लोगो की प्यास बुझाने के लिए अपना घर द्वार छोड़ा, अब यह लोग ही बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं - karera News

करैरा। लगातार तापमान बढ रहा हैं ग्रामीण क्षेत्रो में पेयजल संकट ने दस्तक दे दी है। ऐसी ही समस्या करैरा अनुविभाग के ग्राम सिरसौद की पुनर्वास कालोनी अमोला क्रंमाक 1 में देखने को मिल रही है। कहने को इस कॉलोनी में यहां के निवासियो की प्यास बुझाने के लिए 6 हैंडपंप हैं लेकिन इनमें से 5 खराब हैं। इस हैंडपंप पर लोड अधिक होने के कारण इसकी भी सांस फूल रही है।

इस कॉलोनी में मड़ीखेड़ा डैम बनने के समय सिंध नदी के डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों को बसाया गया है। पानी के लिए जिन ग्रामीणों ने अपनी जमीन छोड़ी, अब गर्मी में वे ही बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं।

एक हजार की आबादी वाली इस पुनर्वास कालोनी में छह हैंडपंप हैं, लेकिन पिछले छह महीने से पांच हैंडपंप खराब पड़े हैं। ग्रामीण महिलाएं कई बार इसकी शिकायत अधिकारियों से कर चुकी हैं, लेकिन आज तक यह नहीं सुधरे हैं। एक बार मैकेनिक आए भी तो इन्हें सुधारे बिना बस औपचारिकता करके लौट गए। इसके बाद से कोई सुध लेने ही नहीं आया।

मजबूरी में पानी भरने के लिए पास के खेतों के कुओं में जाना पड़ता है। यहां पर खेत मालिक दुत्कार कर भगा देते हैं। अब सभी आदिवासी परिवार टोड़ा सोसाइटी के बोरिंग से पानी भरने के लिए मजबूर हैं। यदि यह बोर भी सूख गया तो अंतिम विकल्प भी खत्म हो जाएगा।

यहां पर ग्रामीणों को साल 2007 में विस्थापित कर दिया गया था, लेकिन 14 साल में आज तक यहां पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। कालोनी की पानी की समस्या को लेकर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के एई सतीश पंचरत्न का कहना है कि कालोनी के दो हैंडपंप सही करा दिए हैं। बाकी भी जल्द ही सुधरवा देंगे।