शिवपुरी में स्वास्थ्य कर्मचारियों का 1 करोड़ रुपए डकार गई कामथेन सिक्योरिटी सर्विस

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image शिवपुरी। शिवपुरी जिले के स्वास्थ्य विभाग की जमीनी ताकत आउटसोर्स कर्मचारियों ने आज काम रोक दिया है। शिवपुरी जिले के उप स्वास्थ्य केन्द्रो,सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पताल में लगभग एमएसडब्ल्यू (MSW) के 400 आउटसोर्स कर्मचारी काम करते है। इन कर्मचारियों को कहना है कि कंपनी हमसे पूरा काम करवा रही है और आधा वेतन दे रही है,कर्मचारियों का कहना है कि एक कर्मचारी की 7 हजार रुपए की वेतन कम दी रही है। अगर इस बात को सच माने तो प्रतिमाह 28 लाख रुपए का घोटाला किया जा रहा है।

Kamthen Security Service Absconds with ₹1 Crore of Health Workers' Funds in Shivpuri

इस मामले को लेकर आज इन आउटसोर्स कर्मचारियों ने शुक्रवार को  कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और अपनी पीड़ा जाहिर की। ज्ञापन में बताया गया कि उन्हें 15 नवंबर 2025 से लगातार सेवाएं देने के बावजूद शासन द्वारा निर्धारित वेतन का आधा भी नहीं मिल रहा है। कुल मिलाकर कर्मचारियों ने चार माह नौकरी कर ली है और इनका 1 करोड़ रुपए वेतन गायब कर दिया गया है।

आधा वेतन, पूरा भुगतान-बीच में कौन खा रहा पैसा ?
कर्मचारियों के अनुसार, शासन द्वारा आउटसोर्स कंपनी को प्रति कर्मचारी 475 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 14,250 रुपए प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा है। लेकिन कर्मचारियों के खातों में केवल 7,000 रुपए प्रतिमाह ही डाले जा रहे हैं। इस हिसाब से यदि जिले के करीब 400 कर्मचारियों को देखें, तो हर महीने लाखों रुपये का अंतर सामने आ रहा है। कर्मचारियों ने इसे संगठित वेतन घोटाला करार दिया है और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर सवाल
कर्मचारियों ने अपने ज्ञापन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस कंपनी को ठेका दिया गया है-कामथेन सिक्योरिटी सर्विस, इंदौर-वह पहले भी 4 से 5 बार ब्लैकलिस्ट हो चुकी है। इसके बावजूद मोटी रकम लेकर उसे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा सौंपा गया, जो अपने आप में जांच का विषय है।

PF और ESI भी नहीं-भविष्य अंधेरे में
वेतन में कटौती के साथ-साथ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पीएफ (भविष्य निधि) और ईएसआई (कर्मचारी राज्य बीमा) जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। इससे न केवल वर्तमान आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि उनका भविष्य भी सुरक्षित हो गया है।

चार महीने का हिसाब भी संदिग्ध
कर्मचारियों का कहना है कि ज्वाइनिंग के बाद शुरुआती चार महीनों में भी उन्हें पूरा वेतन नहीं दिया गया। उन्हें लगातार 7,000 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान किया गया, जबकि उन्हें लगभग दोगुनी राशि मिलनी चाहिए थी। इस पूरे मामले में करोड़ों के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

काम बंद, आंदोलन की चेतावनी
अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी अब खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने काम बंद कर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर उन्हें शासन की निर्धारित दर के अनुसार पूरा वेतन नहीं मिला, तो वे भूख हड़ताल और अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे।

CMHO का पक्ष—कंपनी को पूरा भुगतान
इस पूरे मामले में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषेश्वर का कहना है कि विभाग द्वारा आउटसोर्स कंपनी को पूरा भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कर्मचारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के काम बंद करने को अनुचित बताया, लेकिन साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि कंपनी से बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

इस मामले में कामथेन सिक्योरिटी सर्विस के संचालक रामकृपाल द्विवेदी से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि स्वास्थ्य विभाग ने अभी हमारा बिल क्लीयर नही किया है इस कारण अभी पार्ट पेमेंट किया है। जब पूछा गया कि कर्मचारी का वेतन कितना है इस बाप श्री द्विवेदी ने बताया कि में पूछकर बताता हूं। कुल मिलाकर उक्त कंपनी कर्मचारी को कलेक्ट्रेट रेट के वेतन का सपना दिखाकर 7 हजार रुपए का भुगतान कर रही है। कुल मिलाकर यह ब्लैकलिस्टेड कंपनी कर्मचारियों का 4 माह में एक करोड़ रुपए वेतन डकार चुकी है।