कैसे 5 हजार की नौकरी छोड़ इस योजना की मदद से बनी अपने प्रतिष्ठान की मालिक मोना: पढिए सक्सेस स्टोरी

शिवपुरी। शिवपुरी निवासी मोना सोनी पुत्री श्री मनमोहन सोनी भार्गव जनरल स्टोर पर कार्य करती थी। वहां पर उसको 5 हजार रूपए मासिक आय के रूप में मिलते थे, पर आज बढ़ती मंहगाई के दौर में इतनी कम आय में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था। मोना काम करके आर्थिक रूप से अपने पिता को मदद देना चाहती थी और वह ऐसा कर भी रही थी। परन्तु इतनी कम आय होती थी कि मोना को समझ नहीं आ रहा था कि वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को कैसे मजबूत करें और तभी मोना को स्वरोजगार के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का पता चला और अब मोना की स्थिति पूरी तरह से बदल गई है।

मोना को उसके दोस्तों के माध्यम से यह पता चला कि भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान शिवपुरी में स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तभी वह संस्थान में पहुंची और अपनी स्थिति के बारे में बताया। मोना ने जनरल ईडीपी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आवेदन फार्म भरकर संस्थान कार्यालय में जमा किया।

संस्थान के अधिकारी शहरी आजीविका मिशन के बारे में मोना को जानकारी देते हुए बताया कि शहरी आजीविका मिशन के माध्यम से एक लाख रूपए का ऋण लेने के लिए आवेदन फार्म जमा किया। कुछ दिनों के जनरल ईव्हीपी प्रशिक्षण के बाद ओरियेंटल बैंक द्वारा एक लाख रूपए का ऋण स्वीकृत कर दिया गया। अब मोना के पास अपना स्वरोजगार स्थापित करने के लिए एक मुश्त राशि थी। मोना ने इस पूंजी का उपयोग बेहतर ढंग से कर अपना स्वरोजगार स्थापित किया।

मोना ने लखेरा गली सदर बाजार में ''महाकाल जनरल स्टोर'' के नाम से अपनी स्वयं की दुकान खोली। जिससे प्रतिमाह मोना को लगभग 15 से 20 हजार रूपए की आय हो जाती है। इस धनराशि से मोना अपनी बैंक की किश्त समय पर जमा कर रही है। साथ ही अपने परिवार की भी मदद कर पा रही है।

मोना का कहना है कि वह शुरू से ही आत्मनिर्भिर होकर काम करना चाहती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति सही न होने से हमेशा यह लगता था कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। अब अपने स्वरोजगार से धीरे-धीरे यह संभव होने लगा है और यह भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से मिलने वाले सही सुझाव एवं प्रशिक्षण से ही संभव हुआ है।