भाई दूज कथा: इस कारण बनाते हैं इस त्यौहार को, यह हैं मुर्हूत- Shivpuri news

शिवपुरी। आज भाई दूज हैं और आज के दिन बहनें अपने भाईयों के यहां मंगल तिलक कर उनके मंगल की कामना करेंगी। हिन्दू धर्म को मानने वाले प्रत्येक घर में यह त्यौहार मनाया जाता हैं लेकिन इस त्यौहार को मनाने के पीछे क्या कारण हैं यह बहुत ही कम लोगों को जानकारी हैं। यह त्यौहार यमराज के द्वारा अपनी बहन यमुना को दिए गए एक वरदान के कारण अस्तित्व में आया हैं आइए जानते हैं भाई दूज की इस कथा कि विषय में,वही आज के मुहूर्त का समय भी नोट कर लिजिए।

पौराणिक कथा  के अनुसार भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा की दो जुड़वां संताने हुईं। यह दोनों संतान एक पुत्र और पुत्री के रूप में जन्‍मे। पुत्र का नाम यमराज रखा गया और पुत्री का नाम यमी रखा गया। यमराज अपनी यमी को बहुत स्नेह करते थे। बाद में यमराज यमलोक के स्वामी हो गए और यमी का विवाह महाराज चित्रगुप्त के साथ कर दिया गया।

यमराज को घर आया देख खुश हो गईं यमी
यमराज अपनी बहन यमी को स्नेह और प्रेम तो बहुत करते थे लेकिन काम की व्यस्तता के चलते वह कभी यमी के घर यानी उसकी ससुराल उनसे मिलने नहीं जा पाते थे। हर बार यमी ही यमराज के यहां पहुंच उनका कुशलक्षेम पूछती थीं। एक बार अचानक यमराज अपनी बहन से मिलने महाराज चित्रगुप्त के महल में पहुंच गए। भाई को घर आया देख बहन यमी ने खूब स्वागत सत्कार किया।


प्रसन्न यमराज ने वरदान मांगने को कहा
यमी ने यमराज को रोली चंदन और अक्षत से तिलक किया और उनकी आरती उतारी। यमी ने भाई के लिए तत्काल पकवान और मिठाइयां बनाएं और उन्हें भोजन कराया। बहन को खुशहाल देख यमराज प्रसन्‍न हुए और कुछ समय विश्राम करने और कुशलक्षेम जानने के बाद लौटने की अनुमति मांगी। यमराज ने बहन के आतिथ्‍य और स्‍वागत से प्रसन्न होकर यमी से उपहार स्वरूप वरदान मांगने को कहा।

यमी ने प्रतिवर्ष आने का वचन लिया
यमी ने भाई यमराज से कहा कि मुझे कोई वरदान नहीं चाहिए, लेकिन मुझे यह वचन चाहिए कि आप प्रतिवर्ष इसी दिन उससे मिलने आएंगे। इसके अलावा यमी ने कहा कि आप ऐसा वचन दें कि जो भाई कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपनी बहन के घर जाएगा और उसके हाथों तिलक कराकर आतिथ्‍य स्‍वीकार करेगा उसे मृत्यु का भय नहीं होगा। यमराज ने अपनी बहन के भोलेपन से खुश होकर वचन दे दिया। इस तिथि को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

ब्रज मंडल में यह करती हैं बहने
वैसे तो हिन्दू प्रदेशों में रहने वाले हिन्दू घरों में यह त्यौहार मनाया जाता हैं भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस भाई दूज को अलग अलग नाम से भी पहचाना जाता हैं। ब्रजमंडल मे इस दिन भाई बहन दोनो विधि विधान से यमुना नदी में स्नान करते है। यमराज ने वरदान दिया था कि जो भाई बहन साथ में स्नान करेंगे,तो उसके फलस्वरूप भाई को जब यमराज लेने आएंगे,तो मृत्यु का कष्ट नहीं होगा।

पाठको को हम जानकारी उपलब्ध करा दे,इस तिथि को शास्त्रों को यम तिथि करते हैं,लेकिन यह दिन कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया तिथि को दर्ज हैं,होली की भाई दूज फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की रात में होलिका दहन के बाद अगली सुबह रंग खेलने वाली होली और फिर इसके बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाया जाता है। इस भाई दूज का शास्त्रों में कोई उल्लेख नही हैं।

दोपहर 12:12 बजे से शुरू होगी दोज तिथि : ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि द्वितीया तिथि 19 मार्च को दोपहर 12:12 से शुरू होगी जो 20 मार्च को सुबह 10:26 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय काल से द्वितीया तिथि 20 मार्च को प्राप्त होगी। जिस कारण से भाई दूज 20 तारीख को मनाया जाएगा।