टेंडर की एक्सपायरी डेट निकलने के बाद 3 साल तक कैसे चला रही है शिवुपरी नपा:​ राजे ने विधानसभा में मुददा उठाया

शिवपुरी। अपने चहेतों को बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के सालों साल तक उपकृत करने का जो नियम विरूद्ध खेल नगर पालिका के जिम्मेदार तीन साल से अधिक समय से खेल रहे थे उस खेल को शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने विधानसभा में एक प्रश्न पूछकर पूरी तरह खत्म कर दिया।

जी हां! सनसनी खेज मामला यह है कि 2014-15 में मोटर डालने निकालने का ठेका नगर पालिका ने निकाला था। इस ठेके में जिन ठेकेदारों को ठेका मिला था उन्हीं ठेकेदारों से तीन साल तक बिना किसी ठेका प्रक्रिया के नियमों को खूंटी पर टांगकर ठेका संचालन कराया गया।

नगर पालिका ने बहुत हद तक षडय़ंत्र पूर्वक एक साल के ठेके को कई सालों तक चलाने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत टेंडर अवधि समाप्त हो जाने के बाद नए टेंडर निकाले लेकिन आई दर स्वीकृत/ अस्वीकृत करने में जान बूझकर बिलम्ब किया और टेंडर पर निरस्ती का निर्णय सात-आठ माह बाद लिया गया।

बिलम्ब से लिए गए निर्णय के कारण एक साल का ठेका दो साल चल गया और पुन: टेंडर जब तक आमंत्रित किए गए तब तक एक साल के ठेके को ढाई साल हो गए। इस बार भी दर निरस्ती का निर्णय सात-आठ माह बाद लिया गया। जिससे एक साल का ठेका तीन साल से अधिक चल गया।

यह सब इसलिए किया गया ताकि वह ठेकेदार 15-16 में वर्कऑर्डर लिए थे वही ठेकेदार 19-20 तक आरोपित तौर पर कार्य करते रहें और प्रक्रिया को मजाक बनाकर नियमों को ताक पर रखने का चलन चलता रहे। यह सब चलता भी रहता लेकिन शिवपुरी विधायक यशोधरा राजे सिंधिया ने विधानसभा में मोटर डालने निकालने के ठेके को लेकर संक्षिप्त और सतही विधानसभा (मामला) लगाई।

विधानसभा के लगते ही नगर पालिका के जिम्मेदार घुटने पर आ गए। आनन फानन में नगर पालिका ने मोटर डालने निकालने के ठेके को लेकर जो नियम विरूद्ध चलन नगर पालिका चला रही थी उसे पलटने और आए टेंडरों को स्वीकृत करने के लिए नगर पालिका मजबूर हो गई। नगर पालिका ने विधानसभा प्रश्न के जवाब में वस्तु स्थिति और नियमों को बहुत हद तक छुपाकर जो जानकारी प्रेषित की उसमें भी नगर पालिका गले-गले तक फंसी नजर आ रही हैं

क्योंकि शिवपुरी विधायक ने  विधानसभा में निम्न प्रश्न पूछे थे। पूछा गया था कि  नगर पालिका में विगत 3 वर्ष में नलकूप मोटर मरम्मत कार्य का टेंडर कब और किस फर्म को किस दर में दिया गया था? यह टेंडर कितने समय की अवधि के लिए था क्या उक्त टेंडर की समयावधि पीआईसी के द्वारा बढ़ाई गई यदि हॉ तो कितने समय के लिए बढाई और क्या नलकूप मोटर मरम्मत कार्य का टेंडर पुन: बुलाना था? यदि हॉं तो क्यों नहीं बुलाया गया?

इन प्रश्नों के जवाब में यह तो स्वीकार किया गया है कि एक साल का टेंडर तीन साल से अधिक समय तक चला लेकिन यह नहीं बताया गया कि एक साल के टेंडर को तीन साल तक चलाने के लिए नगर पालिका ने किस नियम को आधार बनाया! किस नियम का पालन किया। क्या पीआईसी को ठेके की समयावधि बढ़ाने का अधिकार है? क्या पीआईसी 60-60 लाख के टेंडर में निर्णय लेने की पात्रता रखती हैं? क्या पीआईसी 25-25 लाख के टेंडर में भी पात्रता रखती हैं?

जो दरें परिषद द्वारा निरस्त करना बताई गई हैं क्या उन दरों का निरस्त करने की निविदा समिति भी बनी थी या टेंडर प्रक्रिया में निविदा समिति को दरकिनार कर परिषद की शक्ति का दुरूपयोग किया गया हैं।  क्या आर्थिक मामलों (टेंडर)में परिषद के गैर जानकार सदस्यों की राय और निर्णय  स्वीकार योग्य हैं? ऐसे कई ज्वलंत और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को उजागर करने वाले सच विधानसभा द्वारा विधायक के प्रश्न के जवाब में कराई जाने वाली जांच में उजागर होंगे।

इतना जरूर हो चुका हैं कि विधायक के प्रश्न लगाते ही नगर पालिका ने एक साल के टेंडर को कई साल तक चलाने की विसंगति खत्म कर नए टेंडरों की दर स्वीकृत कर उन्हें वर्कऑर्डर दे दिया हैं लेकिन मामला बड़ा हैं।  जबकि नगरीय मंत्री के जवाब में यह स्पष्ट किया गया कि नगर पालिका परिषद शिवपुरी की परिषद  द्वारा वित्त वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 कुल तीन वर्ष के लिए समय-सीमा बढ़ाई गई है।

मरम्मत कार्य के लिए 6 जून 2016 से 28 अगस्त 2017, 26 जून 2019 को निविदाए बुलाई गई थी, परन्तु निविदा दर अधिक प्राप्त होने से प्राप्त निविदाओं को परिषद द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया है। इस की जांच उपरांत परिणाम के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।