बड़ी खबर: सहकारिता में 80 करोड़ के घोटाले का मुख्य आरोपी राकेश पाराशर ने किया सरेंडर !- Shivpuri News

शिवपुरी।
खबर जिले के कोलारस थाना क्षेत्र से आ रही है। जहां बीते 2021 में शिवपुरी जिले में सबसे बडे घोटाले का मुख्य आरोपी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। इस मामले में आरोपी भ्रत्य राकेश पाराशर बीते लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहा था। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने इस आरोपी पर 2 हजार रूपए का इनाम घोषित किया था।

इस मामले में आरोपी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका भी दायर की थी। जिसे माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उसके बाद बताया जा रहा है कि इस आरोपी ने करैरा थाने में आज सरेंडर कर दिया है। यहां बता दे कि इस पूरे घोटाले में करैरा की पिंकी का भी नाम चर्चाओं में रहा है। और आज करैरा में आत्मसमर्पण ने इसे प्रूप कर दिया है। हांलाकि अभी पुलिस इस मामले में कुछ भी कहने से परेज कर रही है।

क्या है मामला
जिले के कोलारस में बीते साल सहकारी बैंक शाखा कोलारस में भृत्य से कैशियर बने राकेश पाराशर सहित तीन लोगों के खिलाफ 80 लाख रूपए के गबन के आरोप के चलते बैंक की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें पुलिस ने पहले चरण में ही पुलिस थाना कोलारस में गबन की एफआइआर दर्ज कर ली गई। इसके बाद जांच टीम ने जो अपनी रिपोर्ट पेश की, उसमें सात अन्य दोषियों के नाम उजागर दिए हैं।

इनमें से तीन दोषी बैंककर्मियों को सोमवार को निलंबित कर दिया था। उसके बाद से इस मामले के आरोपी फरार हो गए। इस मामले में राकेश कुलश्रेष्ठ पूर्व प्रबंधक, सौरभ मेहर पूर्व प्रबंधक व रेणू शर्मा कंप्यूटर आपरेटर कोलारस शाखा को भी दोषी माना है। अभी तक छह लोगों को निलंबित करने के अलावा आॅपरेटर रेणु शर्मा की सेवा समाप्त कर दी थी।

अब एक ही स्थान पर एक भ्रत्य द्धारा कैशियर बनने के बाद 80 लाख रूपए के घोटाले से विधानसभा में भी जमकर हंगामा हुआ था। यह मामला इतना हाईफ्रोफाईल हो गया कि बैंक की और से तत्काल इनकी प्रापर्टी को सीज कर मामले की जांच शुरू की गई।

कोलारस में खजाना मिलने की उड़ा दी थी अफवाह

जिले के कोलारस में हुए इतने बडे घोटाले का आरोपी इतना शातिर है कि उसने कोलारस में हुए इस कारनामें के बाद एक के बाद एक कई बाहन ट्रक बसें और एजेंसी तक खोल ली। जब इनसे कोई पैसे की बात की जाती तो वह रामेश्वर धाम मंदिर में खजाने की बात कहकर लोगों को थाम देते थे।

पूरे जिले में इस खजाने की चर्चाए जोरों पर थी। हालात यह हो गई थी कि रामेश्वर धाम को जो भी बस,ट्रक या जमींन पसंद आ जाती थी उसे वह मुह मांगी कीमत से ज्यादा रूपए देकर खरीदता था। जिसके चलते इसकी परते छुपी रही और जब ओडिट में यह मामला सामने आया पूरा मामला खुल गया।

पूर्व महाप्रबंधक व आडिट टीम की भूमिका भी संदिग्ध

इस मामले में जांच समिति ने अपनी जांच में पाया कि यह घोटाला साल 2013 से जुलाई 2021 तक की समायवधि में हुआ हैं। कोलारस शाखा के कैशियर राकेश पाराशर ने 80 करोड रूपए का गबन किया हैं। 2013 से 2021 तक इस शाखा में 3 बैंक मैनेजर पदस्थ रहे हैं।

सहकारी बैंक शाखा कोलारस में हुए इतने बड़े घोटाले में जिला मुख्यालय के कर्मचारी तो संलिप्त मिले हैं, लेकिन पूर्व महाप्रबंधक के अलावा आडिट टीम हर तीन माह में जांच करने जाती है तथा जब इतना बड़ा घोटाला हो गया तो भी आडिट टीम कैसे ओके रिपोर्ट कैसे देती रही। इसलिए जांच की जद में उन्हेें भी लाया जाना जरूरी हो गया है। हांलाकि अभी राकेश पाराशर की गिरफ्तारी की आॅफिसयल जानकारी नहीं आई है और पुलिस अभी भी इस मामले में कुछ भी कहने से परेज कर रही है।