Shivpuri News- आरक्षण ने बाहुबलियों के आगे दम तोड़ा, इस पंचायत में दूसरे गांव का सरपंच बनेगा

संजीव जाट@ शिवपुरी। पिछडो को मौका मिले इस कारण ही चुनाव में आरक्षण प्रक्रिया को अपनाया गया हैं,लेकिन कोलारस विधानसभा में ऐसा कई बार सार्वजनिक रूप से देखने में आया हैं कि यहां वैधानिक प्रक्रिया आरक्षण दम तोडता आया हैं,सीट आरक्षित हैं पर वह किसी बाहुबली के कब्जे में हैं,कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा हैं बदरवास जनपद की पंचायत बीजरी में।

ग्राम पंचायत बीजरी में सरपंच पद आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हो गया है,फिजीकली देखे तो इस पंचायत में कोई भी आदिवासी परिवार निवास नही करता हैं। लेकिन यह इस गांव की मतदाता सूची में अचानक से 2 नाम प्रकट हो गए है। अब इस आदिवासी दंपत्ति में से किसी एक सदस्य का सरपंच निर्विरोध चुना जाना तय है जबकि यह दंपत्ति इस ग्राम पंचायत के निवासी नही हैं।

सीएम हेल्पलाइन में की गई थी शिकायत

बीजरी में रहने वाले देवीसिंह दांगी की शिकायत पर बीजरी गांव की मतदाता सूची में पप्पू आदिवासी एवं रबो आदिवासी के नाम जोड़ने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में की गई। शिकायत की जांच की गई तो इसके समाधान में पप्पू आदिवासी इसके समाधान में पप्पू आदिवासी-ZPR 1939818 एवं रबो आदिवासी ZPR 1939776 पूर्व में ही बीएलओ के माध्यम से प्राप्त फार्म 07 से विलोपित किए जा चुके हैं। शिकायत निराधार है,शिकायत को बंद किया जाता है।

प्रशासन यहां खाया चकमा या फिर साजिश

इस शिकायत का समाधान ऐसे किया गया कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे,इस शिकायत के समाधान में जांच अधिकारी चकमा खाया हैं या फिर गांव के किसी बाहूबली की साजिश में शामिल हुआ है। इस शिकायत के समाधान में विधानसभा की मतदाता सूची से इस दंपत्ति के नाम हटा दिए गए लेकिन ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से नही। अब इस ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में सिर्फ इसी आदिवासी दंपति का नाम है और इसका निर्विरोध सरपंच बनना तय हैं।

जबकि बीजरी गांव के मतदान केंद्र क्रमांक 161—162 में कोई भी आदिवासी नहीं रहता, लेकिन केंद्र क्रमांक 162 में रबो पत्नी पप्पू आदिवासी एवं पप्पू पुत्र ललुआ आदिवासी का नाम जोड दिया गया है। यह पति-पत्नी इस गांव में न तो निवास करते हैं और न ही उनके नाम से कोई घर टपरिया या जमीन हैं।

इससे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को किया गया था राजस्थान से आयातित

अक्सर देखने में आता है कि आरक्षण प्रक्रिया में जब कोई भी पद आदिवासी के लिए आरक्षित होता है तो गांव की सत्ता किसी गांव के ही किसी बाहूबली के हाथ में रहती हैं। जिले में सबसे अधिक यह कोलारस विधानसभा में देखने को मिला हैं।

शिवपुरी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जूली आदिवासी मूलतः राजस्थान की रहने वाली है, जिसे शिवपुरी जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया और उसके नाम पर पांच साल तक दूसरों ने अध्यक्षी की, फिर उसे अपने हाल पर छोड़ दिया।

मीडिया को जूली आदिवासी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिवपुरी जब जंगल में बकरियां चराती मिली थी तो उसकी बदहाली की खबर जब मीडिया ने प्रकाशित की थी, तब उसे आवास स्वीकृत हुआ था। जबकि अध्यक्ष रहते हुए उसके नाम पर नेतागिरी करने वालों ने कितनों के आवास स्वीकृत कर दिए थे। इसी तरह बदरवास से जिला पंचायत सदस्य रहा रह चुका मिहू आदिवासी को भी अन्यत्र से लाकर चुनाव लड़ाया था,कुल मिलाकर बाहुबली के हाथ मे जूली आदिवासी के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष जेसा पद था।

इनका कहना हैं
ईआर-टू फार्म भरता तो उसका नाम विलोपित होता। विधानसभा चुनाव में तो उसके नाम विलोपित हो गए थे,लेकिन इसमें ईआर-टू फार्म न भरने की वजह से मतदाता सूची में उनका नाम शामिल रहेगा।
बीके श्रीवास्तव,एसडीएम कोलारस व रिटर्निंग अधिकारी