उफनदी सिंध में ट्यूब के सहारे उतरी कंंपनी की टीम, क्षतिग्रस्त टावरो को किया गया खडा - Shivpuri News

शिवपुरी। गत 3 अगस्त को शिवपुरी दतिया ग्वालियर क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि के बाद आई भीषण बाढ़ की विभीषिका में तबाह हुई अति उच्च दाब लाइने और टावर को बेहद दुर्गम और दुरूह परिस्थितियों में पुनर्स्थापित कर मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने एक असाधारण सुधार कार्य किया है ।

मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध संचालक इंजीनियर सुनील तिवारी ने बताया कि बाढ़ के बाद से ही बंद अटल सागर डैम में स्थापित मणिखेड़ा जल विद्युत संयंत्र से आज पुनः उत्पादन प्रारंभ होकर पुनर्स्थापित 132 केवी मणिखेड़ा -करेरा अति उच्च दाब लाइन से मध्य प्रदेश को बिजली आपूर्ति प्रारंभ हो गई है।

उल्लेखनीय है कि अतिवृष्टि और बाढ़ में करीब 45 किलोमीटर मणिखेड़ा करेरा लाइन के दोनों सर्किटों का अधिकांश हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था जिसके कारण जल विघुत उत्पादन बंद था अटल सागर डैम से तकरीबन 3 किलोमीटर पहले मणिखेड़ा ग्राम में 134 से 137 लोकेशन तक के टावर बुरी तरह प्रभावित थे लगातार बारिश बाढ़ और सड़क मार्ग अवरुद्ध होने के कारण स्थल पर पहुंचना अत्यंत कठिन हो गया था।

इस विषम परिस्थिति में अति उच्च दाब मेंटेनेंस के मुख्य अभियंता इंजीनियर एस एस बघेल और अधीक्षण अभियंता इंजीनियर एन पी गुप्ता ने स्थल पर स्टाफ को पहुंचाने के लिए जल संसाधन विभाग के स्टीमर का उपयोग करने की योजना बनाई जिसके सहारे क्षतिग्रस्त लोकेशन के पास तक पहुंचा जा सके, पर इसके पहले उफनती सिंध नदी जिसमें नाव चलाना भी कठिन था।

उसको ट्यूब के सहारे पार कर लाइन स्टाफ रामदास राय और लेख राम ने अदम्य साहस दिखाते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना टावर तक पहुंचे और उन्होंने साइट की स्थिति मोबाइल के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचाई जिससे सुधार कार्य का आंकलन हो सका। स्थिति इतनी भयावह थी की साइट पर न ट्रैक्टर जा सकता था ना जेसीबी इस क्षेत्र में इतनी कीचड़ थी कि पैदल चलना भी असंभव हो रहा था।

मणिखेड़ा ग्राम के पास चार टावर पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो गये तथा कुछ टावर उखड़ कर दर्जनों मीटर दूर चले गए थे जिसमें एक टावर करीब 60 मीटर दूर पाया गया तथा 12 टावरों की नींव सुधारी गई सभी कार्य बिना यांत्रिक मशीनों के हाथों द्वारा ठीक किए गए यहां तक कि टावर के भारी भारी पार्टस भी करीब 3 से 4 किलोमीटर पैदल हाथों के सहारे सुधार स्थल पर पहुंचाए।

इन लोकेशनों पर करीब 5 किलोमीटर कंडक्टर जो बेहद वजनी होता है, का अधिकांश हिस्सा भी हाथों के सहारे बदला गया। मध्य प्रदेश की ट्रांसमिशन कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा किए गए इस अदम्य साहस के कार्य के कारण ही इस क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी।