खुला खत:इस स्कूल संचालक पर FIR कर जेल भेज देना चाहिए था, उसे नोटिस भी नही दिया DEO कटियार ने क्यो.....

शिवपुरी। यह खबर नही हैं सवाल सीधा हैं शिवपुरी जिले के जिला शिक्षा अधिकारी से जिस स्कल संचालक पर मामला दर्ज कर जेल में ठूस देना चाहिए था। उस पर मामला दर्ज करने की बात तो दूर की बात नोटिस भी जारी नही किया। यह सवाल बडा बन कर शिवपुरी की फिजाओ में घूम रहा हैं।

पद जिला शिक्षा अधिकारी काम जिले के सभी शासकीय,अशासकीय स्कूलो का निरिक्षण करना कार्यवाही करना। शिक्षा की उच्च गुणवत्ता बनाए रखना और अशासकीय स्कूल नियम पर चले किस भी प्रकार की लूट पाट न करे। इसके अतिरिक्त शिक्षा से संबधिंत कई कार्य जिला शिक्षा अधिकारी के होते होंगें।

इसी पद की गरिमा के कारण जिला शिक्षा अधिकारी को टॉप 30 स्कूल के काले कारनामो की जांच के लिए जांच अधिकारी बनाया गया होगा। लेकिन सवाल सीधा सा हैं कि जिस स्कूल की मान्यता स्वयं की नही हैं,और शहर में 7 स्कूल खोलने का दावा विज्ञापन कर रहा था।

टॉप 30 गुरूकुलम नाम से खुला यह स्कूल सीधे-सीधे लूट कर रहा था। अपनी अन्य शाखाओ के लिए प्रिसिंपल बनाने व फैंचाईजी देने के लिए डेढ लाख की मांग कर रहा था। और ऐसे कई बेरोजगारो से 30—30 हजार रूपए ऐठ लिए थे। सवाल फिर सीधा सा है कि इस स्कूल की स्वयं की मान्यता नही हैं फिर कैसे ये स्कूल का संचालन कर अपनी लूटने की गतिविधि संचालित कर रखी थी।

इस मामले में जांच अधिकारी बने जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार घटना दिनांक से आज तक जांच नही कर सके है ओर स्कूल अभी भी बडे शान से चल रहा हैं,कैसे। क्या इस स्कूल को बंद कराने के अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी को नही हैं,क्या जांच के नाम पर वसूली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं या वसूली हो चुकी हैं। अभी तक जांच पूरी कर मामला दर्ज क्यो नही करवाया गया यह सवाल अभी भी खडे हैं।

क्या था मामला
बीते 9 दिन पूर्व शिवपुरी समाचार डॉट कॉम को सूचना मिली कि सिद्धेश्वर मंदिर के सामने एक हॉल में एक स्कूल की संस्था की आॅपनिंग हुई है। इस स्कूल के बाहर विधिवत रूप से मुम्बई टॉप 30 गुरूकुलम के नाम का बोर्ड भी लगा हुआ था। जब इसमें जाकर पता किया तो सामने आया कि उक्त स्कूल की खुद की कोई मान्यता नहीं थी। उसके बाबजूद भी उक्त स्कूल संचालक जिले में 7 संस्थांए खोलने का दाबा कर रहा है।

इन स्कूलों के लिए उक्त स्कूल संचालक ने मान्यता तक के लिए एप्लाई तक नहीं किया। परंतु यहां शिक्षकों और स्कूल संचालक के लिए स्टाफ की भर्ती संचालित की जाने लगी। इस भर्ती के दौरान चैन सिस्टम से शहर के बेरोजगार लोगों से 20 से लेकर 30 हजार रूपए में स्कूल में संचालन सहित अन्य पोस्टों पर भर्ती करने के लिए लोगों से बसूली की जा रही थी।

इस मामले को शिवपुरी समाचार डॉट कॉम ने प्रमुखता से उठाया। जिसपर तत्काल तत्कालीन प्रभारी कलेक्टर एचपी वर्मा ने जांच करने के लिए डीईओ,बीआरसीसी को मौके पर भेजा। टीम ने मौेके पर पहुंचकर उक्त फर्जी स्कूल के संचालक के कागजात मांगे। जिसपर उक्त स्कूल का संचालक प्रशासन को कोई भी कागज उपलब्ध नहीं करा पाया।

जिसपर से उक्त स्कूल संचालक ने डीईओ को 2 घंटे में कागज उपलब्ध कराने का आश्वसन दिया। जिसपर डीईओ ने पूछा कि इस तरह से आप प्रशासन को बिना सूचना के लोगो से पैसे नहीं बसूल सकते। उसके बाद उन्हें कार्यालय आने की बात कहकर प्रशासन वहां से आ गया।

बताया गया है कि 2 घंटे का समय मांगने बाला उक्त स्कूल संचालक 3 दिन तक कार्यालय ही नहीं पहुंचा। उसके बाद तीन दिन बाद महज एक सोसाईटी का पंजीयन लेकर उक्त संचालक प्रशासन के पास पहुंचा। परंतु प्रशासन और स्कूल संचालक के अनैतिक गठबंधन के बाद आज दिनांक तक उक्त मामले में जांच पूरी नहीं हो सकी।

इनका कहना है
इस मामले में उक्त संचालक ने 3 दिन बाद कागजात भेजे है। अब हम इन कागजों की जांच करा रहे है। अगर दोषी पाया गया तो हम उसे सीईओ को भेजेंगें। वह ही इस मामले में कार्यवाही करेंगे।
अजय कटियार,डीईओ शिवपुरी।

यह मामला मेरे पास आया था। परंतु इस मामले की जांच डीइओ कर रहे है। अब जांच में क्या सामने आया वह डीईओ ही बता पाएंगे।
एचपी वर्मा,सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी।