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कागजों में सिमटी युवा स्वाभिमान योजना, दो महीने काम करने के बाद भी हाथ नहीं आया एक भी रूपया | Shivpuri News

शिवपुरी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के उपरांत शासन द्वारा युवा बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से युवा स्वाभिमान योजना का क्रियान्वयन किया। जिसके तहत शिक्षित युवा बेरोजगारों को तीन माह तक विभिन्न कार्यालय में प्रशिक्षण दिया जाएगा। तदुपरांत इन्हें किसी न किसी कार्यालय में रोजगार उपलब्ध करा दिया जाएगा। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बने हुए छ: माह का समय व्यतीत हो चुका हैं, लेकिन जिले भर में किसी भी युवा बेरोजगार को रोजगार नहीं दिया गया।

जबकि शिक्षित युवा बेरोजगारों से विभिन्न कार्यालयों में बेगारें तो कराई जाती रही लेकिन शासन द्वारा इन शिक्षित युवा बेरोजगारों को एक रूपए का भी पारश्रिमक नहीं दिया गया। जिससे एक ओर तो शिक्षित युवा बेरोजगारों ने असंतोष व्याप्त हैं। वहीं शासन की उक्त योजना से बेरोजगारों का मोहभंग हो चुका हैं।

पांच माह में एक भी बेरोजगार को नहीं मिला रोजगार

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षित युवा बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से युवा स्वाभिमान योजना को प्रारंभ किया गया था। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि शासन की उक्त योजना कागजों में सिमटकर रह गई है। जबकि शासन द्वारा उक्त योजना का क्रियान्वयन के आंकड़े तो एकत्रित कर जन समान्य के समक्ष पेश किए जा रहे हैं। लेकिन शिवपुरी जिले की वास्तिविक हकीकत को देखा जाए तो एक भी शिक्षित युवा बेरोजगार को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया।

जबकि शिक्षित युवा बेरोजगारों से सैकड़ों रूपया रजिस्ट्रेशन, नपा कार्यालय तक आने जाने में किराया भाड़ा व्यय करा लिया गया। कुछ समय तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तो जारी रही जिसके तहत थम्ब इम्प्रेंशन एवं रजिस्ट्रेशन का कार्यक्रम चलता रहा। लेकिन कुछ समय पश्चात रजिस्ट्रेशन करना ही बंद कर दिया गया।

आचार संहिता का बहाना बनाकर रोके रजिस्ट्रेशन

कांग्रेस की प्रदेश सरकार द्वारा युवा बेरोजगारों के लिए चलाई गई युवा स्वाभिमान योजना के अंतर्गत विगत तीन के अंतर्गत 487 शिक्षित युवा बेरोजगारों द्वारा रोजगार पाने के उद्देश्य से अपना रजिस्ट्रेशन थम्ब इम्प्रेंशन का कार्य पूर्ण किया। इसके उपरंात तीन माह तक इन शिक्षित बेरोजगार युवकों से विभिन्न कार्यालयों में बेगारें ली जाती रही। तीन माह के उपरांत आचार संहिता का बहाना लेकर पंजीयन का कार्य रोक दिया गया। जिससे शिक्षित युवा बेरोजगारों का उक्त योजना से मोहभंग हो गया। 23 मई को आचार संहिता हट जाने के उपरांत पुन: पंजीयन प्रारंभ किए गए और 19 दिन में महज 6 युवा बेरोजगारों द्वारा उक्त योजना के तहत पंजीयन कराया गया हैं। जिससे यह तथ्य स्पष्ट होता है कि युवा बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए प्रारंभ की गई योजना दम तोड़ती नजर आ रही हैं।

शिक्षित युवा रोजगारों को नहीं मिला पारश्रिमक

शिक्षित युवा बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा युवा स्वाभिमान योजना प्रारंभ की गई। जिसके तहत लगभग 5 सैकड़ा लोगों द्वारा उक्त योजना में रजिस्ट्रेशन कराया गया। प्रशिक्षण के नाम पर शिक्षित युवा बेरोजगारों से विभिन्न कार्यालयों में बेगारें तो कराई जाती रही। साथ ही युवा बेरोजगारों से कार्य यदि शिवपुरी में लिया जा रहा हैं तो उसका प्रशिक्षण केन्द्र जिले के तहसील स्तरों पर या ब्लॉक स्तरों पर बनाए गए जिसमें शिक्षित युवा बेरोजगारों को भारी परेशानी का तो सामना करना ही पड़ा साथ ही हजारों रूपए किराए में व्यय करा लिए गए।

इस दौरान शासन द्वारा घोषणा की गई थी शिक्षित युवा बेरोजगारों को 4 हजार रूपए प्रतिमाह के मान से पारश्रिमक दिया जाएगा। उक्त योजना के तहत तीन माह तक शिक्षित युवा बेरोजगारों से कार्य तो लिया गया लेकिन किसी भी बेरोजगार को एक भी रूपया पारश्रिमक के रूप में नहीं दिया गया। युवा बेरोजगारों का कहना है कि शाासन की उक्त योजना महज शिक्षित युवा बेरोजगारों के साथ एक भद्दा मजाक बनकर रह गई है।