पूरी दुनिया भारत की ओर आशा और विश्वास से भरी नजरो से देख रही हैं: बाबा के विचारों का प्रभाव - Shivpuri City

शिवपुरी। आज जब सारी दुनिया में युद्ध, आतंक और अराजकता का वातावरण है ऐसे में भारतीय संवैधानिक जीवन मूल्यों का ही प्रभाव है कि सारी दुनिया भारत की ओर आशा और विश्वास भरी नजरों से देख रही है।

विश्व का सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नागरिक होने के नाते प्रत्येक भारतीय का प्राथमिक दायित्व है कि वह भारतीय संवैधानिक जीवन मूल्यों को साकार करने में अपनी प्रभावी भूमिका का निर्वहन करें। लोक कल्याणकारी राज्य और समतामूलक समाज की स्थापना संविधान का सर्वोच्च लक्ष्य है, जिसकी परिकल्पना भारतरत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर ने की थी। भारत अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

उक्त बातें एडवोकेट अजय गौतम ने अभिभाषक संघ शिवपुरी द्वारा आयोजित भारतरत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता कहीं। श्री गौतम ने कहा कि भारतभूमि रत्नगर्भा है बाबा साहब उन रत्नों की अग्रपंक्ति में विराजमान हैं, क्योंकि बाबा साहब ने दासता के कठिन दौर में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक क्षेत्रों सहित जीवन के हर क्षेत्र में अपना अमूल्य सकारात्मक योगदान दिया है।

एडवोकेट गौतम ने कहा कि भारत के संविधान की प्रस्तावना में लिखे गये "हम भारत के लोग" और "आत्मार्पित करते हैं " जैसे शब्द बाबा साहब और संविधान सभा की महान वैचारिक विराटता को दर्शित करते हैं। भारत के सुदीर्घ स्वतंत्रता संग्राम में महासागरों के पानी से अधिक रक्त हमारे महापुरुषों ने समर्पित किया।

हमने स्वतंत्रता प्राप्त की। उस स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये संविधान के रूप में विराट जीवन मूल्यों का जीवंत दस्तावेज हमें बाबा साहब डॉ अम्बेडकर और संविधान सभा ने दिया। संविधान का जानकार होने के नाते अभिभाषकों का दायित्व अधिक है कि वह हर भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिये और उनके लिये न्याय सुनिश्चित करने में अपने प्रयासों को बनाए रखें। यह भारतरत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अभिभाषक संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र समाधिया ने कहा कि यह बाबा के विचारों का ही प्रभाव है कि आज हम असमानता, अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव जैसी बुराईयों को खत्म कर चुके हैं और अधिक समरस समाज के निर्माण की दिशा में बढ़ रहे हैं। संघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद धाकड़ ने कहा कि भयंकर कठिन दौर में बाबा साहब ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपनी प्रतिभा को राष्ट्र के नवनिर्माण में लगा दिया। शोषित, पीड़ित, वंचितों के प्रति उनके मन में विशेष संवेदना थी।

जिनके कल्याण के लिये उनके प्रयासों के परिणाम आज सबके सामने हैं। संघ के सचिव पंकज आहूजा ने कहा कि बाबा ने शिक्षा के प्रति आग्रही होने पर सदैव बल दिया। एडवोकेट भीम प्रकाश दोहरे ने कहा कि बाबा साहब ने अंधेरों को चीरकर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास समाज के दुर्बल कहे जाने वाले वर्गों में पैदा किया। जिसके कारण आज वह समाज की मुख्यधारा में होकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। संघ के लाइब्रेरियन राजकुमार शाक्य ने कहा कि हर भारतीय बाबा साहब के कृतित्व का ऋणी रहेगा, उन्होंने उपस्थित सभी अभिभाषकों का आभार व्यक्त किया।

गरिमापूर्ण जयंती कार्यक्रम में संघ के अध्यक्ष शैलेंन्द्र समाधिया, संघ के पूर्व उपाध्यक्ष शंकर लाल गोविल, संघ के पूर्व कोषाध्यक्ष गोपाल व्यास, एस आर बंसल, रघुवर धाकड़, कोषाध्यक्ष ओपी भार्गव अशफाक खान, सीताराम बंसल, नरेंद्र करारे, भीम प्रकाश दोहरे, लाइब्रेरियन राजकुमार शाक्य, सचिव पंकज आहूजा, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश भार्गव, निखिल सक्सेना, बृजेश माहौर, अरविंद पचौरी नरेंद्र करारे आदि एडवोकेट्स उपस्थित थे।