दूसरी लहर पर काबू तब सही जब तीसरी लहर रहे अप्रभावी, असली सफलता तभी मानी जाएगी: अशोक कोचेटा - Shivpuri News

शिवपुरी। शिवपुरी में दूसरी लहर का कोरोना संक्रमण लगभग समाप्त होने को है। एक समय शिवपुरी जिले में कोरोना संक्रमण दर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई थी और आज यह 1 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। निश्चित रूप से बेहद विकट स्थिति से हालात सामान्य करने में कोरोना प्रभारी प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को बहुत मेहनत करनी पड़ी है।

अनलॉक की प्रक्रिया अब शुरू होने वाली है। लेकिन असली खतरा अब शुरू हुआ है। जब हालात सामान्य हो गए हैं। ऐसे में जरा सी भी लापरवाही शिवपुरी को भयावह तीसरी लहर में झोंक सकती है। इस मायने में असली सफलता हमें तब मिलेगी, जब शिवपुरी में कोरोना की तीसरी लहर या तो प्रवेश ही नहीं कर पाएगी और यदि आ भी गई तो उसका प्रभाव बहुत सीमित होगा। उसकी तैयारी अभी से करने की जरूरत है। कैसे? आईये इस पर विचार करते हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सापेक्षताबाद सिद्धांत (थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी) के जनक जर्मन वैज्ञानिक अल्वर्ट आइंस्टीन से जब पत्रकारों ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूछा कि तीसरे विश्व युद्ध के बारे में क्या विचार हैं। तो आइंस्टीन बोले कि तीसरे के बारे में तो मैं कुछ नहीं कह सकता।

लेकिन चौथे विश्व युद्ध के बारे में बता सकता हूं। पत्रकार आश्चर्यचकित हुए और उन्होंने पूछा तो आइंस्टीन का जबाव था कि चौथा विश्व युद्ध नहीं होगा। उन्होंने फिर स्पष्ट किया कि विभिन्न राष्ट्रों के पास आज इतने आणविक हथियार हैं कि संसार एक नहीं बल्कि 7 बार खत्म हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में चौथा विश्व युद्ध होगा ही नहीं और यह बात मैं पूरी गारंटी के साथ कह सकता हूं। नहीं संभले तो दुनिया खत्म होने से कोई नहीं रोक सकता। अल्वर्ट आइंस्टीन का जबाव कोरोना की तीसरी लहर के सवाल के बारे में भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। कोरोना की पहली लहर से निश्चिंतता के कारण ही दूसरी खतरनाक लहर का हमें सामना करना पड़ा।

नबंवर-दिसंबर 2020 मेें तो लोग यह कहने लगे थे कि कहां हैं कोरोना। कोरोना खत्म हो गया, कोरोना पर हमने विजय प्राप्त कर ली। बड़े-बडे सामाजिक, धार्मिक और राजनैतिक कार्यक्रम होने लगे। भीड़ भरी रैलियां होने लगी। सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से गायब हो गई। पहली लहर पर काबू पाने के बाद हमने अपनी पीठ थपथपाना शुरू कर दिया।

जिसका परिणाम यह हुआ कि पूरे देश की तरह शिवपुरी में भी कोरोना का भयंकार दानवीय रूप उभरकर सामने आया है। एक-एक दिन में 20-20 मौत होने लगी। संक्रमितों की संख्या बेतहाशा गति से बढऩे लगी। अस्पताल और मेडीकल कॉलेज में भर्ती करने के लिए स्थान नहीं रहा।

रेमडेशिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन की किल्लत का भी सामना करना पड़ा। संक्रमण बढऩे के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का लापरवाहीपूर्ण रवैया जारी रहा। यशोधरा राजे ने यह जानकर एक सप्ताह के लॉकडाउन का निर्णय लिया। लेकिन लॉकडाउन के बाद केस कम होने के स्थान पर बढऩे लगे। ऐसा क्यों हुआ?

इसकी जब समीक्षा हुई तो पता चला कि संक्रमण अस्पताल से ही फैल रहा है। अस्पताल जहां संक्रमण नियंत्रित होना चाहिए था, वह संक्रमण फैलाने में और बुरी तरह फैलाने में सहभागी बन रहा है। जिला अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीज के परिजनों की एक तो स्वास्थ्य विभाग ने जांच नहीं की। वहीं दूसरी और कोविड वार्ड में प्रवेश खुल्ला कर दिया गया।

जिसके कारण एक-एक मरीज के पास दर्जनों परिजन तथा निकट संबंधी देखने के लिए आने लगे और फिर उन्होंने पूरे बाजार में घूमकर संक्रमण फैलाने का काम किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी शिवपुरी की गंभीर स्थिति पर यशोधरा राजे के समक्ष चिंता व्यक्त की। जब यशोधरा राजे ने समीक्षा की तो स्पष्ट हुआ कि संक्रमण की असली जड़ तो अस्पताल है और फिर कोविड वार्ड में बाहरी लोगों का प्रवेश सख्ती से बंद कर दिया गया।

इसके साथ ही मेडीकल सुविधाएं बढ़ाने, मेडीकल कॉलेज को खोलने, निरंतर ऑक्सीजन और रेमडेशिविर की सप्लाई आदि पर पूरी ऊर्जा के साथ यशोधरा राजे सिंधिया ने ध्यान केन्द्रित किया। आधी-आधी रात जागकर वह लोगों की परेशानियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ हल करती देखी गईं।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ बनाए गए बेहतर समन्वय से शिवपुरी आज निश्चित रूप से एक सुखद स्थिति में है और इसके लिए कोविड प्रभारी मंत्री यशोधरा राजे और पूरा प्रशासन बधाई का हकदार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसके लिए समीक्षा बैठक में सभी की प्रशंसा की है और उम्मीद है कि 1 जून से शिवपुरी में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होगी।

तीसरी लहर को रोकना एक बड़ी चुनौती

बड़ा सवाल यह है कि तीसरी लहर को किस तरह से नियंत्रित किया जाए। कोरोना वायरस जिस तरह से म्यूटेंट हो रहा है और बहुत जल्द-जल्द रंग बदल रहा है, उससे तीसरी लहर की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। लेकिन इसे रोकने के लिए यदि हमने पर्याप्त तैयारी की तो आने वाले दिन राहत भरे होंगे।

तीसरी लहर को रोकने के लिए सबसे पहला उपाय यह है कि हम टीकाकरण की स्पीड को बढाए। अभी तो बहुत धीमी रफ्तार से टीकाकरण हो रहा है। जिले में लगभग 12 लाख लोगों का टीकाकरण सरकारी नीति के अनुसार किया जाना है। इनमें से 18 से 45 वर्ष के 7 लाख 80 हजार लोग हैं।

लेकिन अभी तक सिर्फ 1 लाख 82 हजार लोगों को ही टीका लगा है। इस तरह से एक लंबा रास्ता हमें तय करना है। 60 से 70 प्रतिशत आवादी का वैक्सीनेशन होने के बाद हर्ड इम्युनिटी बनेगी। दूसरी आवश्यक बात यह है कि अभी भी पूरी सावधानी बरतनी होगी।

टीकाकरण के बाद भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। यह जागरूकता यदि आ गई तो थर्ड लहर आएगी भी तो उसका प्रभाव शिवपुरी में सीमित ही रहेगा।