आखिर इतने अपराध कम होते हैं इस रेंजर योगी के सस्पैंड होने के लिए CCF साहेब / EX-Rey@ Lalit Mudgal

शिवपुरी। वन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को समझे तो जिले का सबसे बडा अधिकारी हैं DFO ,जिले के समान्य वन विभाग के सभी कर्मचारी और अधिकारी उनके अधिनस्थ होते हैं लेकिन जिले के एक DFO की पूरी पवार एक अदने से रेंजर के सामने खत्म हो जाती हैं,माफ करना DFO शिवपुरी को छोडो अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी मध्यप्रेदश,भोपाल तक का पवार भी रेंजर के आगे नमस्तक हो गया।

हम बात कर रहे हैं शिवपुरी रेंज आफिसर भुवनेश योगी की। इन पर DFO कई बार जांच सिद्ध कर कार्रवाही प्रस्ताति कर अपने वरिष्ठ अधिकाारियो को भेज चुके हैं लेकिन इस रेंजर की ताकत इतनी हैं कि DFO साहब की कागजी कार्रवाई को वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कागज की कोटरी में फैक दिया जाता हैं। अपराध गंभीर हैं कई कारनामे हैं आईए इनके अपराधो ओर इनकी असीमित पवार का एक्सरे करते हैं।

एक रेंजर का पहला परम कर्तव्य होता हैं कि अपने रेज क्षेत्र की रक्षा करना और सबसे ज्यादा अपनी वन संपदा की रक्षा करना,लेकिन यहां मामला उल्टा हैं रेंज आफिसर भुवनेश योगी के रेज वन क्षेत्र में पेडो की कटाई होती हैं और इन पेडो की कटाई करने वाले लोगो को सरक्षण दिया जाता हैं। मामला प्रमाणित हैं।

कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी मध्यप्रेदश भोपाल से जारी पत्र क्रंमाक क्रा\.से.\2020 \302 के अनुसार विषय था कि खैर वनोपज की संगठित गिरोह द्धवारा की जा रही अवैध तस्करी से संबंधित दर्ज प्रकरणो में लापरवाही बरतने बावत इस पत्र को हम सीधे-सीधे लिखने का प्रयास करते हैं। इस पत्र को अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी ने मुख्य वन संरक्षक शिवपुरी को लिखा हैं पत्र में सीधे-सीधे लिखा गया हैं कि आपके अधीन कार्यक्षेत्र मे दर्ज प्रकरण क्रमांक 662 \12 दिनांक 19.09.2019 एंव 622 \13 दिनांक 03.01.2020 शिवपुरी वनमंडल में गिरफ्तार एक मुख्य सरगना जिसकी जमाननत माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर के द्धवारा निरस्त की गई थी।

लेकिन परिक्षेत्र अधिकारी शिवपुरी के द्धवारा निर्धारित समय में परिवाद प्रस्तुत न किये जाने के कारण शिवपुरी न्यायालय द्धवारा उक्त आरोपी को दिनांक 03.03.2020 को जमानत दे दी गई इस तरह परिक्षेत्र अधिकारी शिवपुरी के द्धवारा घोर लापरवाही की गई जो कि अत्यंत खेद का विषय हैं। खैर में लिप्त संगठित गिरोह के विरूद्ध की जा रही कार्यवाही भी प्रभावित हुई। अत:संबंधित के स्पष्टीकरण लेकर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही कर इस कार्यालय को 15 दिवस के भीतर सूचित करने का कष्ट करे।

क्या लापरवाही बरती हैं रेंजर ने

रेंजर ने खैर के कटाई के अंतराज्जीय गिरोह के प्रकरण में गिरफ्तार दिनांक के 60 दिवस के बाद भी माननीय न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत नही किया,और इसका लाभ सीधे-सीधे अपराधियो को मिला और अपराधी माननीय न्यायालय से जमानत लेने में सफल हो गए। ऐसा नही है कि सिर्फ एक प्रकरण में रेंजर योगी द्ववारा ऐसा कृत्य किया गया,ऐसे कई प्रकरण है।

अब सवाल बडा उठता हैं कि जब प्रकरण न्यायाल में पहुंच गया तो निध्श्चित समय सीमा में परिवाद प्रस्तुत रेंजर द्धवारा क्यो नही किय गया। ऐसे क्या कारण रहे। बताया जा रहा हैं कि समय सीमा में अगर परिवार प्रस्तुत हो जाता तो आरोपियो को जमानत नही मिलती।

यह रेंज आफिसर और इन पेडो के हत्यारो के मिली भगत का जीता जागता उदाहरण हैं खबर यह मिल रही हैं कि रेंजर को समय सीमा में परिवाद प्रस्तुत न करने के लिए लाखो का नेक मिला हैं इस लिए रेजंर ने इन हत्यरो के लिए शुभ काम किया हैं। मामला विभाग में उझला और रेंजर को दोषी माना और डीएफओ ने इस पर कार्रवाई के लिए लिखा लिखा लेकिन रेंजर पर कार्रवाही नही हुई।

इस पूरे प्रकरण में एक और बात निकलकर सामने आती हैं कि जब कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी मध्यप्रदेश ने दिनांक 12.3.2020 को पत्र लिखा और रेंज आफिसर शिवपुरी योगी पर 15 दिवस में कार्यवाही करने को लिखा गया। लेकिन 15 दिवस छोडिए आज 150 दिन से अधिक हो गए लेकिन कार्यवाही नही हुई।

बल्कि इस भ्रष्ट रेंजर भुवनेश योगी का ट्रांसफर के रूप में ईनाम दिए जाने की तैयारी की जा रही हैं... ऐसा क्यो,CCF वाय.पी सिंह ने आज दिनांक तक क्यो कार्रवाई नही की....क्या डरते हैं CCF रेंजर भुवनेश योगी से,.....या रेंजर और CCF वायपी सिंह के कोई अवैध संबंध हैं जो इस भ्रष्टाचारी को सजा नही दे रहे। ऐसे कई सवाल खडे हैं जिनके जबाब देने होगें CCF सिंह को।