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दक्षता संवर्धन कोर्स: अब कमजोर सरकारी शिक्षक 10वीं का पाठ्यक्रम पढेंगे, फिर बच्चों को पढ़ाएंगे | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। मप्र सरकार अपनी योजनाओ में कही न कही से यह मान चुकी हैं,कि सरकारी शिक्षक अब बच्चो को पढाने योग्य नही रहे हैं,इस लिए उन्है ट्रेनिंग की आवयश्यता हैं, यह खबर कई सवालो को जन्म देती हैं,कि सरकारी योजनाए कितनी सफल हैं सरकारी शिक्षको लगभग हर साल पढाने के लिए कोई न कोई ऐसी योजनाए आती हैं,शिक्षको को पढाने के व्यवस्था को देखने के लिए सरकार ने पूरा एक विभाग डीपीसी कार्यालय खोल रखा हैं लेकिन शिक्षको की पढाने की गुणवत्ता में सुधार नही हो रहा हैं अब चलते है अपनी मूल खबर की ओर।
  
बताया जा रहा हैं कि जिन स्कूलाें में रिजल्ट जीराे से तीस फीसदी रहा है, उन स्कूलाें के शिक्षकाें की परीक्षा ली जाएगी। सबसे ज्यादा विद्यार्थी अंग्रेजी और गणित विषय में फेल हुए हैं। इन विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों से परीक्षा में वही प्रश्न पूछे जाएंगे, जाे इन्हाेंने पिछले चार सालाें में अपने विद्यार्थियों को पढ़ाए हैं। जिले में 60 स्कूलों का रिजल्ट जीरो से तीस फीसदी रहा है। इन स्कूलों के 152 शिक्षकों को अब परीक्षा देनी होगी। शिक्षा विभाग हाईस्कूल के शिक्षकों की 12 जून को परीक्षा लेने की तैयारी कर रहा है।

इसमें पिछले 4 वर्षों में आए बोर्ड प्रश्नपत्र के आधार पर पेपर आएगा और फिर शिक्षकों का इसके आधार पर मूल्यांकन होगा। इतना ही नहीं डीईओ, डीपीसी और डाइट प्राचार्य का भी मूल्यांकन 18 मई को शिक्षा विभाग के प्रदेश स्तर के अफसरों के सामने होगा। ऐसा इसलिए ताकि ये अफसर अपने जिले के स्क्ूलों में मॉनीटरिंग कर सकें।

0-30 फीसदी परिणाम वाले जिले में 60 स्कूल हैं। शिक्षा विभाग चाहता है कि इन स्क्ूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को विषय का अच्छा ज्ञान हो इसलिए वह इन शिक्षकों की परीक्षा लेकर यह नए सत्र में शुरु होने वाले स्कूल के पहले ही उन्हें किताब पढ़ने के लिए विवश कर रहे हैं। बोर्ड का यह प्रयोग सफल रहा तो निश्चित रुप से इससे शिक्षकों की गुणवत्ता भी सामने आएगी और बच्चों को भी बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।
डीईओ, डीपीसी और डाइट प्राचार्य से भी हल कराया जाएगा पर्चा

पिछले 4 साल के प्रश्नपत्रों के आधार पर बनेगा पेपर
जिला शिक्षा अधिकारी की मानें तो 12 जून को जो पेपर आयोजित किया जा रहा है, उसमें शिक्षक जो विषय स्कूल में पढ़ाता है, उसी की परीक्षा होगी। इसमें पिछले 4 साल में बोर्ड ने जिस तरह के प्रश्न परीक्षाओं में विद्यार्थियों से पूछे हैं, उसी आधार पर एक प्रश्नपत्र तैयार होगा। यह प्रश्नपत्र शिक्षकों को निर्धारित समय अवधि में हल करना होगा। ऐसे में 0-30 प्रतिशत स्कूल वाले विषयवार शिक्षक इसमें शामिल होंगे।

मिडिल स्कूल के ऐसे शिक्षक जो कक्षा 10वीं पढ़ाते हैं, वह भी 12 जून को परीक्षा देंगे। अंतर सिर्फ इतना होगा कि इन शिक्षकों का जो पेपर आएगा वह प्रतिभा पर्व पर केंद्रित होगा। इसमें पिछले 4 सालों के पेपर के आधार पर नया प्रश्नपत्र तैयार होगा। इसे इन शिक्षकों को देना अनिवार्य होगा। ऐसे तकरीबन 144 शिक्षक परीक्षा देंगे।

थ्री डी की भी होगी परीक्षा

एनसीईआरटी कोर्स के आधार पर कक्षा 9 हिंदी विषय की परीक्षा 3 डी देंगे। डीईओ, डीपीसी और डाइट प्राचार्य को 30 मई को परीक्षा देनी होगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 मई को प्रिसिंपल सेेक्रेट्री के पास जिले भर के यह अधिकारी पहुंचेंगे। इनका हिंदी विषय का मूल्यांकन किया जाएगा। इस परीक्षा का उद्देश्य इतना है कि मॉनीटिरिंग टीम यदि दक्ष होगी तो वह अपने जिले के शिक्षकों की मॉनीटरिंग भी बेहतर ढंग से कर सकेगी।

इसलिए ली जा रही है शिक्षकों की परीक्षा

आम तौर पर शिक्षकों की परीक्षाएं नहीं ली जातीं। लेकिन इस बार परीक्षा लेने के पीछे विभाग की सोच है कि शिक्षक स्कूल में विषय की किताब पढ़कर नहीं जाते। इस कारण विद्यार्थियों को इससे पूरा ज्ञान नहीं मिल पाता। परीक्षा लेने से उसकी तैयारी हाे जाएगी। इसलिए 17 जून से जब कक्षाएं खुलें तो शिक्षक पहले से ही इतना दक्ष हो कि वह छात्रों को बेहतर झंग से पढ़ा सके। इसलिए विषय वार शिक्षकों की यह परीक्षा है। ताकि वह अपने विषय का अध्ययन स्कूल खुलने से पहले ही कर लें।

इधर... 31 मई से कक्षा-6 से 8 तक शिक्षकों का होगा प्रशिक्षण

एपीसी अशोक जैन ने बताया कि 31 मई से कक्षा 6-8 तक के 2 हजार से अधिक शिक्षकों का शैक्षणिक प्रशिक्षण डाइट में आयोजित होगा। 5 दिन के इस प्रशिक्षण में शिक्षकों को दो दिन तक पढाने के टिप्स प्रोजेक्टर के माध्यम से विषय-विशेषज्ञों द्वारा दिए जाएंगे। जबकि तीन दिन की ट्रेनिंग में दक्षता संवर्धन कोर्स की जानकारी इन शिक्षकों को दी जाएगी। खास बात यह है कि यह प्रशिक्षण लेना हर शिक्षक के लिए अनिवार्य है। अन्यथा वह कार्रवाई की जद में आएगा।

स्कूल के शिक्षकाें काे इस संबंध में निर्देश दे दिए हैं

विभाग के निर्देश हैं कि 12 जून को हमें 0-30 फीसदी परिणाम वाले स्कूलों की परीक्षा लेनी है। इसलिए हम इसकी तैयारी में जुट गए हैं। स्कूल शिक्षकों को भी हमने निर्देश दे दिए हैं।
हरिओम चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी