अशोक कोचेटा@शिवपुरी। नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अब टिकट के दावेदारों की दौड़ शुुरू हो गई है। टिकट के दावेदारों की भोपाल दौड़ शुरू हो गई तथा शिवपुरी में वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के समक्ष महत्वाकांक्षियों ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया। इसमें मुख्य रूप से दावेदारों के परिजन आदि शामिल रहे।
माना जा रहा है कि टिकट में यशोधरा राजे सिंधिया की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। दावेदारों में एक ओर जहां पार्टी में सक्रिय महिला नेत्री हैं। वहीं भाजपा नेताओं की पत्नियां भी इसमें शामिल हैं। सभी की निगाह भाजपा टिकट पर केन्द्रित है। क्योंकि प्रदेश और केन्द्र में भाजपा सरकार पदस्थ है और यह माना जा रहा है कि भाजपा का नगर पालिका अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद शहर के विकास में फंड की कोई कमी नहीं आएगी।
भाजपा टिकट के लिए एक अनार सौ बीमार वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। टिकट किसी एक को मिलना है लेकिन दावेदारों की संख्या एक दर्जन से भी अधिक है। सामान्य महिला के लिए नगर पालिका अध्यक्ष पद आज से 11 साल पहले 2009 में आरक्षित हुआ था। जब भाजपा की श्रीमति रिशिका अनुराग अष्ठाना निर्वाचित हुई थी। श्रीमति अष्ठाना पूर्व विधायक स्व. सुशील बहादुर अष्ठाना की पुत्रवधु और भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष अनुराग अष्ठाना की धर्मपत्नी हैं।
अपने परिजनों के भाजपा नेता होने का लाभ उन्हें मिला और उन्होंने पार्टी में सक्रिय महिला नैत्रियों को पीछे छोड़ते हुए टिकट ले लिया तथा वह जीत भी गईं। जीतने के बाद नपाध्यक्ष पद की कमान उनके पति अनुराग अष्ठाना के हाथों में रही। 2014 में नपाध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग पुरूष के लिए आरक्षित हुआ और भाजपा के खिलाफ एंटीइंकंबेंसी फैक्टर का लाभ उठाते हुए कांग्रेस के मुन्नालाल कुशवाह चुनाव जीत गए और भाजपा उम्मीदवार हरिओम राठौर पराजित हो गए। श्री राठौर के कार्यकाल में शहर विकास के लिए तरसता रहा।
प्रदेश में भाजपा सरकार होने का खमियाजा भी शिवपुरी के विकास को भुगतना पड़ा। जिसके फलस्वरूप शहर विकास की कोई योजनाएं यशोधरा राजे के प्रयास करने के बावजूद भी पूर्ण नहीं हो पाईं। यह बात अलग है कि अब बदली हुई परिस्थितियों में मुन्नालाल कुशवाह अपने गॉड फादर सिंधिया के साथ भाजपा में हैं। लेकिन यह माना जा रहा है कि उनके कार्यकाल का नुकसान नपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस को भोगना पड़ेगा ।
इसी कारण भाजपा टिकट पर सभी की नजरें केन्द्रित हैं। भाजपा के प्रमुख दावेदारों की बात करें तो पार्टी में सक्रिय महिला नेत्रियों मेें डॉ. रश्मि गुप्ता और 2009 के चुनाव मेें भाजपा से विद्रोह कर चुनाव लड़ी मंजूला जैन पर केन्द्रित हैं और दोनों टिकट के लिए सक्रिय भी हो गई हैं। टिकट की दोनों दावेदार यशोधरा राजे समर्थक मानी जाती हैं और पिछले एक दो वर्ष से डॉ. रश्मि गुप्ता यशोधरा राजे सिंधिया के काफी नजदीक आई हैं।
लॉकडाउन पीरियड में उन्होंने यशोधरा राजे की भावना के अनुरूप मास्क वितरण और समाजसेवा का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। लेकिन पार्टी में सक्रिय पुरूष नेताओं की पत्नियां भी टिकट की दौड़ में पीछे नहीं हैं। इनमें से अधिकांश यशोधरा राजे समर्थक हैं। इन दोनों के अलावा यशोधरा राजे समर्थक भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष और पूर्व नपा उपाध्यक्ष भानू दुबे की धर्मपत्नी श्रीमति दीप्ति (नीतू)दुबे को भी प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
यशोधरा राजे से नजदीकी उनकी ताकत मानी जा रही है। हालांकि श्री दुबे कहते हैं कि पार्टी और यशोधरा राजे की इच्छा होगी तभी वह अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाएंगे। नेताओं की पत्नियों में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र जैन गोटू की धर्मपत्नी श्रीमति ममता जैन और पुत्रवधु श्रीमति कनिका जैन के अलावा भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. शैलेंद्र गुप्ता की धर्मपत्नी श्रीमति अंजू गुप्ता, भाजपा जिला उपाध्यक्ष तेजमल सांखला की पुत्रवधु श्रीमति अरूणा सांखला, वरिष्ठ पार्षद अभिषेक शर्मा की धर्मपत्नी आरती शर्मा, पूर्व पार्षद रत्नेश जैन डिम्पल की धर्मपत्नी अंजू जैन, भाजपा नेता तरूण अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमति श्वेता अग्रवाल, पूर्व पार्षद श्रीमति कविता गर्ग, पार्षद चंदू बंसल की धर्मपत्नी संध्या बंसल आदि भी टिकट की दौड़ में हैं और सभी यशोधरा राजे समर्थक हैं।
भाजपा के पूर्व नगर महामंत्री भरत अग्रवाल अपने पुत्र लव अग्रवाल की धर्मपत्नी श्रीमति शिखा अग्रवाल और जिला उपाध्यक्ष हेमंत ओझा अपनी धर्मपत्नी श्रीमति रवजीत कौर, भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष ओमी जैन भी अपनी धर्मपत्नी के लिए टिकट हेतु प्रयासरत हैं। टिकट के इन सभी दावेदारों ने यशोधरा राजे के शिवपुरी दौरे के समय शक्ति परीक्षण किया। लेकिन यशोधरा राजे ने सभी दावेदारों से दो टूक कहा कि पार्टी जिसे भी टिकट देगी वह उसके लिए कार्य करेंगी।

