NRGS में फर्जी बिलों के सहारे करोडों का घोटाला, नाकामी छुपाने जिम्मेदार झाड़ रहे है पल्ला - kolaras news

कोलारस।
कोलारस का जनपद विभाग व एनआरजीएस कार्यालय इस समय भ्रष्टाचार का सबसे बडा अखाडा बने हुए है। यहां बाबूराज पूरी तरीके से हावी है और अधिकारी अजीबों गरीब जबाब देकर गुमराह करने में मशगुल बने हुए हैं। इन दोनों विभागों पर ग्राम पंचायतों में जारी निर्माण कार्यों की मॉनीटिरिंग एवं सस्थित हुए संबंधित निर्माण कार्यों को ऑनलाईन करने की जिम्मेदारी है। 

लेकिन जिम्मेदार सीईओ व एई एक दूसरी पर अपनी-अपनी नाकामी थोपने का कार्य कर रहे हैं। कोलारस जनपद के अंतर्गत आने वाली 68 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश पंचायतों में निर्माण कार्यों को कागजों में संपन्न कराकर करोडों रूपये की शासकीय राशि का आहरण किया गया है,और जो बिल व्हाउचर लगाए गए हैं उनमें से अधिकांश फर्म धरातल पर अपनी मौजूदगी नहीं दर्शा पा रही हैं। अधिकांश फर्मों के मालिकों के पास जवाब नहीं है कि जो मटेरियलों के बिल उनकी फर्मों के लगे हैं वह मटेरियल उपलब्ध कराने में वह सक्षम हैं या नहीं ।

खैरोना व गोराटीला में फर्जी बिलों के सहारे निकला लाखों रूपया

शासकीय योजनाओं को पलीता लगाकर कम समय में माला-माल कैसे बना जाता है इसका नमूना है कोलारस जनपद कि ग्राम पंचायत खैरोना व गोराटोला। इन दोनों ग्राम पंचायतों में कागजों में जमकर विकास हुआ है और धरातल पर विकास स्वंय लापता है, वह दूढने से भी नहीं मिलता। ग्राम पंचायतों में लगाए गए बिलों मे रेत, सीमेंट, गिटटी, खंडा-बोल्डर व मुरम आदि सामग्री का विक्रय किया जाना दर्शाया गया है, जिस फर्म के बिल लगे हैं बिलो मे मटेरियल का भुगतान भी लाखों रूपये हुआ है।


जबकि धरातल पर संबंधित निर्माण कार्य व फर्म देखने नहीं मिल रही और बोल्डर व मुरम को बिल के कुटेशनों में दर्शाया गया है वह सामग्री पूरी तरीके से अवैध है। कोलारस अनुविभाग में न तो कोई मुरम खदान कि लीज है और न ही पत्थर खदान कि, अत: जो फर्जी बिल लगाए गए हैं वह स्वत: ही प्रमाणित होते हैं, तो फिर यह फर्जी बिलों के सहारे इतना बड़ा घोटाला घटित कसे हो गया, जबकि एनआरजीएस में बैठे एई व उनके बाबू अपने कमीशन के लालच में सभी प्रकार के बिलों को नजर अंदाज कर गांधी के तीन बंदरों कि भूमिका निभाने का काम किस लालच में कर रहे हैं, यह सोचनीय विषय है।

फर्म 1, मटेरियल अनेक

ग्राम पंचायतों में जारी निर्माण कार्यों को देखने में आया है कि जिस फर्म के बिल लगे हैं वह फर्म संबधित ग्राम पंचायत को रेत, ईट, गिटटी, खंडा, बोल्डर, मुरम, सीमेंट, सरिया, स्टेशनरी, टायर, टेंट, लाईट, मिठाई सहित अन्य कई प्रकार की सामग्री मुहैया कराती है, एवं धरातल पर फर्म ही लापता है। इस संपूर्ण माजरे से भ्रष्टाचार कि दुर्गंध आती है, इन फर्मो द्वारा ग्राम पंचायतों को सभी प्रकार के मटेरियल मुहैया कराना दर्शाया जा रहा है, जो कि संभव नहीं है।