डॉ डॉन का नया कारनामा: मेरिट सूची में घोटाला, जिसका सूची में नाम ही नही था उसे बना दिया नर्सिंग आफिसर- Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी मेडिकल कॉलेज अपने इलाज से अधिक विवाद के लिए पहचान बना चुका हैं। कॉलेज का स्टाफ भर्ती काण्ड विधानसभा में गूंजा था। इस भर्ती काण्ड के लिए जांच के लिए समिति बनी लेकिन जांच का कहा पोस्टमार्टम कर दिया आज तक पता नही है। अब फिर एक नया घोटाला सामने आया है। बताया जा रहा है कि मैरिट सूची में जिस आवेदक का नाम नही था उसे नर्सिंग आफिसर बना दिया।

जानकारी के अनुसार मार्च महीने में श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय शिवपुरी में नर्सिंग आफिसर के पद पर नियुक्ति होती विज्ञप्ति निकाली थी। इस भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित पद पर ग्वालियर निवासी तनुजा पुत्री जगतपाल सिंह भदौरिया ने 22 मार्च 2022 को आवेदन किया। आवेदन जमा करने के उपरांत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने आवेदन की स्क्रूटनी की और तनुजा भदौरिया की नाम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित स्थानों की मेरिट सूची में दसवें नंबर पर आया, लेकिन उसका नाम चयन सूची में नहीं था।

चयन सूची में सात अभ्यर्थियों के नाम थे, इन चयनित अभ्यर्थियों में चौथे नंबर पर एक नाम बुलबुल पुत्री विश्वेश्वर हलदार का था। खास बात यह है कि बुलबुल हलदार का नाम मेरिट सूची में नहीं था। ऐसे में विचारणीय पहलू यह है कि जब मेरिट सूची में अभ्यर्थी का नाम नहीं था तो चयनित अभ्यर्थियों की सूची में उसका नाम कैसे आ गया? यहां बताना होगा कि इससे पूर्व भी मेडिकल कालेज में भर्ती घोटाला उजागर हुआ था। मामले की जांच के लिए दो साल पहले कांग्रेस के शासन में विधानसभा स्तर की कमेटी गठित की गई थी जिसकी जांच आज तक सामने नहीं आई।

कमिश्नर को शिकायत, वहां भी दबा दिया मामला

तनुजा का कहना है कि उसने करीब 20 दिन पहले कमिश्नर को इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। कमिश्नर ने नोडल अधिकारी डा. विशाल प्रताप सिंह तोमर मामले की जांच दी। बकौल तनुजा उसे कहा गया कि सात दिन के अंदर उसे पत्र के माध्यम से बता दिया जाएगा कि जांच में क्या पाया गया? लेकिन आज तक उसे कोई जबाब नहीं दिया गया है।

तनुजा आधा दर्जन से अधिक चक्कर कमिश्नर ऑफिस के काट चुकी है लेकिन उसे कोई जबाब नहीं दिया जा रहा है। तनुजा का तो यहां तक कहना है कि डा. विशाल प्रताप सिंह तोमर ने उसके सामने ही मेडिकल कॉलेज के डीन को फोन लगाया और कहा कि जो भी रिपोर्ट हो आप भिजवा दो मैं सब दिखवा लूंगा, इसे फिलहाल लौटा देता हूं। तनुजा का कहना है कि उसने स्वास्थ्य सचिव और चिकित्सा शिक्षा मंत्री तक को भी मेल के माध्यम से मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

अनारक्षित श्रेणी में भी भर्ती घोटाला, ऐसे समझें

ऐसा सिर्फ तनुजा के साथ नहीं हुआ, बल्कि फार्म डालने वाली दर्जन भर लड़कियों के साथ इस तरह से धोखाधड़ी की गई है। अनारक्षित वर्ग की मेरिट सूची में प्रथम स्थान पर दर्ज रितु नाम की अभ्यर्थी का भी चयन सूची में नाम नहीं है। वह भी मामले की शिकायत करते हुए घूम रही है, लेकिन उसकी भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही। खास बात यह है कि इस वर्ग की मेरिट सूची में छह अभ्यर्थियों के नाम थे, जिसमें पहले नंबर पर रितु थी।

इसके बाद दो अन्य अभ्यर्थी थीं लेकिन उन दोनों का नाम भी चयनित की सूची में नहीं है। चौथे नंबर पर दर्ज मीना नाम की अभ्यर्थी का नाम चयनित सूची में है। पांचवें नंबर पर दर्ज अभ्यर्थी का नाम भी चयनित में नहीं है, छठे नंबर पर दर्ज नेहा द्विवेदी का नाम चयनित की सूची में है। यह दृश्य बताने के लिए काफी है कि मेडिकल कॉलेज में किस तरह से सांठगांठ करके उक्त पदों पर भर्तियां की गई हैं।

डीन ने शिकायतकर्ता को ही गलत ठहराया

जब इस मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन डा.अक्षय निगम से बात की गई तो उन्होंने सिर्फ तनुजा का नाम सुनते ही कहा कि बात हो गई है, सब फर्जी है। वह कैंडिडेट ही गलत है। हालांकि वह यह नहीं बता पाए कि कैंडिडेट गलत किस तरह से है। इसके बाद डीन ने एक घंटे बाद बात करने का कहकर फोन काट दिया।