झील के लिए 20 करोड़ मिले, ना कलेक्टर को पता ना सीसीएफ को - Shivpuri News

भोपाल
। कहते हैं कलेक्टर जिले का मालिक होता है। जिले के संदर्भ में जितने भी फैसले होते हैं कलेक्टर को उसकी जानकारी होती है क्योंकि कलेक्टर के पास सबसे बड़ा ऑफिशल इनफॉरमेशन नेटवर्क होता है लेकिन शिवपुरी कलेक्टर का नेटवर्क शायद कमजोर है। कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिवपुरी की जिलों के लिए 19.55 करोड रुपए मंजूर किए परंतु इस डिसीजन के बारे में कलेक्टर के पास कोई जानकारी नहीं थी। चांद पाटा झील वन विभाग के अंतर्गत आती है परंतु सीसीएफ का कहना है कि हमने तो पैसे मांगे ही नहीं थे। कितनी अजीब बात है, शिवपुरी जिले में कोई ऐसा नहीं है जो यह बता सके कि कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए लगभग ₹200000000 का क्या किया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा मेरे पास कोई लेटर नहीं आया

लेकिन इस दौरान सबसे अहम बात यह सामने आई है कि यह बजट भोपाल से तो पास हो गया। परंतु इस बजट की जानकारी न तो कलेक्टर को है और न ही सीसीएफ को। कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने बताया है कि उनके पास अभी कोई लेटर नहीं आया है। यह कब स्वीकृत हुआ है इसकी मुझे जानकारी नही है। शाम तक कुछ आएगा तो उसके बाद ही वह कुछ बता पाऐंगे।

हमने तो कोई प्रस्ताव नहीं भेजा था: सीसीएस

जब इस संबंध में सीसीएफ से बात की तो उन्होंने बताया कि झीलों में ऊपर से जो गंदगी आ रही है वह जाधव सागर से आती है। यदि गंदगी को वही रोक दिया जाए तो चांद पाठक जी अपने आप साफ हो जाएगी। रही बात कैबिनेट में बजट की मंजूरी की तो हमने कोई प्रस्ताव नहीं भेजा था। शायद पीएचई वालों ने भेजा हो।

शिवपुरी के लिए जीवनदायिनी है चांद पाठा झील 

याद दिलाना जरूरी है कि शिवपुरी के लिए चांद पाठा झील जीवनदायिनी है। इस झील से हजारों किसानों की खेतों की सिंचाई होती है। आधे शहर की प्यास बुझाई जाती है। सिर्फ इतना ही नहीं यही चीज है जो पर्यटकों को शिवपुरी तक खींच लाती है। निश्चित रूप से यह झील पर्यटन के जरिए रोजगार का महत्वपूर्ण साधन हो सकती है परंतु दुखद बात यह है कि ना तो नेता, ना अधिकारी और ना ही जनता इस झील में संभावनाओं की तलाश करते हैं।