शिवपुरी मे बेटियो का पावर प्ले,14 टॉपर्स में 12 छात्राए,पढिए रिजल्ट का ऑडिट

Adhiraj Awasthi
शिवपुरी
। शिवपुरी जिले के मप्र बोर्ड परीक्षा परिणामो मे बेटियो का पावर प्ले देखने को मिला है। इस वर्ष जिले के 22 विद्यार्थियों ने प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान हासिल किया। खास बात यह रही कि इनमें से 10 छात्र-छात्राएं शासकीय विद्यालयों के हैं, जो सरकारी स्कूलों की मजबूत होती शैक्षणिक गुणवत्ता को दर्शाता है। 12वीं में जिले के 14 टॉपर्स में 7 सरकारी स्कूलों के छात्र शामिल रहे, जबकि 10वीं में टॉप 10 सूची में 3 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने जगह बनाई है।

यह बात सरकारी पढाई पर सवाल भी खडे कर रही है। कारण स्पष्ट है कि 10वीं क्लास का बच्चा अपनी पढाई पर पूरी तरह स्कूल पर ही निर्भर रहता है,वही 12वीं क्लास का स्टूडेंटस सब्जेक्ट के हिसाब से कोचिंग और ट्यूशन लेता तो कह सकते है कि 12वीं क्लास का सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला स्टूडेंट्स की पढ़ाई का प्राइवेटिकरण हो जाता है।

बेटियों का पावर प्ले
मप्र बोर्ड परीक्षा परिणाम में 12वीं क्लास में तुलसी राजावत,चंचल कुशवाह,प्रीति कुशवाह,संजना धाकड़,अनुष्का धाकड,दीप्ति रावत,प्रतिष्ठा गौड़,हंसिका राठौड़,प्रगति सोनी,वंशिका यादव,लक्ष्मी यादव,खुशी धाकड, कान्हा शर्मा,रजींत प्रजापति ने प्रदेश की मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई है। संख्या का गणित देखे तो 12वीं क्लास में 14 टॉपर्स रहे है जिसमे 12 छात्राएं है और 2 छात्र है। 10वीं क्लास की बात करे तो  10 स्टूडेंट्स ने प्रदेश की मेरिट सूची में अपनी उपिस्थती दर्ज कराई है इसमें 6 छात्राएं है और 4 छात्र हैं।  

परीक्षा परिणाम में सरकारी आंकड़े
इस बार जिले का 10वीं का रिजल्ट 71.58% रहा, जो पिछले वर्ष के 66.90% से 4.68% अधिक है। वहीं 12वीं का रिजल्ट 78.71% रहा, जो पिछले साल के 70.58% से 8.20% ज्यादा है। रैंकिंग में भी जिले ने छलांग लगाई—10वीं में 45वें स्थान से 34वें स्थान पर और 12वीं में 32वें से 20वें स्थान पर पहुंचकर शिवपुरी ने अपनी स्थिति मजबूत की है।

सरकारी स्कूलों ने मारी बाजी
इस बार के परिणाम में शासकीय विद्यालयों का प्रदर्शन प्राइवेट स्कूलों से बेहतर रहा।
10वीं में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 72.68% जबकि प्राइवेट स्कूलों का 70.21% रहा है,
12वीं में सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 81.24% जबकि प्राइवेट स्कूलों का 76.02% रहा है,लेकिन शिक्षा के पैमाने पर 10वीं के रिजल्ट का पैमाने से देखे तो प्राइवेट स्कूल के टॉपर अधिक रहे है सरकारी के नही,वही 12वीं क्लास में स्टूडेंट्स प्राइवेट कोचिंग शुरू कर देता है। सरकारी टीचरो पर निर्भर ना होकर आत्मनिर्भर और प्राइवेट सर के सूत्रो पर चलना शुरू कर देता है।