरे पिता चाहते थे कि मेरा बेटा शहर में उनसे भी बड़ा डॉक्टर बने यहां से शुरू हुआ एक सपना जिसको साकार करने की ठानी।

डॉ नीेतेश ने बताया कि मैं 12वीं पास करने के बाद और यूपी की परीक्षा एग्जाम क्रैक करने के बाद यूपी के कॉलेज में 5 साल का BDS किया और उसके बाद 3 साल की सर्जन डिग्री लेने के लिए मेहनत की। 8 साल कॉलेज में पढ़ने के बाद में नाम के साथ जुड़ गया डॉ नीतेश शर्मा नौकरी के कई ऑफर आए लेकिन मुझे मेरी जन्मभूमि शिवपुरी में ही कुछ करना था।

जब में पढाई कर रहा था हमारे कॉलेज में एक शानदार डेंटल हॉस्पिटल था में उस जैसा हॉस्पिटल शिवपुरी में बनाना चाहता था। शुरुआत में मेैने अपने घर तुलसी नगर में ही प्रैक्टिस की पूरे 7 साल घर पर प्रैक्टिस करने के बाद ओमस हॉस्पिटल जो मेरा सपना था कि मेरे शहर शिवपुरी में भी डेंटल हॉस्पिटल बने वह साकार हुआ हैं।

डॉ नीतेश ने शिवपुरी समाचार डॉट कॉम से बातचीत करते हुए बताया कि बीडीएसी की पढाई करने का कॉलेज में मेरा प्रथम कदम और ओमस हॉस्पिटल का उद्घाटन दिन पूरे 15 साल इस सपने को पूरा करने में लग गए। आज शिवपुरी शहर में तीन मंजिला का आधुनिक मशीनों और महानगरों जैसी सुविधा युक्त ओमस डेंटल हॉस्पिटल एकमात्र डेंटल हॉस्पिटल है।

डॉ नीतेश शर्मा से पूछा गया कि अब आप इस सफलता को कैसे देखते हैं उन्होंने बेबाक शब्दों में कहा कि कछुआ का चरित्र अपने जीवन में उतार लो वह चलता रहा बस चलता रहा और जीत गया। जैसे सूर्य प्रतिदिन उदय होता है वैसे ही हमें प्रतिदिन अपने काम को करना हैं। अभी मैं सफल नहीं हूं यह मेरी पहली मंजिल हैं मुझे महानगरों में ओमस डेंटल हॉस्पिटल की चैन स्थापित करनी हैं। जब में अपने आप को सफल मानूंगा और जब तक यह पूरा नहीं होगा मेरा प्रयास बंद नहीं होगा।

अपनी सफलता का मूल मंत्र के विषय में कहा कि सपना देखना और पूरा करना । हर आदमी को सपना देखना चाहिए फिर उसको पूरा करने के लिए प्रयास करना चाहिए। किस्मत पर विश्वास करते है कि कर्म पर इस प्रश्न के जवाब में डॉ नीतेश ने कहा कि दोनो ही एक दूसरे के विपरीत हैं लेकिन जैसे नदी के दो छोर होते है। किसी भी नदी के दो छोर अर्थात उदगम और समागम होते हैं ऐसे ही हर व्यक्ति के यह दोनो छोर किस्मत और कर्म होते हैं।

डॉ केके शर्मा के यहां पैदा हुआ और होश संभालते ही उनको लोगों का इलाज करते देखा था। मैं ऐसे घर में मेरा जन्म हुआ जिसमें लोगों का इलाज करना पेशा हैं। यह मेरी प्रारब्ध है या कह लो कि किस्मत हैं। मैंने पढ़ लिख कर सर्जन की उपाधि प्राप्त की यह कर्म हैं। वैसे कहा जाता है कि आदमी का जीना मरना केवल ईश्वर के हाथ में है बाकी सफलता मिलना या ना मिलना उसके कर्म पर निर्धारित करता हैं।

सफलता के श्रेय पर बात करते हुए डॉ शर्मा ने मुस्कराते हुए कहा कि श्रेय मै अपनी गर्लफ्रेंड को दूंगा जो मेरी अब बाइफ हैं। अपने आइडल के विषय में बात करते हुए मेरे पूज्य पिताश्री डॉ केके शर्मा है उन्ही को देखकर ही मै डॉक्टर बना।

समाज कैसा होना चाहिए इस विषय पर कहा कि समाज जिम्मेदार और जागरूक होना चाहिए। चार लोगो को मिलकर परिवार बनता है और कई परिवारों को मिलाकर समाज बनता हैं। समाज में रहने वाले प्रत्येक नागरिक का अपना एक काम है या यूँ कह लो कि वह कोई भी काम करता हैं पूरी ईमानदारी से करे जिम्मेदारी से करे। वही समाज के हर प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना चाहिए शिक्षित भी होना चाहिए।

वर्तमान स्कूल शिक्षा और नैतिक शिक्षा में क्या अंतर हैं। इस पर बातचीत करते हुए बताया कि वर्तमान शिक्षा या किताबी ज्ञान में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट या और कोई अन्य विषय में डिग्री मिल सकती हैं लेकिन समाज में रहने हमे हमारी नैतिक शिक्षा ही सिखाती हैं। नैतिक शिक्षा हमे हमारे एक ही रूप में एक पिता के रूप की जिम्मेदारी परिवार की जिम्मेदारी और समाज के प्रति जिम्मेदारी का ज्ञान देती हैं। अगर आप पर कोई स्पेशल डिग्री नहीं है तो चलेगा लेकिन नैतिक शिक्षा के अनुसार आप समाज में आचरण और व्यवहार करते हो तो आप समाज में पूजनीय हो सकते हो।