अपनी पहचान छुपाकर 50 हजार का इनामी डकैत खेतों में कर रहा है मजदूरी: पढिए डकैत का इंटरव्यू - Badarwas News

संजीव जाट बदरवास।
जिस डकैत पर 50 हजार का इनाम हो और 2 राज्यों की पुलिस के लिए सिर का दर्द बन चुका कोई डकैत अपनी पहचान छुपाकर खेतो में दिहाड़ी से मजदूरी कर रहा हो तो शायद आपको विश्वास नही होगा,लेकिन यह सत्य हैं कि 50 हजार का कभी ईनामी रहा डकैत अब अपना परिवार चलाने के लिए खेतों में मजदूरी कर रहा है।

बदरवास से 17 किमी दूर एक गांव में कभी आतंक का पर्याय रहा 50 हजार का इनामी डकैत संग्राम सिंह गडरिया अब अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी कर रहा है। डकैत संग्राम सिंह कभी 50 हजार रुपए का इनामी था,4 साल पहले वह जेल से अपनी सजा काटकर बाहर निकाला हैं उसने बताया कि अब वह 4 साल से मेहनत कर 50 हजार रुपए नही जोड सका है।


संग्राम सिंह ने बताया कि 25 वर्ष की उम्र में भरसुला थाना बामोर कला में अपनी जीवन यापन कर रहे थे तभी गाव के कुछ लोगो ने झूठा मामला दर्ज कराया था फिर हथियार उठाकर जंगल मे उतर गया फिर  कृपया छोटे-छोटे अपराध की फिर उसके बाद लगातार लूट और डकैती के कई मामलों को अंजाम दिया।

उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश में कई जगह पर डकैती और अपराध करने के बाद पुलिस ने मेरे ऊपर 50000 का इनाम घोषित कर दिया उसके बाद जब ददुआ गैंग से विवाद हुआ तो उसके बाद हथियार की जुगत लगाने के लिए भोपाल पहुंचा तोबा मुख्य सूचना के आधार पर मुझे पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर लिया।

न्यायालय ने मुझे 14 साल की सजा सुनाई। 14 वर्ष जेल में रहने के बाद जब में जेल से रिहा हुआ और अब अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए जीवन यापन करने में भी परेशानी आ रही हैं। अपराध की दुनिया से जुड़ा होने के कारण अब कोई रोजगागर या मजदूरी भी नही देता है अपनी पहचान छिपाकर अपने गांव से दूर वर्तमान में गेहूं चना या मसरा की फसल काट रहा हूं।

संग्राम सिंह का कहना है कि 60 वर्ष की उम्र में मेहनत मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करना चाहता हूं इसलिए सरकार से मदद की गुहार भी लगाई लेकिन कोई सहायता अभी तक नहीं मिली हालात यही रहे तो अब मजबूरी बस पुनः हथियार उठाना पड़ेगा और फिर अपराध की दुनिया में कदम रखना पड़ेगा।