तुलसीदासजी का नाम आते ही प्रभु उभरकर सामने आ जाता है श्रीराम का स्वरूप: संत पुरूषोत्तमदास महाराज

शिवपुरी। गोस्वामी तुलसीदास ने सगुण भक्ति की रामभक्ति धारा को ऐसा प्रवाहित किया कि वह धारा आज भी प्रवाहित हो रही है, गोस्वामी तुलसीदास ने रामभक्ति के द्वारा न केवल अपना ही जीवन कृतार्थ किया वरन सभी को श्रीराम के आदर्शों से बांधने का प्रयास किया।

वाल्मीकि जी की रचना रामायण को आधार मानकर गोस्वामी तुलसीदास ने लोक भाषा में राम कथा की रचना की, तुलसीदास जी जिनका नाम आते ही प्रभु राम का स्वरुप भी सामने उभर आता है, तुलसीदास जी रामचरित मानस के रचियेता तथा उस भक्ति को पाने वाले जो अनेक जन्मों को धारण करने के पश्चात भी नहीं मिल पाती उसी अदभूत स्वरुप को पाने वाले तुलसीदास जी सभी के लिए सम्माननीय एवं पूजनीय रहे।

उक्त उद्गार प्रकट किए श्रीतुलसी आश्रम मंदिर के महंत एवं राष्ट्रीय संत पुरूषोत्तमदास महाराज ने जो स्थानीय श्रीतुलसी आश्रम मंदिर पर मॉं जानकी सेना संगठन द्वारा आयोजित तुलसी जयंती कार्यक्रम को मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर अन्य साधु संत भी मौजूद रहे जिन्होंने तुलसी जयंती पर अपने विचार प्रकट करते हुए गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में पुजारी संघ के जिलाध्यक्ष महंत लक्ष्मणदास त्यागी महाराज, पं.केदार समाधिया, मॉं पीताम्बरा उपासक सहित अन्य संत समाज के पदाधिकारी मौजूद थे। इस आयोजन में धर्मलाभ प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ समाजसेवी अमन गोयल, मॉं जानकी सेना के जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह रावत, ठकुरपुरा के महाते रामभरोसे, वंशी यादव, रामसिंह यादव, अतर सिंह रावत, राजू ग्वाल, मणिकांत शर्मा, शिवा पाराशर, नरेन्द्र भार्गव, रवि रावत व अन्य स्थानीय गणमान्य एवं धर्मप्रेमीजन मौजूद रहे।