तहसीलदार ने हाईकोर्ट का आदेश पलट दिया, सस्पेंड | pohri news

पोहरी। सरकारी जमीन को निजी कर देने पर पोहरी तहसीलदार ओपी राजपूत को निलंबित कर दिया है। साल 2013 में दो सर्वे नंबरों की जमीन को हाईकोर्ट ने शासकीय करने का आदेश दिया था। लेकिन पोहरी तहसीलदार ने जमीन को निजी दर्ज कर दिया। हाईकोर्ट में अवमानना के प्रकरण के बाद प्रशासन सख्त हुआ और जमीन को वापस सरकारी दर्ज करते हुए तहसीलदार को निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार बैराड़ तहसील के कालामढ़ में सर्वे क्रमांक 869 रकवा 0.11 हेक्टयेर एवं सर्वे क्रमांक 870 मिन-1 रकवा 0.26 हेक्टयेर जमीन के संबंध में हाईकोर्ट ग्वालियर की पीआईएल पर 3 अप्रैल 2013 को शासकीय घोषित कर दिया गया था।

लेकिन एक अन्य तहसीलदार ओपी राजपूत ने न्यायालय तहसीलदार बैराड़ के प्रकरण अपने प्रकरण में 26 जून 2014 को आदेश जारी कर याचिका क्रमांक 233/2013 एवं हाई कोर्ट की अंतिम रूप में निर्णीत रिव्यू पिटीशन, जिसमें विवादित भूमि को निजी करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं दिया था।

फिर भी नियम विरुद्ध कानून की अव्हेलना कर तहसीलदार ने 26 जून 2014 को जमीन को कंप्यूटर खसरे में शासकीय अंकित टीम को विलोपित कर रामकुमार पुत्र बद्रीप्रसाद ओझा एवं अन्य का नाम खसरे में दर्ज कर दिया। इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी गई।

जिसमें कलेक्टर शिवपुरी,तहसीलदार ओपी पांडेय सहित राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों को पार्टी बनाया गया। हाईकोर्ट में अधिकारियों को गलती स्वीकारनी पड़ी और एसडीएम जांच रिपोर्ट में तहसीलदार को जिम्मेदार ठहराकर शासन विरुद्ध कार्य करना पाया गया।

इसी के चलते 12 फरवरी 2020 को अपर कलेक्टर आरएस बालोदिया ने आदेश जारी कर पोहरी तहसीलदार आेपी राजपूत को निलंबित कर जिला मुख्यालय अटैच कर दिया है। वहीं तहसीलदार ओपी राजपूत का कहना है कि रिव्यु पिटीशन में गलत निर्णय किया है तो अपील में खारिज कर दिया। पोहरी में भूमाफिया पर हमने कार्रवाई की है। इसलिए बदले की भावना से मेरे खिलाफ कार्रवाई कराई गई है।