Shivpuri News- अब सीधे नहीं चुन सकेगी जनता नगर पालिका अध्यक्ष, अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा चुनाव, शिवराज ने रिटर्न किया ड्राफ्ट

शिवपुरी। भारतीय जनता पार्टी का पार्टी विथ डिफेंस का दावा नगरीय निकाय चुनाव के संदर्भ में सटीक नहीं बैठ रहा। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष पद्धति से कराने का निर्णय लिया था। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार के इस निर्णय को बदल दिया था और नगरीय निकाय चुनाव प्रत्यक्ष पद्धति से कराने के लिए अध्यादेश का ड्राफ्ट राजभवन को भेज दिया था, जिसकी जनता ने सराहना की थी।

लेकिन जैसे ही नगरीय निकाय चुनाव की भूमिका तैयार हुई तो अचानक शिवराज सिंह सरकार ने रातों-रात उस ड्राफ्ट को वापिस बुला लिया और इसका अर्थ है कि मेयर और अध्यक्ष का चुनाव अब अप्रत्यक्ष पद्धति से होगा। निर्वाचित पार्षद, महापौर और नपाध्यक्ष का चुनाव करेंंगे। इस निर्णय की जनता में तीखी प्रतिक्रिया है और यह तक कहा जा रहा है कि भाजपा ने मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में अपनी संभावित हार को देखते हुए ऐसा निर्णय लिया है।

18-20 साल पहले मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव निर्वाचित पार्षद करते थे। लेकिन बाद में सरकार ने संशोधन कर मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव को सीधे जनता द्वारा कराने का निर्णय लिया। इसके दो फायदे हैं। एक तो जनता सीधे-सीधे अपने प्रतिनिधि का चुनाव करने के लिए स्वतंत्र है और दूसरे हिस्से खरीद फरोख्त की आशंका भी खत्म हो जाती है। अप्रत्यक्ष पद्धति के चुनाव में धन बल सम्पन्न लोग पार्षदों की बोली लगाते हैं और अपने पक्ष में वोट डालने के लिए उन्हें लाखों रुपए का  लालच देते हैं।

इससे वे प्रत्याशी भी चुनाव जीत जाते हैं, जो जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते। इस तरह के चुनाव में राजनैतिक दलों के जनाधार की भी परीक्षा होती है। इससे जनता के मूड का आंकलन होता है। यहीं कारण है कि सत्ता में जो भी दल होता है। वह प्रत्यक्ष पद्धति के चुनाव से परहेज करता है। तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने भी इसे भांपकर नगरीय निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष पद्धति से कराने का निर्णय लिया।

जिसका विरोध भाजपा ने किया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता मेें आते ही प्रत्यक्ष पद्धति से चुनाव कराने के लिए अध्यादेश का ड्राफ्ट राजभवन को भेज दिया। जिससे नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और अध्यक्ष पद का चुनाव जनता द्वारा कराए जाने की संभावना बढ़ी। लेकिन अचानक प्रदेश सरकार ने यू टर्न लिया और अब अप्रत्यक्ष पद्धति से मेयर और नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव होंगे।

जिससे खरीद फरोख्त बढ़ेगी, भ्रष्टाचार का बोलबाला होगा और जो भी चुना जाएगा, उसका पूरा ध्यान जनहित की अपेक्षा चुनाव में जो पैसा खर्च हुआ है उसे ब्याज सहित वसूल करने की ओर रहेगा। इस कारण अप्रत्यक्ष पद्धति के चुनाव कराए जाने से जनता में निराशा है।