यशोधरा के शहर छोड़ते ही शहर को सूअर मुक्त करना भूल जाती है नपा, सूअरों से जनजीवन अस्त व्यस्त- Shivpuri News

शिवपुरी। बीते कुछ दिनों पूर्व नगर पालिका द्धारा शहर में सुअरों को निकालने के लिए नगर पालिका द्धारा सूअर पकडों आदोंलन चलाया गया था। यह आंदोलन महज यशोधरा राजे सिंधिया के शिवपुरी में आते ही प्रारंभ हुआ। परंतु यशोधरा राजे जैसे ही शहर से भोपाल गई नगर पालिका इन सुअरों को पकडना भूल गई।

शिवपुरी को सूअरों से समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रदेश सरकार की मंत्री और स्थानीय विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने समन्वय बनाने के लिए कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह को नगर पालिका में कार्यरत एक सूअर पालक के घर पर भी भेजा। सूअरों के रजिस्ट्रेशन के लिए नगर पालिका ने विज्ञप्ति भी निकाली। अभिभाषक संजीव विलगैयां ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली।

लेकिन नगर पालिका सूअरों की बेदखली में इसके बावजूद भी कोई रूचि नहीं दिखा रही है और न्याय पालिका को एक तरह से भ्रमित करने का काम कर रही है। यहीं कारण है कि शहर में सूअरों की संख्या यथावत बनी हुई है और कॉलोनियों मोहल्लों और गलियों तथा बाजारों में सूअरों की धमाचौकडी से जनजीवन परेशान बना हुआ है। सूअरों की बढ़ती हुई संख्या शहर की सुंदरता को भी ग्रहण लगा रही है।

शहर को सूअर समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए नगर पालिका दिखाने को लाखों रूपए खर्च कर चुकी है। सूअरों को मारने के लिए शिकारियों को भी बुलाया गया था। जिन्हें लाखों रूपए का भुगतान किया गया। लेकिन इसके बाद भी सूअर समस्या निरंतर बनी हुई है। बल्कि दिन दूनी रात चौगनी रफ्तार से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है।

मजे की बात तो यह है कि शहर के अधिकांश सूअर पालक नगर पालिका में कार्यरत हैं। लेकिन इसके बावजूद भी नगर पालिका इन सूअर पालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही। बल्कि एक तरह से उन्हें प्रोत्साहन दे रही है। सूअर समस्या से परेशान होकर अभिभाषक संजीव बिलगैयां ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। इस मामले में उच्च न्यायालय ने पुरानी याचिका पर कुछ निर्देश पारित किए थे।

जिनमें बताया गया था कि नगर पालिका में कार्यरत सूअर पालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इन निर्देशों का पालन कराने हेतु संजीव बिलगैयां उच्च न्यायालय गए और उच्च न्यायालय को भ्रमित करने के लिए नगर पालिका ने सूअरों के रजिस्ट्रेशन के लिए विज्ञप्ति निकाल दी। नगर पालिका का कहना था कि यदि किसी ने सूअरों के स्वामित्व के विषय में अवगत नहीं कराया तो इन सूअरों को आवारा मानकर इनकी बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।

सूअर पालकों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि किसी ने भी नगर पालिका में अपने सूअरों का पंजीयन नहीं कराया। ऐसी स्थिति में नगर पालिका को चाहिए था कि वह टीम बुलाकर सूअरों की पकड़ा धकड़ी करे और उन्हें शहर के बाहर छोडऩे की व्यवस्था करे अथवा उनका शूट आउट किया जाए। नगर पालिका ने पहले एक टीम बुलाई जो एक दिन काम करकर नदारत हो गई।

इसके बाद दूसरी टीम बुलाई गई, उसने भी एक दो दिन काम किया और इसके बाद वह टीम भी न जाने कहां चली तथा नगर पालिका प्रशासन ने पूरे मामले से चुप्पी साध ली। हालांकि उच्च न्यायालय में नगर पालिका ने कार्रवाई करने के लिए कुछ समय अवश्य मांगा लेकिन इसके बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नगर पालिका द्वारा नहीं की जा रही।

यूं तो शहर में कोई भी कोना ऐसा नहीं है, जहां सूअर व्याप्त नहीं है और जिनसे लोग परेशान नहीं हैं। लेकिन शहर की पॉश कॉलोनी गौतम बिहार, श्रीराम कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, सदर बाजार, हलवाई खाना, आर्यसमाज रोड़, कमलागंज, महल कॉलोनी, राजेश्वरी रोड आदि क्षेत्रों में सर्वाधिक संख्या में सूअर हैं।

इनका कहना है
त्यौहार की बजय से टीम चली गई थी। यह अभियान आज से फिर से प्रारंभ किया है। आज 80 सूअर पकडे है। कल से एक और टीम आ जाएगी जो इन्हें पकडेगी।
शैलेद्र अवस्थी,सीएमओ नगर पालिका शिवपुरी।