शिवपुरी के आसमान में बढ़ी गिद्धों की उड़ान, गणना में मिले 5 प्रजातियों के गिद्ध

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। प्राकृतिक सफाईकर्मी अर्थात गिद्धो के संख्या के आंकड़े रविवार को सामने आ चुके है। जिले में राज गिद्ध सहित 5 प्रजातियों के 735 गिद्ध मिले। पिछले साल की तुलना में संख्या में इजाफा हुआ। पहली बार मोबाइल एप से लाइन गणना की गई। गणना के आखिरी दिन ही परिणाम सामने आ गए।

जानकारी के मुताबिक सामान्य वन मंडल के साथ माधव टाइगर रिजर्व, शिवपुरी में गणना शुक्रवार से शुरू हुई। शनिवार के बाद रविवार को भी गणना जारी रही। इस दौरान वन विभाग के करीब 350 अधिकारी-कर्मचारियों ने पहली बार Epicollect5 मोबाइल एप का उपयोग किया।

गिद्धों के फोटो लेकर तीनों दिन लाइव गणना की गई। रविवार देर शाम आंकड़े जारी हुए। विभाग का मानना है कि क्षेत्र में गिद्धों की आबादी स्थिर है। आबादी सुरक्षित है। यह एक सुखद खबर है।  शिवपुरी जिले में माधव टाइगर रिजर्व सहित सतनवाड़ा, पोहरी शिवपुरी में  गिद्धों की संख्या अधिक हैं।
शिवपुरी जिले में गणना के दौरान मुख्य रूप से इंडियन लॉन्ग-बिल्ड वल्चर (बड़ी चोंच वाले), राज गिद्ध (किंग वल्चर), इजिप्शियन वल्चर, यूरेशियन ग्रिफन (मिश्र), हिमालय ग्रिफन प्रजातियां पाई गई हैं। इस साल की गणना में जिले के तहत विशेष रूप से माधव टाइगर रिजर्व, सतनवाड़ा, पोहरी, शिवपुरी के वन क्षेत्रों में गिद्धों की सर्वाधिक सघन आबादी देखी गई।

डाइक्लोफेनेक से 2000 में गिद्धों की संख्या कम हुई थी
गिद्ध पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मृत पशुओं के अवशेषों को शीघ्रता से साफ कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने, संक्रामक रोगों के प्रसार को रोकने में सहायक होते हैं। बता दें कि साल 2000 के दशक की शुरुआत में देश भर में प्रकृति के इन सफाई कर्मियों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से भारी गिरावट आई थी। इसका मुख्य कारण मवेशियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दर्द निवारक दवा डाइक्लोफेनेक का उपयोग था। इस दवा से उपचारित

पशुओं का मांस खाने से गिद्धों में किडनी (गुर्दे) की विफलता की समस्या उत्पन्न हुई। इससे उनकी भारी संख्या में मृत्यु हुई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पशु चिकित्सा में डाइक्लोफेनेक के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। अब गिद्धों की संख्या बढ़ने लगी है।