कांग्रेस की कार्ययोजना की कमी के कारण 36 कांग्रेसी निर्दलीय मैदान में, वही भाजपा के 22 बागी- Shivpuri News

शिवपुरी। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर अब वार्डों में चुनावी गतिविधियां दिखाई देने लगी हैं। प्रत्याशियों ने अपने कार्यालय शुरू कर दिए हैं। कालोनियों में बैनर पोस्टर लगने के साथ महिलाओं की टोलियां घर-घर जाकर जनसंपर्क भी कर रही हैं। इस बार दोनों ही पार्टियों का टिकट वितरण चर्चा में रहा है। भाजपा में असंतुष्टों की भरमार रही तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपनी सूची ही जारी नहीं की। कांग्रेस ने मेंडेंट देने के कुछ मिनट पहले ही अपनी सूची सार्वजनिक की।

इसका नतीजा यह रहा कि दोनों ही दलों में बागियों की भरमार है जो उनकी पार्टी के प्रत्याशियों के लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। बागी दोनों ही दलों के लिए मुश्किल खड़ी करेंगे क्योंकि इनकी संख्या अच्छी खासी है और लगभग आधे वार्ड ऐसे हैं जिनमें यह समीकरण बिगाड़ रहे हैं। भाजपा की बात करें तो यहां 17 वार्ड ऐसे हैं जिनमें एक से अधिक उम्मीदवारों ने भाजपा की ओर से नामांकन भरा।

इन 17 वार्ड में बड़े नेताओं का डैमेज कंट्रोल काम नहीं आया और भाजपा के 22 नेता निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो जीत के दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस की बात की जाए तो इसमें बागियों की संख्या करीब 36 है। कांग्रेस के प्रत्याशी को अपने ही पार्टी के कार्यकर्ता से 25 वार्डों में विरोध का सामना करना पड़ेगा।

कांग्रेस ने नहीं किया डैमेज कंट्रोल, सूची भी छिपाकर रखी

कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर काफी हंगामा हुआ था। एक पदाधिकारी ने तो टिकट कटने पर आत्मदाह तक का प्रयास किया था। नामांकन भरने की अंतिम तिथि 18 जून थी, लेकिन कांग्रेस ने अपनी सूची जारी नहीं की। नाम वापसी की अंतिम तिथि के एक दिन पहले मेंडेंट देते समय ही कांग्रेस ने नाम सार्वजनिक किए।

इसके पहले ही लगभग हर वार्ड यहां से टिकट की उम्मीद लगाने वालों ने नामांकन भर दिया था। जब सूची आई तो अगले दिन अधिकांश ने अपना नाम वापस नहीं लिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला कर दिया। कांग्रेस में इतने अधिक बागियों की संख्या भाजपा को फायदा दिला सकती है। कांग्रेस ने अभी यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा या नहीं।

अप्रत्यक्ष प्रणाली से अध्यक्ष चुने जाने के कारण कार्रवाई से डरी पार्टियां

इस बार अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा यानी पार्षद ही अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। ऐसे में पार्षदों का संख्या बल अध्यक्ष तय करेगा। यदि कोई निर्दलीय जीतकर आता है तो उसका एक वोट काफी मायने रखेगा।

यही कारण है कि दोनों ही दल कार्रवाई करने में संकोच कर रहे हैं। हालांकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व यह स्पष्ट कर दिया है जो बागी होकर चुनाव लड़ रहा है तो वह स्वतः ही खुद को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित माने। वहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष यह मान रहे हैं कि यदि संख्या बल कम हुआ तो बागियों से भी समर्थन लेने में संकोच नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि बागी भी अधिक चिंतित नहीं हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यदि चुनाव निकाल लिया तो पार्टी खुद उनके पास समर्थन मांगने आएगी।

इन वार्डों में बागियों ने बिगाड़ा गणित

वार्ड क्रमांक 2 में भाजपा के तीन बागी और कांग्रेस के 2 बागी हैं जो निर्दलीय लड़ रहे हैं। वहीं वार्ड 5 में इनकी भाजपा से तीन बागी हैं। इसके अलावा वार्ड 37, 36, 34, 1, 11 भी भाजपा के लिए चुनौती बने हैं।

कांग्रेस की बात करें तो वार्ड क्रमांक 2, 3, 4, 8, 17, 18, 21, 35 व 36 में बागी जीत का हिसाब बिगाड़ रहे हैं। भाजपा ने वार्डों को तीन कैटेगरी में बांट दिया है। उनके 12 वार्ड एक कैटेगरी में हैं जिनमें अपनी पार्टी की जीत को लेकर सुनिश्चित हैं। वहीं 20 वार्ड बी कैटेगरी में रखे गए हैं जिनमें कांटे की टक्कर है। शेष वार्ड में निर्दलीय हावी हो रहे हैं। वार्ड क्रमांक 19, 16, 31 और 9 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलेगा।